Iran New Supreme Leader: खामेनेई की मौत के बाद कौन संभाल रहा ईरान के सुप्रीम लीडर का पद, किसके पास चली जाती है यह जिम्मेदारी?
Iran New Supreme Leader: इजरायल-अमेरिका हमलों के बीच अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद वहां नया सुप्रीम लीडर चुने जाने की जानकारी सामने आई है. असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के तहत यह प्रक्रिया होती है.

Iran New Supreme Leader: मिडिल ईस्ट में इजरायल और अमेरिका के हमलों के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि की खबर सामने आई है. तेहरान सहित कई इलाकों में हमलों की खबर है. रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि हमले में उनके परिवार के कुछ सदस्य, जिनमें बेटी, दामाद और नाती मारे गए हैं. इन दावों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आई हैं. आइए जानें कि खामेनेई की मौत के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर का पद कौन संभाल रहा है.
ईरान में सुप्रीम लीडर का पद कितना अहम?
ईरान में सुप्रीम लीडर देश का सबसे शक्तिशाली पद होता है. सेना, न्यायपालिका, मीडिया, विदेश नीति और बड़े रणनीतिक फैसलों पर अंतिम अधिकार इसी पद के पास होता है. राष्ट्रपति सरकार चलाते हैं, लेकिन अंतिम नियंत्रण सुप्रीम लीडर के पास रहता है. ऐसी स्थिति में अगर सुप्रीम लीडर की मौत होती है, तो सत्ता का सवाल तुरंत खड़ा हो जाता है. ईरान का संविधान इस स्थिति के लिए स्पष्ट प्रक्रिया तय करता है.
खामेनेई की मौत के बाद कौन संभाल रहा ईरान की सत्ता?
ईरानी संविधान के अनुसार 88 सदस्यों वाली ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ नए सुप्रीम लीडर का चुनाव करती है. यह निकाय धार्मिक विद्वानों से मिलकर बना है. सुप्रीम लीडर के निधन के बाद यही संस्था बैठक कर नए नेता का नाम तय करती है. खबरों के मुताबिक, खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुने जाने की जानकारी सामने आई है. देश में 40 दिन के शोक का ऐलान भी किया गया है.
कौन हैं मोजतबा खामेनेई?
मोजतबा खामेनेई का जन्म 1969 में मशहद में हुआ था. उन्होंने धार्मिक माहौल में पढ़ाई की थी. ईरान-इराक युद्ध के अंतिम दौर में उन्होंने रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़कर काम किया था.
वे लंबे समय से अपने पिता के करीबी माने जाते थे. रिपोर्टों में कहा गया है कि वे पर्दे के पीछे रहकर कई अहम फैसलों में भूमिका निभाते थे. हालांकि उन्होंने कोई बड़ा सरकारी पद नहीं संभाला, लेकिन सेना और अर्धसैनिक बलों से उनके अच्छे संबंध बताए जाते हैं.
2009 के विरोध प्रदर्शन और मोजतबा
साल 2009 में ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे. उस समय मोजतबा खामेनेई का नाम चर्चा में आया था. कुछ आरोप लगे थे कि उन्होंने प्रदर्शनों को सख्ती से दबाने में भूमिका निभाई. हालांकि इस पर आधिकारिक स्तर पर कोई स्पष्ट स्वीकारोक्ति नहीं हुई.
अब उनके सुप्रीम लीडर बनने के बाद देश में राजनीतिक बहस शुरू हो गई है. 1979 की इस्लामी क्रांति के समय वंश के आधार पर सत्ता देने का विरोध किया गया था. इसलिए कुछ लोग उनके चयन को लेकर सवाल उठा रहे हैं.
अन्य संभावित दावेदार कौन थे?
सुप्रीम लीडर के पद के लिए कई नाम चर्चा में थे.
हुज्जत-उल-इस्लाम मोहसिन कौमी को खामेनेई का करीबी सलाहकार माना जाता है.
आयतुल्लाह अलीरेजा अराफी ईरान की मदरसा प्रणाली के प्रमुख और गार्जियन काउंसिल के सदस्य हैं. आयतुल्लाह मोहसिन अराकी असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के पुराने सदस्य हैं.
जी.एच. मोहसेनी एजेई वर्तमान में न्यायपालिका प्रमुख हैं.
हालांकि ताजा रिपोर्टों में मोजतबा खामेनेई के चयन की जानकारी सामने आई है.
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Source: IOCL



























