कैसे तय होती है फसल की MSP, किसान को कौन-कौन से खर्च मिलते हैं?
Minimum Support Price: अक्सर ही लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर न्यूनतम समर्थन मूल्य क्या होता है और यह कैसे तय किया जाता है. आइए जानते हैं इस सवाल का जवाब.

- C2 लागत भूमि किराया और पूंजी ब्याज को जोड़ती है।
Minimum Support Price: न्यूनतम समर्थन मूल्य भारत की कृषि नीति का एक बड़ा हिस्सा है. इसका मकसद किसानों को फसल की कीमतों में भारी गिरावट से बचाना है. इसे केंद्र सरकार कुछ चुनिंदा फसलों के लिए घोषित करती है और यह कृषि लागत और मूल्य आयोग की सिफारिश पर आधारित होता है जो कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के तहत काम करता है. लेकिन इसकी कीमत का हिसाब कैसे लगाया जाता है और किसानों को क्या मिलना चाहिए, इस बात को तय करते समय किन खर्चों को ध्यान में रखा जाता है? आइए जानते हैं क्या है इन सवालों का जवाब.
न्यूनतम समर्थन मूल्य क्या है?
न्यूनतम समर्थन मूल्य वह कीमत है जिसे सरकार खास कृषि फसलों के लिए उनके मार्केटिंग सीजन से पहले घोषित करती है. इसका मकसद किसानों को कीमत का एक बेंचमार्क देना और काफी कम बाजार भाव पर उपज बेचने के जोखिम को कम करना है. कृषि लागत और मूल्य आयोग कई वजहों की जांच करता है जिनमें उत्पादन लागत, मांग और आपूर्ति, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कीमतें, एक दूसरे के मुकाबले फसलों की कीमत और उपभोक्ताओं व व्यापक अर्थव्यवस्था पर संभावित असर शामिल हैं.
सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य दर को घोषित करने से पहले कृषि लागत और मूल्य आयोग की सिफारिश पर विचार करती है. हालांकि न्यूनतम समर्थन मूल्य कीमत का सहारा दे सकता है लेकिन इसकी घोषणा का मतलब यह नहीं होता कि हर किसान उसे कीमत पर असीमित मात्रा में फसल बेच सकता है. असली खरीद फसल, जगह, लागू व्यवस्था और सरकारी खरीद काम पर निर्भर करती है.

A2 लागत क्या है?
A2 फसल उगाने के लिए किसान के असल नकद खर्चों को दिखाता है. यह खेती के दौरान नकद या फिर वस्तु के रूप में होने वाले सीधे खर्च हैं. इनमें बीज, रासायनिक उर्वरक, खाद और कीटनाशकों के खरीद के साथ-साथ सिंचाई का शुल्क और पानी के लिए भुगतान भी शामिल है.
A2 में ईंधन और डीजल, मशीनरी के खर्च जैसे ट्रैक्टर या फिर थ्रेशर का किराया, किराए पर रखे गए मजदूरों की मजदूरी और पट्टे पर ली गई जमीन का किराया भी शामिल है. इन खर्चों की पहचान करना काफी आसान है क्योंकि इनमें किसान द्वारा खर्च किया गया पैसा या फिर किया गया भुगतान शामिल होता है.
हालांकि A2 खेती में इस्तेमाल होने वाले सभी संसाधनों की पूरी आर्थिक कीमत को शामिल नहीं करता है. उदाहरण के लिए जब परिवार के सदस्य बिना औपचारिक मजदूरी लिए खेत में काम करते हैं तो उनकी मेहनत भी उत्पादन में योगदान देती है. अब भले ही किसान उन्हें सीधे नकद भुगतान न करें.

A2+FL लागत क्या है?
इसमें A2 के तहत आने वाले सभी सीधे खर्च शामिल होते हैं. इसी के साथ किसान के परिवार द्वारा की गई बिना वेतन वाली मेहनत की अनुमानित कीमत को भी जोड़ा जाता है. FL का मतलब है फैमिली लेबर. यह अतिरिक्त हिस्सा इस बात को मानता है कि परिवार के सदस्य बुवाई, सिंचाई, निराई गुड़ाई, कटाई और खेती से जुड़े दूसरे कामों में काफी समय लगा सकते हैं.
पारिवारिक मजदूरी की कीमत का अनुमान लगाया जाता है ना किसके लिए नकद भुगतान किया जाता है. इसे शामिल करने से खेती की लागत की एक व्यापक तस्वीर मिलती है जो सिर्फ A2 से नहीं मिल पाती. सरकार आमतौर पर अपनी न्यूनतम समर्थन मूल्य नीति को इस तरह बताती है कि यह A2+FL के आधार पर निकाली गई उत्पादन लागत पर काम से कम 50% का रिटर्न देती है.
आसान शब्दों में अगर कहीं तो अगर उत्पादन लागत ₹1000 प्रति क्विंटल है तो 50% जोड़ने पर कीमत ₹1500 प्रति क्विंटल होगी. हालांकि न्यूनतम समर्थन मूल्य की असल गणना में फसल के हिसाब से आकलन और कृषि लागत और मूल्य आयोग द्वारा ध्यान में रखे जाने वाले दूसरे कारक भी शामिल होते हैं.
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C2 लागत क्या है?
C2 खेती की उत्पादन लागत का एक ज्यादा व्यापक पैमाना है. A2+FL के साथ-साथ इसमें किस की अपनी जमीन का अनुमानित किराया मूल्य और खेती में इस्तेमाल होने वाली फिक्स्ड कैपिटल की कीमत पर लगने वाला ब्याज भी शामिल होता है. जमीन वाला हिस्सा उस इनकम को दिखाता है जो किसान खेती करने के बजाय जमीन को किराए पर देकर कमा सकता था. ब्याज वाला हिस्सा खेती से जुड़ी संपत्तियों में लगाई गई पूंजी की अपॉर्चुनिटी कॉस्ट को बताता है.
इस वजह से C2 न सिर्फ खर्च किए गए पैसे और इस्तेमाल किए गए पारिवारिक श्रम को बल्कि किसान के पास पहले से मौजूद संसाधनों की आर्थिक कीमत को भी शामिल करने की कोशिश करता है. किसान और कृषि संगठन अक्सर इस पैमाने का जिक्र करते हैं जब वह इस बात पर चर्चा करते हैं कि क्या न्यूनतम समर्थन मूल्य खेती की पूरी लागत को ठीक से कवर करता है या नहीं.
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