हिट एंड रन में कितनी सजा, इसमें कौन सी धारा लगती है?
Gurugram Female Biker Hit and Run: हाल ही में गुरुग्राम में एक महिला बाइकर के साथ हिट एंड रन का मामला हुआ है. आइए जानते हैं कि इस केस में क्या सजा मिल सकती है. जानें क्या कहता है कानून.

- गुरुग्राम में महिला बाइकर को टक्कर मारकर कार सवार भागे।
- भारतीय न्याय संहिता में हिट एंड रन के नए प्रावधान।
- बीएनएस की धारा 106(2) में 10 साल कैद।
- ड्राइवरों के विरोध से कानून का क्रियान्वयन रुका।
Gurugram Female Biker Hit and Run: गुरुग्राम में एक महिला बाइकर के साथ हिट एंड रन का मामला सामने आया है. रविवार को गोल्फ कोर्स रोड पर एक कार ने महिला बाइकर की स्पोर्ट्स बाइक को टक्कर मार दी जिससे वह गिर गई और उसकी मोटरसाइकिल सड़क पर कई मीटर तक घिसटती चली गई. टक्कर के बाद गाड़ी में सवार लोग कथित तौर पर मौके से भाग गए. इस घटना ने एक बार फिर से हिट एंड रन मामले में सजा और भारत के आपराधिक कानून के तहत लागू कानूनी प्रावधानों पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
हिट एंड रन मामले पर कौन सी धारा लागू होती है?
भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत धारा 106 लापरवाही या फिर असावधानी पूर्ण हरकत से मौत होने के मामलों से जुड़ी हुई है. इसके प्रावधानों में ऐसे मामलों के लिए भी खास प्रावधान शामिल हैं, जिनमें कोई ड्राइवर लापरवाही से गाड़ी चलाकर जानलेवा दुर्घटना करता है और फिर घटना की सूचना दिए बिना भाग जाता है.
पहले ऐसे मामलों को आमतौर पर भारतीय दंड संहिता की धारा 304A के तहत देखा जाता था. इसमें लापरवाही से मौत होने पर सजा का प्रावधान था. भारतीय न्याय संहिता ने कुछ हिट एंड रन स्थितियों के लिए ज्यादा सख्त प्रावधान लागू किए हैं.
हालांकि इस बात का ध्यान रखना जरूरी है की धारा 106 (2) खास तौर पर किसी व्यक्ति की मौत से जुड़े मामलों से संबंधित है. बिना मौत वाली टक्कर या फिर चोट के मामले में अपने आप 10 साल की सजा वाला हिट एंड रन प्रावधान लागू नहीं होता.

धारा 106 (1) के तहत क्या सजा है?
धारा 106 (1) तब लागू होती है जब कोई व्यक्ति लापरवाही या फिर असावधानी से किसी दूसरे व्यक्ति की मौत की वजह बनता है. यह गैर-इरादतन हत्या की श्रेणी में नहीं आता है.
इस प्रावधान के तहत 5 साल तक की जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है. वाहन चालक के मामले में दुर्घटना की स्थिति और टक्कर के बाद का व्यवहार लागू होने वाले कानूनी प्रावधानों को तय करने में काफी जरूरी हो सकते हैं. दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति की मदद करना और तुरंत पुलिस या फिर संबंधित अधिकारी को सूचित करना भी जरूरी हो सकता है.
धारा 106 (2) क्या कहती है?
ज्यादा सख्त प्रावधान धारा 106 (2) है. यह तब लागू होता है जब कोई व्यक्ति लापरवाही और असावधानी से गाड़ी चलाकर किसी दूसरे व्यक्ति की मौत की वजह बनता है. इसी के साथ घटना के बाद पुलिस अधिकारी या फिर मजिस्ट्रेट को घटना की सूचना दिए बिना ही भाग जाता है.
इस प्रावधान में 10 साल तक की कैद और जुर्माने की सजा का प्रावधान है. इसे हिट एंड रन के लिए नया और सख्त नियम माना गया. ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें उन ड्राइवर के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है जो जानलेवा दुर्घटना के बाद भाग जाते हैं.

धारा 106 (2) को क्यों रोका गया?
इस नियम के कारण बड़े पैमाने पर विरोध हुआ है. खासकर ट्रक, बस और दूसरी कमर्शियल गाड़ियों के ड्राइवरों के बीच. उन्होंने यह चिंता जताई कि मुश्किल दुर्घटनाओं में भी ड्राइवर को काफी कड़ी सजा मिल सकती है. विरोध के बाद केंद्र सरकार ने घोषणा की कि धारा 106 (2) को लागू करने का काम रोक दिया जाएगा और इस पर ट्रांसपोर्ट सेक्टर के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की जाएगी.
हिट एंड रन दुर्घटना के बाद क्या होता है?
दुर्घटना के बाद घटनास्थल से भागने के गंभीर कानूनी नतीजे हो सकते हैं खासकर तब जब घटना में किसी की मौत हो जाए. ड्राइवर को सुरक्षित जगह पर गाड़ी रोकनी चाहिए, घायलों की मदद करनी चाहिए और पुलिस या फिर संबंधित अधिकारी को दुर्घटना की सूचना देनी चाहिए.
किसी खास मामले में आरोप इस बात पर तय होता है कि दुर्घटना में मौत हुई या फिर चोट लगी, गाड़ी चलाने का तरीका कैसा था, टक्कर किन हालात में हुई और दुर्घटना के बाद ड्राइवर का व्यवहार कैसा था.
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नए कानून में मुख्य अंतर क्या है?
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि जानलेवा दुर्घटना के बाद बिना सूचना दिए भागने के लिए एक खास और काफी सख्त नियम लाया गया है. जहां पहले के आईपीसी ढांचे में लापरवाही से मौत की धारा 304A थी, वहीं भारतीय न्याय संहिता ढांचा उस ड्राइवर के व्यवहार में अंतर करता है जो घटनास्थल पर रुकता है और दुर्घटना की सूचना देता है और उस ड्राइवर में जो जानलेवा टक्कर के बाद भाग जाता है.
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