ईरान में कितनी सस्ती है डॉक्टरी की पढ़ाई, भारत के मुकाबले कितना आता है खर्च?
Medical Education In Iran: ईरान में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों की मौतें हो चुकी हैं. वहां कई सारे भारतीय भी मेडिकल की पढ़ाई करने जाते हैं. आइए जानें इसमें कितना खर्चा आता है.

ईरान में दिन-ब-दिन हालात बिगड़ रहे हैं, ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम को साफ निर्देश दिए हैं कि अगर अमेरिका कभी ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करता है, तो वह बेहद तेज और निर्णायक होनी चाहिए. ट्रंप नहीं चाहते कि यह किसी लंबे युद्ध में बदले. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप का मानना है कि अधूरी या लंबी सैन्य कार्रवाई से अमेरिका को नुकसान हो सकता है. इसी राजनीतिक तनाव के बीच ईरान एक अलग वजह से भी भारत में चर्चा का विषय बना हुआ है, और वह है मेडिकल एजुकेशन. आइए जानें कि ईरान में डॉक्टरी की पढ़ाई कितनी सस्ती है.
ईरान भारतीय छात्रों के लिए क्यों खास?
ईरान पिछले कुछ सालों में भारतीय मेडिकल छात्रों के लिए एक बड़ा विकल्प बनकर उभरा है. इसकी सबसे बड़ी वजह है यहां की कम फीस और रहने का कम खर्च. भारत में जहां प्राइवेट मेडिकल कॉलेज आम परिवार की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं, वहीं ईरान में डॉक्टर बनना तुलनात्मक रूप से काफी सस्ता है.
ईरान में MBBS की फीस कितनी है?
फैक्ट्स की बात करें तो ईरान में MBBS की सालाना फीस लगभग 2 से 5 लाख रुपये के बीच होती है. पूरे कोर्स की कुल लागत करीब 18 से 25 लाख रुपये में पूरी हो जाती है, जिसमें हॉस्टल और बेसिक सुविधाएं भी शामिल होती हैं. यह रकम भारत के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की तुलना में कई गुना कम है, जहां सिर्फ ट्यूशन फीस ही 50 लाख से 1 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है.
भारत के मुकाबले कितना सस्ता?
भारत में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीटें सीमित हैं और प्रतिस्पर्धा बेहद ज्यादा है. हर साल करीब 20 लाख छात्र NEET परीक्षा देते हैं, जबकि MBBS की सीटें लगभग एक लाख के आसपास ही हैं. जो छात्र सरकारी कॉलेज में नहीं पहुंच पाते, उनके सामने प्राइवेट कॉलेज ही विकल्प बचता है, जहां फीस बेहद ज्यादा होती है. इसी वजह से ईरान जैसे देश भारतीय छात्रों को आकर्षित करते हैं.
मान्यता और पढ़ाई का माध्यम
ईरान की मेडिकल यूनिवर्सिटीज की डिग्री WHO और भारत के NMC से मान्यता प्राप्त होती है. यहां MBBS की पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम में कराई जाती है, जिससे भारतीय छात्रों को भाषा की बड़ी दिक्कत नहीं होती है. कोर्स का स्ट्रक्चर इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के अनुसार होता है और क्लिनिकल ट्रेनिंग भी समय पर शुरू हो जाती है.
एडमिशन की शर्तें क्या हैं?
ईरान में MBBS के लिए NEET पास होना अनिवार्य है. इसके अलावा 12वीं कक्षा में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के साथ 50 से 70 प्रतिशत अंक होने चाहिए. एडमिशन प्रोसेस अपेक्षाकृत आसान है और किसी अतिरिक्त कठिन एंट्रेंस टेस्ट का झंझट नहीं होता, यही वजह है कि कई छात्र इसे पसंद करते हैं.
ईरान की पॉपुलर मेडिकल यूनिवर्सिटीज
तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज, शाहिद बेहेश्टी यूनिवर्सिटी, ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज, इस्लामिक आजाद यूनिवर्सिटी, हमादान यूनिवर्सिटी, गोलेस्तान यूनिवर्सिटी और केरमान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज जैसी संस्थाएं भारतीय छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय हैं.
रहने का खर्च और जीवन
ईरान में रहने और खाने का खर्च भी भारत के बड़े शहरों की तुलना में कम है. औसतन 10 से 12 हजार रुपये महीने में छात्र आराम से रह सकते हैं. सुरक्षा, हॉस्टल और लोकल ट्रांसपोर्ट की सुविधाएं भी ठीक-ठाक मानी जाती हैं.
क्यों बढ़ रहा है ईरान का क्रेज?
कम फीस, आसान एडमिशन प्रोसेस, इंटरनेशनल एक्सपोजर और मान्यता प्राप्त डिग्री, ये सभी कारण ईरान को भारतीय मेडिकल छात्रों के लिए एक मजबूत विकल्प बनाते हैं. राजनीतिक तनाव के बावजूद एजुकेशन सेक्टर पर इसका खास असर नहीं पड़ा है.
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Source: IOCL
























