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Space Debris: अंतरिक्ष में इंसानों ने फैलाया कितना मलबा, जानें पृथ्वी के लिए अब कितना खतरनाक?

Space Debris: अंतरिक्ष में कचरा वक्त के साथ-साथ बढ़ता जा रहा है. आइए जानते हैं कि यह कचरा पृथ्वी के लिए कितना खतरनाक साबित हो सकता है.

Space Debris: अंतरिक्ष में एक समस्या वक्त के साथ-साथ बढ़ती जा रही है. यह समस्या है अंतरिक्ष के कचरे की. दशकों तक सैटेलाइट लॉन्च करने, रॉकेट मिशन भेजने और असफल प्रयोगों की वजह से इंसानों ने अनजाने में ही पृथ्वी की कक्षा को एक भरे पूरे कबाड़खाने में बदल दिया है. आज लाखों टुकड़े काफी तेज रफ्तार से ग्रह के चारों ओर घूम रहे हैं. ये ना सिर्फ भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए बल्कि उस टेक्नोलॉजी के लिए भी काफी गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं जिस पर हम हर दिन निर्भर रहते हैं. 

अंतरिक्ष में असल में कितना कचरा है? 

यूरोपीय स्पेस एजेंसी और नासा के ताजा डेटा के मुताबिक अंतरिक्ष के कचरे का पैमाना चौंकाने वाला है. अभी 40,500 से ज्यादा बड़ी चीजों पर नजर रखी जा रही है. यह बड़ी चीजें 10 सेंटीमीटर से बड़ी होंगी. इनमें खराब हो चुके सैटेलाइट और रॉकेट के टूटे हुए हिस्से शामिल हैं. इसके अलावा अनुमान है कि कक्षा में 12 लाख से ज्यादा मध्यम आकार के टुकड़े तैर रहे हैं. इन मध्यम आकार के टुकड़ों में 1 से 10 सेंटीमीटर के टुकड़े शामिल हैं. इससे भी ज्यादा चिंता की बात 13 करोड़ से ज्यादा छोटे कणों की मौजूदगी है. इन पर नजर रखना लगभग नामुमकिन है. इस बढ़ती हुई समस्या में भारत का योगदान लगभग 129 ऐसे कचरे के टुकड़ों का है जिन पर नजर रखी जा सकती है. इनमें खराब हो चुके सैटेलाइट और रॉकेट के बचे हुए हिस्से शामिल हैं. 

यह कचरा इतना खतरनाक क्यों है?

सबसे बड़ा खतरा सिर्फ चीजों की संख्या नहीं है बल्कि उनकी रफ्तार भी है. यह टुकड़े लगभग 28000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलते हैं. जो एक गोली की गति से भी तेज है. इतनी तेज गति से एक छोटी सी चीज भी काफी बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है. 

केसलर सिंड्रोम का डर 

सबसे बड़ी चिंताओं में से एक केसलर सिंड्रोम है. अगर कचरे के दो बड़े टुकड़े आपस में टकराते हैं तो वे हजारों छोटे-छोटे टुकड़े बन सकते हैं. फिर ये टुकड़े दूसरी चीजों से टकरा सकते हैं. इससे एक चेन रिएक्शन शुरू हो सकता है. सबसे बूरे हालात में पृथ्वी की कक्षा कचरे से इतनी भर सकती है कि सैटेलाइट लॉन्च करना लगभग नामुमकिन हो सकता है.

पृथ्वी पर कैसे पड़ेगा असर? 

यह सिर्फ अंतरिक्ष की समस्या नहीं है. इसका असर पृथ्वी पर जीवन पर भी पड़ सकता है. जीपीएस नेविगेशन, इंटरनेट कनेक्टिविटी, मौसम का पूर्वानुमान और यहां तक कि बैंकिंग सिस्टम के लिए भी सैटेलाइट जरूरी होती है. अगर ये सैटेलाइट कचरे की वजह से खराब हो जाते हैं या फिर नष्ट हो जाते हैं तो जिन सेवाओं पर हम रोजाना निर्भर रहते हैं उनमें से कई सेवाओं में गंभीर रुकावटें आ सकती हैं.

अंतरिक्ष यात्रियों के लिए खतरा 

अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष के मलबे से लगातार खतरा रहता है. इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को अक्सर टक्करों से बचने के लिए अपना रास्ता बदलना पड़ता है. काफी ज्यादा रफ्तार होने की वजह से पेंट के एक छोटे से टुकड़े जैसी चीज भी अंतरिक्ष यान में छेद कर सकती है.

यह भी पढ़ें:  क्या ईरान में सच में चलता है 1 करोड़ का नोट, जानें भारत में इसकी कितनी वैल्यू

स्पर्श गोयल एबीपी लाइव के साथ कंटेंट राइटर के तौर पर जुड़े हुए हैं. वह जनरल नॉलेज बीट की जिम्मेदारी संभालते हैं. कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में उन्हें चार साल का अनुभव है. एबीपी से पहले वह डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद में करीब दो साल तक काम कर चुके हैं. उन्होंने नमस्कार भारत से अपने करियर की शुरुआत की थी. .

वह अलग-अलग विषयों पर रिसर्च करके पाठकों के लिए जानकारी को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण अंदाज में पेश करते हैं. उन्होंने न्यूज राइटिंग के साथ-साथ स्क्रीनराइटिंग में भी अपनी पकड़ मजबूत की.

उन्होंने मां शाकुम्भरी यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. इसके साथ उन्होंने एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलिविजन से स्क्रीनप्ले का डिप्लोमा भी हासिल किया है.

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