तेज प्रताप यादव पर कौन-कौन सी धाराएं, कितनी हो सकती है सजा?
NEET के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर पथराव और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में तेज प्रताप यादव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है. चलिए जानें कि उन पर कौन सी धाराएं लगीं.

- नीट बंद हिंसा में तेज प्रताप यादव उकसाने पर गिरफ्तार।
- हत्या प्रयास, दंगा उकसाने सहित कई गंभीर धाराएँ लगीं।
- नीट अनियमितता विरोध में भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया।
बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो चुकी है, दरअसल नीट परीक्षा लीक मामले को लेकर किए गए बिहार बंद के दौरान भड़की जबरदस्त हिंसा के सिलसिले में लालू यादव के बेटे और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव को पुलिस ने अपनी गिरफ्त में ले लिया है. राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान इलाके में छात्रों के उग्र प्रदर्शन को उकसाने और सुरक्षा बलों पर पथराव की साजिश रचने के संगीन आरोपों के तहत यह पूरी कानूनी कार्रवाई अंजाम दी गई है. चलिए जानें कि तेज प्रताप पर कितनी धाराएं लगी और इस मामले में उनको कितनी सजा हो सकती है.
धारा 109 हत्या का प्रयास
तेज प्रताप यादव पर लगाई गई सबसे सख्त कानूनी धारा बीएनएस की 109 है, जो कि सीधे तौर पर हत्या के प्रयास से संबंधित मानी जाती है. यह कानूनी प्रावधान तब लागू किया जाता है, जब कोई शख्स इरादतन ऐसा काम करे, जिससे किसी की जान को सीधा खतरा पैदा हो. अगर अदालत में यह आरोप सिद्ध हो जाता है तो तेज प्रताप यादव को कम से कम 10 साल तक की सख्त कैद और भारी जुर्माना भुगतना पड़ सकता है. वहीं अगर किसी पीड़ित को गंभीर चोट पहुंचाना भी साबित हो गया, तब तो सजा उम्रकैद में तब्दील हो सकती है.
धारा 132 और 297
प्रदर्शन के दौरान ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों पर हमला करने के आरोप में बीएनएस की धारा 132 के तहत केस दर्ज किया गया है. इसके साथ ही, ऑन-ड्यूटी पुलिस ऑफिसर को सीधे तौर पर शारीरिक नुकसान पहुंचाने और घायल करने के एवज में धारा 297 लगाई गई है. पुलिस का कहना है कि भीड़ ने सोची-समझी रणनीति के तहत कानून लागू करने वाली एजेंसी पर धावा बोला है, ताकि सरकारी कामकाज को पूरी तरह से ठप किया जा सके. इन धाराओं के जुड़ने से तेज प्रताप की न्यायिक हिरासत की अवधि लंबी होना तय माना जा रहा है.
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धारा 197(2), 190, 251 और 191(3)
प्रशासनिक पाबंदियों के बाद भी भीड़ इकट्ठा करने पर धारा 197(2) और गैरकानूनी जमावड़े के साझा उद्देश्य के लिए धारा 190 लगाई गई है. इसके अलावा घातर हथियारों के साथ उग्र दंगा फैलाने के संगीन आरोप में धारा 251 और धारा 191(3) को शामिल किया गया है. पुलिस रिपोर्ट में कहा गया है ति प्रदर्शनकारी पूरी तैयारी के साथ लाठी-डंडे और पत्थर लेकर पहुंचे थे, जिससे आम नागरिकों की सुरक्षा को भी बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया था. इस उपद्रव से शहर का पूरा यातायात कई घंटों तक बाधित रहा.
धारा 61(2) और 49
हिंसी की पूरी पटकथा तैयार करने के मामले में तेज प्रताप पर आपराधिक षडयंत्र रचने की धारा 61(2) लगाई गई है. साथ ही किसी गंभीर अपराध को अंजाम देने के लिए लोगों को दुष्प्रेरित या फिर उकसाने के जुर्म में बीएनएस की धारा 49 जोड़ी गई है. जांच अधिकारियों का तर्क है कि नेता ने मंच से दिए बयानों के जरिए युवाओं के गुस्से को भड़काया और उन्हें पुलिस पर सीधा पथराव करने के लिए प्रेरित किया.
धारा 293, 299, और 196
प्रदर्शन के दौरान अमर्यादित व्यवहार और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप में बीएनएस की धारा 293 और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए धारा 299 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है. इसके अलावा, समाज के अलग-अलग वर्गों या फिर समूहों के बीच आपसी विद्वेष और दुश्मनी बढ़ाने के आरोप में धारा 196 भी जोड़ी गई है.
धारा 223 और विशेष अधिनियम की धारा 3 और 4
क्षेत्र में लागू आचार संहिता और प्रशासनिक निषेधाज्ञा का सीधा उल्लंघन करने पर धारा 223 लगाई गई है, जिसमें छह महीने से एक साल तक की जेल का प्रावधान है. इसके अलावा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए रोकने वाले विशेष अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत भी सख्त मामला दर्ज हुआ है. आंदोलनकारियों ने सड़क पर सरकारी वाहनों और सार्वजनिक ढांचों को काफी नुकसान पहुंचाया था, जिसकी भरपाई के लिए यह कार्रवाई की जा रही है.

नीट विवाद के लाठीचार्ज के लिए हुआ था बिहार बंद
नीट परीक्षा में अनियमितताओं के विरोध में छात्र संगठन और विपक्षी दलों ने मिलकर सूबे में पूर्ण बंदी का एलान किया था. इस राष्ट्रव्यापी आक्रोश के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और परीक्षार्थियों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में राजधानी की सड़कों पर हजारों की संख्या में उग्र प्रदर्शनकारी उतर आए थे. गांधी मैदान के पास एकत्र हुई बेकाबू भीड़ ने नारेबाजी करते हुए मुख्य रास्तों को पूरी तरह जाम कर दिया. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इलाके में उपचुनाव की वजह से चुनावी नियम लागू थे, जिसके कारण किसी भी तरह के सभा या जुलूस की आधिकारिक अनुमति नहीं दी गई थी.
जब सुरक्षा बलों ने इनको रोकने की कोशिश की तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पद्रवियों ने कानून-व्यवस्था को धता बताते हुए पुलिस बल पर अचानक ईंट-पत्थरों से भीषण हमला बोल दिया, जिससे कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए.
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