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Hiroshima Day 2026 : अमेरिका ने हिरोशिमा पर ही क्यों गिराया था परमाणु बम, जानें इतिहास?

Hiroshima Day 2026 : हर साल 6 अगस्त को हिरोशिमा डे मनाया जाता है. इस दिन 1945 में जापान के हिरोशिमा शहर पर अमेरिका ने परमाणु बम गिराया था. इस घटना में हजारों लोगों की तत्काल मौत हो गई.

Hiroshima Day 2026 : द्वितीय विश्व युद्ध के इतिहास में 6 अगस्त 1945 की तारीख हमेशा एक ऐसी घटना के रूप में याद की जाती है, जिसने पूरी दुनिया को झकझोर दिया. यही वह दिन था, जब पहली बार किसी युद्ध में परमाणु बम का इस्तेमाल किया गया. इस घटना के 81 साल पूरे होने पर 6 अगस्त 2026 को दुनिया भर में हिरोशिमा डे (Hiroshima Day) मनाया गया. यह दिन सिर्फ उन लोगों को श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं है जिन्होंने इस हमले में अपनी जान गंवाई, बल्कि यह परमाणु हथियारों की भयानक तबाही और शांति की जरूरत का भी संदेश देता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर अमेरिका ने हिरोशिमा पर ही परमाणु बम क्यों गिराया था. 

हिरोशिमा डे क्यों मनाया जाता है?

हर साल 6 अगस्त को हिरोशिमा डे मनाया जाता है. इस दिन 1945 में जापान के हिरोशिमा शहर पर अमेरिका ने परमाणु बम गिराया था. इस घटना में हजारों लोगों की तत्काल मौत हो गई, जबकि आने वाले महीनों और सालों में रेडिएशन के कारण बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जान गंवाई. यह दिन दुनिया को युद्ध के विनाशकारी परिणामों और परमाणु हथियारों से होने वाले खतरे की याद दिलाता है.

हिरोशिमा डे 2026 पर क्या हुआ?

हिरोशिमा हमले की 81वीं बरसी पर जापान के हिरोशिमा शहर में श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया, जिसमें अमेरिका और ईरान सहित करीब 120 देशों के प्रतिनिधियों और लगभग 50 हजार लोगों ने हिस्सा लिया. सुबह 8:15 बजे एक मिनट का मौन रखा गया और शांति की घंटी बजाई गई. हिरोशिमा के मेयर काजुमी मात्सुई ने दुनिया के देशों से परमाणु हथियारों को सुरक्षा का साधन मानना बंद करने की अपील की. वहीं जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने कहा कि दुनिया को ऐसा भविष्य बनाने की दिशा में काम करना चाहिए, जहां परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की नौबत कभी न आए.

अमेरिका ने हिरोशिमा पर ही क्यों गिराया था परमाणु बम?

द्वितीय विश्व युद्ध के आखिरी दौर में अमेरिका चाहता था कि जापान बिना किसी शर्त के आत्मसमर्पण कर दे. हालांकि, जापान अपनी कुछ शर्तों के साथ समझौता चाहता था. वह अपने सम्राट को बनाए रखना चाहता था और युद्ध से जुड़े मामलों में अपनी भूमिका भी चाहता था. अमेरिका ने इसे स्वीकार नहीं किया और बिना शर्त सरेंडर की मांग पर कायम रहा. इससे पहले अमेरिका जापान के कई शहरों पर बड़े पैमाने पर बमबारी कर चुका था. मार्च 1945 में टोक्यो पर हुए भीषण हमले में भी भारी तबाही हुई, लेकिन इसके बाद भी जापान ने आत्मसमर्पण नहीं किया. ऐसे में अमेरिका को लगा कि अगह युद्ध जारी रहा तो उसे जापान पर जमीनी हमला करना पड़ेगा, जिसमें दोनों पक्षों के भारी नुकसान हो सकता था. इसी कारण अमेरिका ने परमाणु बम का इस्तेमाल कर युद्ध को जल्द खत्म करने का फैसला किया.

6 अगस्त 1945 की सुबह क्या हुआ था?

6 अगस्त 1945 की सुबह जापान के हिरोशिमा शहर में सामान्य दिनों की तरह लोग अपने काम में लगे हुए थे. सुबह ठीक 8 बजकर 15 मिनट पर अमेरिका के बी-29 बॉम्बर विमान एनोला गे (Enola Gay) ने लिटिल बॉय (Little Boy) नाम का यूरेनियम आधारित परमाणु बम हिरोशिमा पर गिराया. यह बम जमीन से करीब 1800 फीट ऊपर हवा में फटा. विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि कुछ ही सेकंड में पूरा इलाका आग और धुएं की चपेट में आ गया. तेज रोशनी, भीषण गर्मी और विस्फोट की लहर ने पूरे शहर को तबाह कर दिया.

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हमले के बाद कितना हुआ नुकसान?

परमाणु बम गिरने के तुरंत बाद करीब 70 हजार से 80 हजार लोगों की मौत हो गई. इसके बाद रेडियोएक्टिव रेडिएशन के कारण आने वाले हफ्तों और महीनों में मरने वालों की संख्या बढ़कर लगभग 1.4 लाख तक पहुंच गई. कई लोग गंभीर रूप से झुलस गए, जबकि कई लोग रेडिएशन से होने वाली बीमारियों और कैंसर का शिकार हुए. धमाके के बाद शहर में बने मशरूम आकार के धुएं के विशाल गुबार को दुनिया ने पहली बार देखा. इस हमले ने हिरोशिमा को पूरी तरह तबाह कर दिया.

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मानसी उपाध्याय करीब दो साल से डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में काम कर रही हैं. फिलहाल वह एबीपी नेटवर्क के टेक सेक्शन में काम कर रही हैं, जहां टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने के साथ-साथ उनके लिए रिसर्च और कंटेंट तैयार करने की जिम्मेदारी संभालती हैं.

पत्रकारिता में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अक्टूबर 2024 में एबीपी नेटवर्क से इंटर्न के रूप में की. इसके बाद से वह डिजिटल कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं. फीचर, टेक और इंफॉर्मेटिव स्टोरीज लिखने के साथ-साथ उनकी रुचि स्क्रिप्ट राइटिंग, सोशल मीडिया और रिसर्च आधारित कंटेंट तैयार करने में है.

मूल रूप से उत्तराखंड से जुड़ी मानसी ने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से पूरी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए (ऑनर्स) हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की. वर्तमान में वह राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म कर रही हैं.मानसी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखती हैं.

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