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Ship Fuel Consumption: एक‌ समुद्री जहाज में कितना लगता है ईंधन, जानें 1 किलोमीटर में कितना आता है खर्चा

Ship Fuel Consumption: एक समुद्री जहाज को चलाने में काफी ज्यादा फ्यूल का इस्तेमाल होता है. आइए जानते हैं कि एक किलोमीटर के सफर में ईंधन पर कितना खर्चा आ जाएगा.

Ship Fuel Consumption: जब भी हम गाड़ियों की बात करते हैं तो हम आमतौर पर माइलेज को किलोमीटर प्रति लीटर में मापते हैं. लेकिन जब समुद्र पार करने वाले बड़े कार्गो जहाज की बात आती है तो हिसाब पूरी तरह से बदल जाता है. यह पूछने के बजाय कि वे 1 लीटर में कितनी दूरी तय करते हैं हम पूछते हैं कि वह 1 किलोमीटर में कितने लीटर ईंधन जलाते हैं. आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

एक बड़े कंटेनर जहाज का फ्यूल कंजम्पशन 

लगभग 350 से 400 मीटर लंबा एक आम बड़ा कंटेनर जहाज लगभग 200 से 250 लीटर फ्यूल कंजम्पशन कर सकता है. रोजाना ये जहाज स्पीड और लोड के आधार पर 150 से 250 टन फ्यूल जलाते हैं. ये जहाज आमतौर पर 20 से 24 नॉट की क्रूजिंग स्पीड पर चलते हैं. साथ ही स्पीड में थोड़ी सी भी बढ़ोतरी फ्यूल कंजम्पशन को काफी ज्यादा बढ़ा देती है.

जहाज किस तरह का फ्यूल इस्तेमाल करते हैं 

पेट्रोल या फिर डीजल से चलने वाली गाड़ियों के उलट बड़े जहाज खास समुद्री फ्यूल जैसे वेरी लो सल्फर फ्यूल ऑयल या हैवी फ्यूल ऑयल का इस्तेमाल करते हैं. इसे आमतौर पर बंकर फ्यूल के नाम से जाना जाता है. यह फ्यूल रेगुलर डीजल से ज्यादा गाढ़ा और भारी होता है. इसे खासतौर पर समुद्री इंजन के लिए डिजाइन किया गया है. ग्लोबल एनवायर्नमेंटल नियम कड़े होने के बाद कई जहाज सल्फर एमिशन कम करने के लिए वेरी लो सल्फर फ्यूल ऑयल पर शिफ्ट हो गए हैं.

1 किलोमीटर पर कितना आता है खर्चा 

समुद्री फ्यूल की कीमतें ग्लोबल तेल बाजारों के आधार पर ऊपर नीचे होती रहती हैं. औसतन समुद्री फ्यूल की कीमत लगभग $600 से $800 प्रति टन होती है. यह इंटरनेशनल बाजार में लगभग ₹50000 से 65000 प्रति टन होती है. अगर एक बड़ा जहाज प्रति किलोमीटर लगभग ढाई सौ लीटर फ्यूल इस्तेमाल करता है तो फ्यूल की कीमत और एफिशिएंसी के आधार पर प्रति किलोमीटर अनुमानित फ्यूल की कीमत 15000 से 20000 रुपये के बीच हो सकती है.

फ्यूल की खपत अलग-अलग क्यों होती है 

एक जहाज की फ्यूल की खपत कभी भी फिक्स नहीं होती. कार्गो का साइज और वजन एक बड़ी भूमिका निभाते हैं. पूरी तरह से भरा हुआ जहाज इंजन पर ज्यादा दबाव डालता है और फ्यूल की खपत को बढ़ाता है. इसी के साथ स्पीड भी एक जरूरी फैक्टर है. जैसे ही सही  क्रूजिंग स्पीड से थोड़ी सी भी बढ़ोतरी होती है फ्यूल की खपत बढ़ जाती है.

ये भी पढ़ें: दुनिया का सबसे ईमानदार देश कौन-सा, किस पायदान पर आते हैं भारत-पाकिस्तान?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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