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क्या बिना पंख के भी कोई उड़ सकता है, जानें इसे लेकर क्या कहता है साइंस

आपने कई पक्षियों को आसमान में उड़ता देखा होगा. पक्षी अपने पंख फड़फडाते हुए दुनिया के एक कोने से दूसरे कोने तक जा सकते हैं, लेकिन इंसान का शरीर उड़ने के लिए डिजाइन नहीं किया गया है.

21वीं शताब्दी में इंसान ने इतनी तरक्की कर ली है कि उसके लिए कुछ भी मुश्किल नहीं है. इंसानों ने हवाई जहाज बनाकर हजारों किलोमीटर की दूरी कुछ घंटों में तय कर ली. रॉकेट बनाकर अंतरिक्ष तक घूम आया, लेकिन पक्षियों की तरफ कभी आसमान में उड़ान नहीं भर पाया. बचपन में हर कोई यह जरूर सोचता था कि काश उसके भी पंख होते और वह भी पक्षियों की तरफ आसमान में उड़ सकता, लेकिन क्या आसमान में उड़ने के लिए सिर्फ पंखों की ही आवश्यकता होती है? 

विज्ञान इतना आगे बढ़ चुका है कि इंसान पक्षियों की तरह बैटरी वाले पंख भी बना सकता है, लेकिन उड़ने के लिए सिर्फ पंखों की जरूरत भर नहीं होती है. विज्ञान के अनुसार आसमान में उड़ान भरने के लिए पंखों के अलावा और भी कई चीजें जरूरी होती हैं, जो इंसानों के पास नहीं होती. 

विज्ञान में छिपा है सवाल का जवाब

आपने कई पक्षियों को आसमान में उड़ता देखा होगा. पक्षी अपने पंख फड़फडाते हुए दुनिया के एक कोने से दूसरे कोने तक जा सकते हैं, लेकिन इंसान के लिए यह मुश्किल है. विज्ञान के अनुसार, इंसानों का शरीर उड़ने के लिए डिजाइन नहीं किया गया. उड़ान भरने के लिए सबसे जरूरी होता है ग्रैविटी को मात देना, जो इंसान नहीं कर सकता. दरअसल, इंसानों की तुलना में पक्षियों का शरीर हल्का होता है और हड्डियां खोखली होती हैं, जिससे वह आसमान में उड़ा पाते हैं. वहीं, इंसान का वजन इतना अधिक होता है कि वह ग्रैविटी के कारण अपने शरीर को आसमान में उड़ा नहीं सकता. 

उड़ने के लिए चाहिए शक्तिशाली लंग्स

उड़ान भरने के लिए शक्तिशाली लंग्स चाहिए होते हैं. पक्षियों के पास ये मौजूद होते हैं. उड़ान भरते समय पक्षी अपने फेफड़ों में इतनी ऑक्सीजन भर लेते हैं, जिससे उनकी मासपेशियों को लगातार चलने में मदद मिलती रहती है. इसके अलावा उनमें पंख भी इस तरह डिजाइन होते हैं कि वह उसमें हवा को भर सकते हैं. इसलिए जब वे उड़ते हैं, तो पंखों के माध्यम से हवा को नीचे धकेलते हैं, जिससे वह उड़ पाते हैं. 

यह भी पढ़ें: अंतरिक्ष में हवा में क्यों उगाए जाते हैं पौधे, बिना मिट्टी कैसे होती है इनकी ग्रोथ?

प्रांजुल श्रीवास्तव एबीपी न्यूज में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. फिलहाल फीचर डेस्क पर काम कर रहे प्रांजुल को पत्रकारिता में 9 साल तजुर्बा है. खबरों के साइड एंगल से लेकर पॉलिटिकल खबरें और एक्सप्लेनर पर उनकी पकड़ बेहतरीन है. लखनऊ के बाबा साहब भीम राव आंबेडकर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता का 'क, ख, ग़' सीखने के बाद उन्होंने कई शहरों में रहकर रिपोर्टिंग की बारीकियों को समझा और अब मीडिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं. प्रांजुल का मानना है कि पाठक को बासी खबरों और बासी न्यूज एंगल से एलर्जी होती है, इसलिए जब तक उसे ताजातरीन खबरें और रोचक एंगल की खुराक न मिले, वह संतुष्ट नहीं होता. इसलिए हर खबर में नवाचार बेहद जरूरी है.

प्रांजुल श्रीवास्तव काम में परफेक्शन पर भरोसा रखते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता सिर्फ सूचनाओं को पहुंचाने का काम नहीं है, यह भी जरूरी है कि पाठक तक सही और सटीक खबर पहुंचे. इसलिए वह अपने हर टास्क को जिम्मेदारी के साथ शुरू और खत्म करते हैं. 

अलग अलग संस्थानों में काम कर चुके प्रांजुल को खाली समय में किताबें पढ़ने, कविताएं लिखने, घूमने और कुकिंग का भी शौक है. जब वह दफ्तर में नहीं होते तो वह किसी खूबसूरत लोकेशन पर किताबों और चाय के प्याले के साथ आपसे टकरा सकते हैं.

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