गुरुग्राम के बाद अब लखनऊ, जानें हर साल कितने हिट एंड रन मामले होते हैं दर्ज
आए दिन हम हिट एंड रन के मामलों के बारे में सुनते हैं ऐसा ही एक और मामला गुरुग्राम के बाद लखनऊ से सामने आया है जाने हर मिनट कितने केस होते पूरे देश में क्या कहते हैं दर्ज मामलें

सड़क हादसे के बाद वाहन चालक का मौके से भाग जाना हिट एंड रन कहलाता है. ऐसे हादसों में घायल व्यक्ति को समय पर मदद नहीं मिल पाती और कई बार उसकी जान भी चली जाती है. देश में हर साल ऐसे हजारों मामले दर्ज होते हैं. गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 2024 में देशभर में 68,584 हिट एंड रन मामले दर्ज किए गए. नए आपराधिक कानून में ऐसे मामलों के लिए अलग प्रावधान रखा गया है. ऐसे में जानिए हिट एंड रन से जुड़ा कानून क्या कहता है.
देश में हर साल हजारों हिट एंड रन मामले
हिट एंड रन के मामले सिर्फ किसी एक शहर या राज्य तक सीमित नहीं हैं. देश के अलग-अलग हिस्सों में सड़क हादसों के बाद वाहन चालक के मौके से भागने के मामले सामने आते हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2024 में भारत में कुल 68,584 हिट एंड रन मामले दर्ज किए गए थे. यह आंकड़ा उन मामलों का है जो पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज हुए. सड़क हादसे के बाद चालक के मौके पर नहीं रुकने से घायल व्यक्ति को तुरंत इलाज मिलने में देरी होती है. कई बार पुलिस को बाद में सीसीटीवी कैमरों, वाहन के नंबर और दूसरे सबूतों की मदद से चालक की पहचान करनी पड़ती है. हिट एंड रन के मामलों में समय पर मदद मिलना बहुत जरूरी होता है.
यह भी पढ़ें : UPI या Cash, किससे ज्यादा होती है पैसों की बचत?
पिछले साल कितने मामले दर्ज हुए
सबसे हाल में उपलब्ध पूरे राष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार 2024 में देशभर में 68,584 हिट एंड रन मामले दर्ज किए गए. यानी औसतन हर दिन करीब 188 मामले पुलिस रिकॉर्ड में आए. यह संख्या केवल दर्ज मामलों को दिखाती है और इसे देश में हुए हर ऐसे हादसे की पूरी संख्या नहीं मानी जा सकती है . हिट एंड रन से जुड़े आंकड़े सड़क सुरक्षा की स्थिति समझने में भी मदद करते हैं.गृह मंत्रालय के मुताबिक, देश में होने वाले अपराधों का डेटा पहले अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों से लिया जाता है. इसके बाद इस जानकारी को एक जगह इकट्ठा करके पूरे देश के स्तर पर अपराध के आंकड़े तैयार किए जाते हैं.
हिट एंड रन पर क्या कहता है कानून
भारत में 1 जुलाई 2024 से नए आपराधिक कानून लागू हुए. भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 106(2) में ऐसे मामले का प्रावधान रखा गया है, जिसमें किसी व्यक्ति की मौत किसी वाहन के लापरवाही से चलाने के कारण होती है और वाहन चालक घटना की जानकारी पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट को दिए बिना भाग जाता है. इस प्रावधान में 10 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है. हालांकि, धारा 106(2) को 1 जुलाई 2024 से लागू किए गए BNS के बाकी प्रावधानों के साथ लागू नहीं किया गया था और इसके लागू होने को लेकर अलग सरकारी अधिसूचना की स्थिति रही है. इसलिए किसी खास मामले में लागू कानून और धाराएं घटना की तारीख और परिस्थितियों के आधार पर तय होती हैं.
यह भी पढ़ें : अंतरिक्ष में कैसे तैनात होते हैं हथियार, क्या रिमोट से चलेंगे ये वेपन?
























