Science Behind Rain: बारिश के लिए इतना पानी कहां से लाते हैं बादल, क्या है प्रोसेस?
Science Behind Rain: बारिश की शुरुआत सूरज की गर्मी, पानी के भाप बनने और बादलों के बनने की प्रक्रिया से होती है. इसी प्राकृतिक जल चक्र के कारण धरती पर लगातार बारिश होती रहती है.

Science Behind Rain: बारिश ने अपना आगमन देना शुरू कर दिया है. देश के जगह-जगह पर जोरदार बारिश हो रही है. ऐसे में क्या आपने कभी जानने की कोशिश की कि बारिश के मौसम में बादलों के पास इतना पानी आता कहां से है? ऐसे में आपको बता दें कि बारिश की पूरी कहानी सूरज से शुरू होती है. यानी सूरज की गर्मी से समंदर, नदी, तालाब और झील का पानी गर्म होता है. तभी शुरू होती है बादल बनने की प्रक्रिया. गर्म होने पर पानी हल्की भाप बनकर हवा में ऊपर उठने लगता है. सिर्फ पानी ही नहीं, पेड़-पौधे भी अपनी पत्तियों से पानी की भाप छोड़ते हैं. यानी बादलों को पानी सिर्फ समंदर से ही नहीं, बल्कि धरती के हर उस हिस्से से मिलता है जहां पानी मौजूद होता है. एक रिपोर्ट के अनुसार, बादल करीब 86 प्रतिशत पानी केवल समंदर से लेते हैं, क्योंकि धरती का ज्यादातर हिस्सा पानी से ढका है. यह भाप हल्की होती है, इसलिए हवा में ऊपर की तरफ उठती चली जाती है और साथ ही इसको इंसानी आंखों से देखा भी नहीं जा सकता है.
हवा में पानी से बनते हैं बादल
अगर बात करें कि आखिर इस भाप से पानी कैसे बनता है तो बता दें कि जैसे-जैसे यह भाप ऊपर जाती है, वहां की हवा ठंडी होती जाती है. ऊंचाई पर पहुंचकर भाप ठंडी हवा के संपर्क में आती है और छोटी-छोटी पानी की बूंदों या बर्फ के कणों में बदल जाती है. ये बूंदें इतनी छोटी और हल्की होती हैं कि हवा में तैरती रहती हैं. साथ ही ये बूंदें केवल भाप से ही नहीं बनती हैं, बल्कि ये हवा में मौजूद धूल, नमक और प्रदूषण के छोटे कणों के चारों तरफ चिपककर बनती हैं. वहीं, जब लाखों-करोड़ों ऐसी छोटी बूंदें एक साथ जमा हो जाती हैं, तो वे मिलकर बादल का रूप ले लेती हैं. शुरुआत में ये बूंदें इतनी हल्की होती हैं कि हवा का दबाव इन्हें नीचे गिरने नहीं देता और बादल आसमान में तैरते रहते हैं.
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बूंदें भारी होकर बरसती हैं बारिश बनकर
इस जानकारी के बाद अगर बरसात की बात करें तो बादल के अंदर ये छोटे-छोटे बूंद आपस में टकराते रहते हैं और मिलकर बड़ी-बड़ी पानी की बूंद बन जाते हैं. फिर जितनी बड़ी बूंद बनती जाती है, उतने ज्यादा वे बड़े और भारी बनते जाते हैं कि हवा उन्हें ऊपर टिकाकर नहीं रोक पाती है और वे नीचे गिर जाते हैं. यही गिरती हुई बूंद को हम लोग बारिश कहते हैं. जमीन पर गिरने के बाद यह पानी फिर से नदी, तालाब और समंदर में पहुंच जाता है और सूरज की गर्मी से दोबारा भाप बनकर ऊपर उठता है. इस पूरे चक्र को "जल चक्र" कहा जाता है, जो लाखों सालों से लगातार चलता आ रहा है और धरती पर पानी को हमेशा घुमाता रहता है.
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