Green Sanvi Vessel: हॉर्मुज स्ट्रेट से कितनी LPG लेकर भारत आ रहा ग्रीन सान्वी शिप, जानें कितने दिन चलेगी इतनी गैस?
Green Sanvi Vessel: जानकारी के अनुसार, इस टैंकर में करीब 46,000 मीट्रिक टन एलपीजी लदी हुई है. इतनी बड़ी मात्रा में एलपीजी सप्लाई चैन को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

Green Sanvi Vessel: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और सप्लाई के संकट के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. भारतीय झंडे वाला एलपीजी टैंकर ग्रीन सान्वी शिप सफलतापूर्वक हॉर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत की ओर बढ़ रहा है. जहाज में बड़ी मात्रा में एलपीजी लगी हुई है, जो देश की ऊर्जा जरूरत के लिहाज से बहुत अहम मानी जा रही है. इस जहाज के 6 अप्रैल को मुंबई पहुंचने की संभावना जताई जा रही है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि हॉर्मुज स्ट्रेट से ग्रीन सान्वी शिप कितनी एलपीजी लेकर भारत आ रहा है और यह एलपीजी कितने दिन चलेगी.
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कितनी एलपीजी लेकर आ रहा है टैंकर?
जानकारी के अनुसार इस टैंकर में करीब 46,000 मीट्रिक टन एलपीजी लदी हुई है. इतनी बड़ी मात्रा में एलपीजी सप्लाई चैन को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. वहीं ग्रीन सान्वी के अलावा भारत से जुड़े कई जहाज खाड़ी क्षेत्र में हॉर्मुज स्ट्रेट पार करने की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं. मिडिल ईस्ट युद्ध होने के बाद से ग्रीन सान्वी सातवां एलपीजी गैस शिप है, जो इस मार्ग से होकर गुजरा है. इससे पहले 6 एलपीजी टैंकर शिवालिक, नंदा देवी, जग बसंत, बीडब्ल्यू टायर,बीडब्ल्यू एल्म और पाइप गैस भारतीय तट पर पहुंच चुके हैं.
कितने दिन चलेगी 46,000 मीट्रिक टन गैस?
दरअसल 46,000 मीट्रिक टन एलपीजी गैस को किलोग्राम में बदले तो यह करीब 4.6 करोड़ किलो गैस होती है. अगर इसकी घरेलू गैस सिलेंडर के हिसाब से गणना करें, तो इस एक टैंकर की गैस से 14.2 किलो के करीब 32 लाख से ज्यादा सिलेंडर भरे जा सकते हैं. यानी लाखों परिवारों तक राहत पहुंच सकती है. हालांकि, एक्सपर्ट्स के अनुसार इस टैंकर में मौजूद एलपीजी भारत की लगभग आधे दिन की खपत के बराबर है. मौजूदा हालात में खपत थोड़ी कम हुई है, फिर भी यह सप्लाई देश के लिए बहुत अहम मानी जा रही है.
क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज?
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है. जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है. भारत जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है. ऐसे में इस मार्ग से जहाज का सुरक्षित गुजरना बहुत जरूरी हो जाता है. वहीं मिडिल ईस्ट संघर्ष शुरू होने के बाद यह सातवां एलपीजी टैंकर हैं जो इस मार्ग से भारत की ओर आया है. इसके अलावा राहत के बीच चिंता भी बनी हुई है. दरअसल, कई और जहाज अभी भी खाड़ी क्षेत्र में फंसे हैं और आगे बढ़ने के लिए अनुमति का वेट कर रहे हैं. इन जहाजों में ग्रीन आशा और जग विक्रम जैसे जहाज शामिल है, जिनके जल्दी ही स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पार करने की उम्मीद जताई जा रही है. बताया जा रहा है कि सरकार लगातार कूटनीतिक स्तर पर प्रयास कर रही है. ताकि भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिल सके.
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Source: IOCL



























