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सांप के काटने पर घोड़े कैसे बचाते हैं इंसान की जान, यहां जानें?

Snake Antivenom: घोड़े का इस्तेमाल एंटी वेनम बनाने में किया जाता है. आइए जानते हैं आखिर क्या है इसके पीछे का विज्ञान.

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  • घोड़ों के प्लाज्मा से शुद्ध एंटीबॉडी एंटीवेनम बनाती है।

Snake Antivenom: सांप के काटने से कुछ समय में जान जाने का खतरा पैदा हो सकता है. लेकिन पीड़ितों को बचाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सबसे जरूरी इलाज के पीछे एक ऐसा जानवर है जिसे ज्यादातर लोग आधुनिक चिकित्सा से नहीं जोड़ते. यह जानवर है घोड़ा. घोड़े एंटी स्नेक वेनम या फिर एंटी वेनम बनाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं. यह एंटीवेनम मरीजों को जहरीले सांपों के जहर से निकले टॉक्सिन को बेअसर करने के लिए दिया जाता है.

क्या है प्रक्रिया?

एंटीवेनम बनाने की प्रक्रिया मेडिकल रूप से जरूरी सांपों के जहर इकट्ठा करने से शुरू होती है. इसे मिल्किंग कहा जाता है. भारत में बिग फोर यानी रसेल्स वाइपर, सॉ स्केल्ड वाइपर, स्पेक्टेकल्ड कोबरा और कॉमन क्रेट पर खास ध्यान दिया जाता है. भारत में सांप के काटने से होने वाली गंभीर और जानलेवा घटनाओं में इन सांपों का बड़ा हिस्सा होता है. इकट्ठा किए गए जहर को सावधानी से प्रोसेस किया जाता है और कंट्रोल वाली स्थिति में सुरक्षित रखा जाता है. ऐसा इसलिए ताकि इसके जरूरी जहरीले तत्व एंटीवेनम बनाने में बाद में इस्तेमाल के लिए स्थिर बने रहें. वैज्ञानिक जहर की बनावट का भी विश्लेषण करते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि सांप की अलग-अलग प्रजातियों और यहां तक की एक ही प्रजाति की अलग-अलग आबादी के जहर में अंतर हो सकता है.


सांप के काटने पर घोड़े कैसे बचाते हैं इंसान की जान, यहां जानें?

एंटीवेनम बनाने के लिए घोड़े का इस्तेमाल क्यों किया जाता है? 

घोड़े इस वजह से खास तौर पर इस्तेमाल किए जाते हैं क्योंकि वह बड़े जानवर होते हैं और बड़ी मात्रा में एंटीबॉडी बना सकते हैं. एंटी वेनम प्रोग्राम में शामिल होने से पहले घोड़े की वेटरनरी स्क्रीनिंग और क्वॉरेंटाइन किया जाता है. सिर्फ उन्हीं स्वस्थ जानवरों को चुना जाता है जो कड़े वेटरनरी मानकों को पूरा करते हैं. इम्यूनाइजेशन शुरू होने से पहले उनकी संक्रामक बीमारियों और स्वास्थ्य संबंधी दूसरे समस्याओं की जांच की जाती है. पूरी प्रक्रिया के दौरान उनके स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जाती है. 

घोड़े को जहर कैसे दिया जाता है? 

जहर काफी कम मात्रा में दिया जाता है. इसे आमतौर पर एक एडजुवेंट के साथ तैयार किया जाता है. यह इम्यून रिस्पांस को बढ़ाने में मदद करता है और यह कंट्रोल करता है कि एंटीजन को इम्यून सिस्टम के सामने कैसे पेश किया जाए. 

शुरुआती डोज काफी कम रखी जाती है. बाद के सेशन में सावधानी से तैयार किए गए वेटरनरी प्रोटोकॉल के मुताबिक बूस्टर डोज दी जाती है. घोड़े का इम्यून सिस्टम जहर के प्रोटीन को बाहरी चीजों के तौर पर पहचानता है और उनके खिलाफ एंटीबॉडी बनाना शुरू कर देता है. बार-बार इस प्रक्रिया को करने से घोड़े के खून में इन एंटीबॉडी की मात्रा इतनी बढ़ सकती है कि उससे एंटी वेनम बनाया जा सके. 

घोड़े का खून कैसे इकट्ठा किया जाता है? 

जब एंटीबॉडी का लेवल जरूरी स्तर तक पहुंच जाता है तो वेटरनरी डॉक्टर की देखरेख में घोड़े से प्लाज्मा इकट्ठा किया जाता है. मॉडर्न प्रोडक्शन तकनीक में प्लाज्माफेरेसिस का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसमें खून को उसके अलग-अलग हिस्सों में बांटा जाता है. प्लाज्मा में एंटी वेनम बनाने के लिए जरूरी एंटीबॉडी होती है जबकि ब्लड सेल्स को जानवर के शरीर में वापस भेजा जा सकता है. इस तरीके से रेड और वाइट ब्लड सेल्स का नुकसान कम होता है और कलेक्शन सेशन के बीच घोड़े को ठीक होने में मदद मिलती है. 

घोड़े के प्लाज्मा को सीधे इंसानों में क्यों नहीं डाला जा सकता? 

हालांकि घोड़े के प्लाज्मा में जरूरी एंटीबॉडी होती है लेकिन इसे सीधे सांप के काटे हुए व्यक्ति में नहीं डाला जा सकता. इंसानी शरीर बाहरी प्रोटीन पर जोरदार प्रतिक्रिया दे सकता है जिससे गंभीर इम्यून रिएक्शन हो सकता है. इस वजह से इकट्ठा किए गए प्लाज्मा को खास सुविधाओं वाली जगह पर बड़े पैमाने पर प्रोसेस किया जाता है. एंटीबॉडी को शुद्ध किया जाता है ताकि जहर के टॉक्सिन से जुड़ने और उन्हें बेहतर करने वाला हिस्सा बना रहे और घोड़े के गैर जरूरी प्रोटीन हटा दिए जाएं.

यह भी पढ़ेंः क्या मस्जिद से जबरन लाउडस्पीकर उतरवा सकती है सरकार? क्या है नियम

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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