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PBG Regiment Recruitment: सिर्फ इन 3 कम्युनिटी से ही होती है राष्ट्रपति के बॉडीगार्ड्स की भर्ती, जानें PBG क्यों है इतनी खास?

PBG Regiment Recruitment: प्रेसिडेंट बॉडीगार्ड की भर्ती सिर्फ तीन कम्युनिटी से होती है. आइए जानते हैं कि आखिर क्यों है ऐसी चयन प्रक्रिया और क्यों है यह रेजीमेंट इतनी खास.

PBG Regiment Recruitment: रिपब्लिक डे परेड और सेरेमोनियल इवेंट्स के दौरान भारत के प्रेसिडेंट को एस्कॉर्ट करने वाले लंबे और यूनिफॉर्म पहने घुड़सवार इंडियन आर्मी की सबसे पुरानी और सबसे एलिट रेजीमेंट प्रेसिडेंट बॉडीगार्ड के मेंबर होते हैं. ज्यादातर आर्मी यूनिट्स 'ऑल इंडिया ऑल क्लास' रिक्रूटमेंट मॉडल को फॉलो करती हैं, लेकिन प्रेसिडेंट्स बॉडीगार्ड की भर्ती थोड़ी अलग होती है. 

कैसे होती है प्रेसिडेंट्स बॉडीगार्ड की भर्ती?

प्रेसिडेंट बॉडीगार्ड की भर्ती का स्ट्रक्चर तीन खास कम्युनिटीज तक ही सीमित है. इन कम्युनिटीज में हिंदू जाट, हिंदू राजपूत और जाट सिख शामिल हैं.  प्रेसिडेंट्स बॉडीगार्ड ना सिर्फ सेरेमोनियल ड्यूटीज के लिए बल्कि प्रेसिडेंट की पर्सनल सिक्योरिटी और घुड़सवार एस्कॉर्ट के लिए भी जिम्मेदार होते हैं. अपनी सेरेमोनियल इमेज के बावजूद प्रेसिडेंट बॉडीगार्ड सैनिक काफी ट्रेंड कॉम्बैट ट्रूप्स होते हैं जो मुश्किल मिलिट्री माहौल में डेप्लॉयमेंट के काबिल होते हैं. 

 कब से चली आ रही है यह रेजीमेंट? 

प्रेसिडेंट बॉडीगार्ड की स्थापना 1773 में ब्रिटिश राज के दौरान हुई थी. इससे यह इंडियन आर्मी की सबसे पुरानी बची हुई रेजीमेंट बन गई. कॉलोनियल दौर में भर्ती 'मार्शल रेस' थ्योरी से प्रभावित थी. इसके तहत कुछ समुदायों को उनकी शारीरिक ताकत और लड़ाई की परंपराओं की वजह से लड़ाकू भूमिकाओं के लिए ज्यादा सही माना जाता था. यह सिस्टम आजादी के बाद भी जारी रहा जिसने प्रेसिडेंट बॉडीगार्ड की मॉडर्न बनावट को आकार दिया.

1947 में भारत के बंटवारे के बाद रेजीमेंट का हिस्सा रहे मुस्लिम सैनिक पाकिस्तान चले गए. उनकी जगह ज्यादातर जाटों ने ले ली. इसी वजह से आज का ढांचा हिंदू जाट, हिंदू राजपूत और जाट सिखों का बना है.

एक संतुलित भर्ती सिस्टम 

प्रेसिडेंट बॉडीगार्ड की सबसे खास बात यह है कि इसमें संतुलित भर्ती सिस्टम है. सैनिकों को हिंदू जाट, हिंदू राजपूत और जाट सिखों के बराबर अनुपात में भर्ती किया जाता है. यह अनुपात 33.3% का है. यह ढांचा रेजीमेंट की पारंपरिक बनावट को बनाए रखते हुए प्रतिनिधित्व में एक जैसापन पक्का करता है. आपको बता दें कि यह रोक सिर्फ ट्रूप्स पर लागू होती है. रेजीमेंट में ऑफिसर्स, क्लर्क और टेक्निकल स्टाफ को भारत के किसी भी कम्युनिटी या इलाके से आर्मी की बड़ी रिक्रूटमेंट पॉलिसी के हिसाब से भर्ती किया जा सकता है. 

सख्त फिजिकल स्टैंडर्ड 

इंडियन आर्मी के प्रेसिडेंट के बॉडीगार्ड के लिए सबसे कड़े फिजिकल स्टैंडर्ड हैं. कम से कम हाइट की जरूरत 6 फीट है जो आम आर्मी की जरूरत से काफी ज्यादा है. यह इसलिए जरूरी है क्योंकि प्रेसिडेंट बॉडीगार्ड सैनिक घुड़सवारी वाले सेरेमोनियल ड्यूटी करते हैं. इसमें देखने में डिसिप्लिन और सेरेमोनियल शान बनाए रखने के लिए एक जैसी हाइट, पोस्चर और फिजिकल अपीयरेंस जरूरी है. आर्मी का कहना है कि इन तीनों कम्युनिटीज की ऐतिहासिक रूप से औसत हाइट ज्यादा है और फिजिकल बनावट भी एक जैसी है. 

क्या रही कानूनी चुनौती? 

प्रेसिडेंट के बॉडीगार्ड की रिक्रूटमेंट पॉलिसी को कानूनी जांच और कोर्ट में चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. आलोचकों ने कम्युनिटी बेस्ड रिक्रूटमेंट स्ट्रक्चर पर सवाल उठाए हैं. लेकिन इंडियन आर्मी ने इस सिस्टम का बचाव करते हुए कहा है कि यह फंक्शनल जरूरत, परंपरा और सेरेमोनियल स्टैंडर्ड पर आधारित है. आर्मी ने इस बात पर जोर दिया है कि प्रेसिडेंट के एस्कॉर्ट की गरिमा बनाए रखने के लिए हाइट, बनावट और दिखने में एक जैसा होना जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट ने भी आर्मी की रिक्रूटमेंट पॉलिसी में दखल देने से मना कर दिया है.

यह भी पढ़ें: क्या होता है गोरिल्ला वॉर और कैसे हुई थी इसकी शुरुआत, जिसके माहिर हैं तालिबानी लड़ाके

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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