कैसे काम करते हैं टैंक, किस देश के पास हैं सबसे ताकतवर टैंक? जानें भारत का नंबर
टैंक दो मुख्य हिस्सों में बटा होता है, जिसमें नीचे का हिस्सा हल और ऊपर के घूमने वाले हिस्से को टेरेट कहा जाता है. टेरेट कुछ ही सेकंड में चारों दिशा में घूम सकता है और इसी में मुख्य तोप लगी होती है.

आज के समय में जब भी युद्ध की बात होती है तो टैंक का नाम सबसे पहले लिया जाता है. जमीन पर लड़ाई लड़ने वाली सेना के लिए टैंक आज भी रीढ़ माने जाते हैं. भारी वजन, मजबूत कवच और लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता इन्हें सबसे असरदार हथियार बनाती है. वहीं आधुनिक दौर में टैंक सिर्फ लोहे की गाड़ी नहीं बल्कि इनमें एडवांस टेक्नोलॉजी, डिजिटल सिस्टम और हाई पावर इंजन लगाए जाते हैं जो इन्हें और खतरनाक बनाते हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि टैंक कैसे काम करते हैं और किस देश के पास सबसे ताकतवर टैंक है?
टैंक की बनावट और काम करने का तरीका
टैंक दो मुख्य हिस्सों में बटा होता है, जिसमें नीचे का हिस्सा हल कहलाता जाता है और ऊपर के घूमने वाले हिस्से को टेरेट कहा जाता है. टेरेट कुछ ही सेकंड में चारों दिशा में घूम सकता है और इसी में मुख्य तोप लगी होती है. टैंक में पहियों की जगह कैटरपिलर ट्रैक लगे होते हैं. हर साइड पर सात रोड व्हील्स होते हैं, जिन पर स्टील और रबड़ पैड वाले ट्रैक चलते हैं. इंजन से पावर मिलने पर पीछे लगा ड्राइव स्प्रॉकेट घूमता है और पूरा ट्रैक आगे बढ़ता है. ट्रैक की वजह से टैंक का वजन ज्यादा हिस्से में फैल जाता है, जिससे वह कीचड़, रेत और ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर भी आसानी से चल पाता है. टैंक को मोड़ने के लिए दोनों ट्रैकों की स्पीड अलग-अलग की जाती है. अगर बाईं ओर मुड़ना हो तो दाईं तरफ का ट्रैक तेज चलता है और बाईं तरफ का धीमा हो जाता है.
टैंक का इंजन और रफ्तार
आपको बता दें कि आजकल आधुनिक टैंकों में टरबाइन इंजन लगाया जाता है, जो जेट इंजन जैसा काम करता है. उदाहरण के तौर पर अमेरिकन टैंक M1A2 Abrams में AGT-1500 इंजन लगा होता है. इसका वजन करीब 68 टन है. लेकिन इसके बावजूद यह लगभग 42 मील प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ सकता है. इसकी फ्यूल क्षमता करीब 500 गैलन है, हालांकि माइलेज काफी कम होता है.
टैंक के अंदर कितने लोग होते हैं?
एक टैंक में आमतौर पर चार सदस्य कमांडर, गनर, लोडर और ड्राइवर होते हैं. टेरेट के अंदर तीन लोग बैठते हैं, जबकि ड्राइवर आगे वाले हिस्से में होता है. टरेट के नीचे “टरेट बास्केट” बना होता है, जो टरेट के घूमने पर अंदर बैठे क्रू को भी साथ घुमाता है. वहीं मुख्य टोप के गोले अलग कंपार्टमेंट में रखे जाते हैं. सुरक्षा के लिहाज से यह डिजाइन ऐसा होता है कि किसी हादसे की कंडीशन में धमाका ऊपर की ओर जाए न कि क्रू की तरफ. वहीं आधुनिक टैंकों में 120 मिमी की स्मूथ बोर गन लगी होती है जो लंबी दूरी तक सटीक हमला कर सकती है. ऑटोमेटिक स्टेबलाइजर सिस्टम चलते हुए भी निशाना साधने में मदद करता है. इसके अलावा मशीन गन और स्मोक ग्रेनेड लॉन्चर भी लगे होते हैं ताकि दुश्मन से बचाव किया जा सके.
दुनिया का सबसे ताकतवर टैंक कौन सा?
दुनिया के सबसे ताकतवर टैंक में अमेरिकी M1A2 Abrams को टॉप पर माना जाता है. यह उन्नत हथियार प्रणाली, मजबूत कवच और डिजिटल नेटवर्किंग से लैस है. इसे मोबाइल फोर्ट्रेस भी कहा जाता है. इसके अलावा जर्मनी का Leopard 2A7A1, दक्षिण कोरिया का K2 Black Panther और चीन का Type 99A भी आधुनिक और शक्तिशाली टैंकों में गिने जाते हैं.
भारत का क्या है नंबर?
ग्लोबल फायरपावर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार टैंकों की संख्या के मामले में भारत पांचवें स्थान पर है. भारत के पास करीब 4201 टैंक है. भारतीय सेना के बेड़े में मुख्य रूप से T90, T72 और Arjun शामिल हैं. भारत अपनी पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए संतुलित टैंक फोर्स बनाए हुए है. वहीं पाकिस्तान करीब 2627 टैंकों के साथ सातवें नंबर पर आता है.
ये भी पढ़ें-ये हैं दुनिया के सबसे हेल्दी पांच देश, जानें किस नंबर पर आते हैं भारत और पाकिस्तान?
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL























