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आजादी के समय बांग्लादेश में कितने हिंदू थे, अब कितने बचे?

Hindu Population In Bangladesh: बांग्लादेश में हिंदू आबादी का इतिहास सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि डर, पलायन और बदलते हालात की दास्तान है. आइए जानें वहां पर आजादी के बाद से अब कितने हिंदू बचे.

दक्षिण एशिया के नक्शे पर मौजूद बांग्लादेश कभी सांस्कृतिक विविधता और धार्मिक सह-अस्तित्व का बड़ा उदाहरण माना जाता था, लेकिन समय के साथ इस देश की सामाजिक बनावट बदलती चली गई. खासतौर पर हिंदू समुदाय की संख्या में आई गिरावट आज एक बड़ा सवाल बन चुकी है. आजादी के समय जो समुदाय आबादी का बड़ा हिस्सा था, वह अब सिमटता जा रहा है. आखिर कैसे बदले हालात, कब-कब आई बड़ी गिरावट और आज की सच्चाई क्या है, सबकुछ इस रिपोर्ट में जानते हैं.

आजादी के समय कैसी थी तस्वीर?

बांग्लादेश जब 1971 में एक अलग देश बना, तब वहां हिंदू समुदाय की आबादी काफी मजबूत थी. 1971 की जनगणना के मुताबिक उस समय देश की कुल आबादी का करीब 22 प्रतिशत हिस्सा हिंदू था. इससे पहले अगर 1901 के आंकड़े देखें, तो पूर्वी बंगाल में हिंदुओं की हिस्सेदारी लगभग 33 प्रतिशत तक थी. यानी आजादी से पहले ही हिंदू समुदाय वहां बड़ी संख्या में मौजूद था और समाज, व्यापार, शिक्षा और संस्कृति में उसकी अहम भूमिका थी.

1971 के बाद क्यों बदला जनसंख्या संतुलन?

1971 का स्वतंत्रता संग्राम बांग्लादेश के इतिहास का सबसे बड़ा मोड़ था. इसी दौर में सबसे ज्यादा पलायन हुआ. हिंसा, असुरक्षा और अनिश्चित भविष्य के डर ने लाखों हिंदुओं को भारत समेत दूसरे देशों की ओर जाने पर मजबूर कर दिया. इसके बाद भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए. समय-समय पर राजनीतिक अस्थिरता और सामाजिक तनाव ने इस पलायन को और बढ़ाया.

दशकों में कैसे घटती गई हिंदू आबादी?

आंकड़े इस बदलाव की कहानी साफ कहते हैं कि 1974 की जनगणना में हिंदू आबादी घटकर करीब 13.5 प्रतिशत रह गई. 1991 तक यह और गिरकर लगभग 10.5 प्रतिशत हो गई. 2011 की जनगणना में यह आंकड़ा 8.5 प्रतिशत तक पहुंच गया. सबसे ताजा 2022 की जनगणना बताती है कि अब बांग्लादेश में हिंदू आबादी सिर्फ 7.95 प्रतिशत के आसपास रह गई है. संख्या के लिहाज से यह करीब 1 करोड़ 30 लाख के आसपास बैठती है, लेकिन प्रतिशत में गिरावट लगातार जारी है.

2024 की हिंसा और बदले हालात

जुलाई-अगस्त 2024 में बांग्लादेश में हुए हिंसक आंदोलन ने देश को एक बार फिर अस्थिर कर दिया. आरक्षण से जुड़े हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ शुरू हुआ युवा आंदोलन देखते ही देखते हिंसा में बदल गया और शेख हसीना की सरकार को सत्ता छोड़नी पड़ी. इसके बाद हालात और बिगड़ गए. इस्लामी संगठनों की सक्रियता बढ़ी और अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदू समुदाय पर हमलों की खबरें सामने आने लगीं. युवा छात्र नेता उस्मान हादी की हत्या के बाद स्थिति और ज्यादा तनावपूर्ण हो गई.

कहां रहते हैं सबसे ज्यादा हिंदू?

आज भी बांग्लादेश के कुछ इलाकों में हिंदू समुदाय की मौजूदगी अपेक्षाकृत ज्यादा है. गोपालगंज, सिलहट और ठाकुरगांव जैसे क्षेत्रों में हिंदू आबादी का अनुपात अन्य जगहों से अधिक है. हालांकि यह स्थिति पूरे देश की तस्वीर नहीं बदल पाती है. ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक, दशकों से हिंदुओं की संख्या घटती जा रही है.

पलायन के पीछे की बड़ी वजहें

रिपोर्ट्स बताती हैं कि हिंदू आबादी में गिरावट के पीछे कई कारण रहे हैं. बार-बार होने वाली हिंसा, भेदभाव की शिकायतें और असुरक्षा की भावना इसके मुख्य कारण माने जाते हैं. कई परिवार बेहतर भविष्य और सुरक्षित माहौल की तलाश में बांग्लादेश छोड़ चुके हैं. हाल के वर्षों में बढ़ी हिंसा ने इस डर को और गहरा किया है.

क्या कहती है आज की सच्चाई?

करीब 17 करोड़ की आबादी वाले मुस्लिम बहुल बांग्लादेश में हिंदू आज भी देश का दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक समुदाय हैं, लेकिन उनकी हिस्सेदारी लगातार कम होती जा रही है. आंकड़े बताते हैं कि यह गिरावट किसी एक घटना की नहीं, बल्कि दशकों से चले आ रहे हालात का नतीजा है. मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियां इस चुनौती को और गंभीर बना रही हैं.

यह भी पढ़ें: Gun Invention: इस देश ने किया था बंदूकों का आविष्कार, जानें सबसे पहले किसके खिलाफ हुई थी इस्तेमाल?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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