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Gurmeet Ram Rahim 16th Parole : उम्रकैद की सजा में कैदी को कितनी बार मिल सकती है पैरोल, क्या हैं इसके नियम?

Gurmeet Ram Rahim 16th Parole : राम रहीम को लगातार मिल रही अस्थायी रिहाई ने आम लोगों के मन में जेल कानूनों और पैरोल व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

Gurmeet Ram Rahim 16th Parole : गुरमीत राम रहीम को एक बार फिर 30 दिनों की पैरोल मिली है. राम रहीम को एक बार फिर पैरोल मिलने के बाद देशभर में पैरोल व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है. साल 2017 से जेल में बंद राम रहीम को 2020 के बाद से अब तक 16वीं बार पैरोल मिली है. हर बार जब वह जेल से बाहर आता है तो यह सवाल उठता है कि आखिर एक उम्रकैद या लंबी सजा काट रहा कैदी कितनी बार पैरोल ले सकता है. पैरोल हर कैदी का अधिकार होती है और इसके नियम क्या है. राम रहीम इस समय रोहतक की सुनारिया जेल में दुष्कर्म और पत्रकार हत्या मामले में सजा काट रहा है, लेकिन राम रहीम को लगातार मिल रही अस्थायी रिहाई ने आम लोगों के मन में जेल कानूनों और पैरोल व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि उम्रकैद की सजा में कैदी को पैरोल कितनी बार मिल सकती है और इसके नियम क्या है.

क्या होती है पैरोल?

पैरोल का मतलब है किसी कैदी को कुछ समय के लिए जेल से अस्थायी राहत देना है. यह पूरी रिहाई नहीं होती, बल्कि तय समय के लिए जेल से बाहर रहने की अनुमति होती है. पैरोल के दौरान कैदी कानूनी रूप से दोषी ही माना जाता है और उसे तय अवधि पूरी होने के बाद वापस जेल लौटना पड़ता है. पेरोल एक तरह की अस्थायी रिहाई है, जो मानवीय और सामाजिक कारणों से दी जाती है. 

क्या हर कैदी को पैरोल मिल सकती है?

हर कैदी को पैरोल नहीं मिलती है. इसके लिए कई नियम और शर्तें तय होती हैं. जेल प्रशासन और सरकार यह देखती है कि कैदी का व्यवहार कैसा रहा है. आमतौर पर पैरोल के लिए कैदी ने सजा का कुछ हिस्सा पूरा किया हो. जेल में उसका व्यवहार अच्छा रहा हो. वह सुरक्षा के लिए खतरा न हो. उसकी पुलिस और जेल प्रशासन की रिपोर्ट सकारात्मक हो और कोई मानवीय या पारिवारिक कारण मौजूद हो. 

किन कारणों से मिलती है पैरोल?

भारत में पैरोल आमतौर पर मानवीय, पारिवारिक, स्वास्थ्य और सामाजिक कारणों से दी जाती है. अगर किसी कैदी के परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु हो जाए, कोई गंभीर बीमारी हो, बच्चों की शादी हो या पत्नी बच्चे को जन्म देने वाली हो, तो वह पैरोल के लिए आवेदन कर सकता है. इसके अलावा कैदी की खुद की गंभीर बीमारी या बेहतर इलाज की जरूरत होने पर भी अस्थायी रिहाई दी जा सकती है. कई बार कैदी को समाज और परिवार से जुड़े रखने, मानसिक तनाव कम करने और सुधार प्रक्रिया को मजबूत करने के उद्देश्य से भी पैरोल दी जाती है. कुछ विशेष परिस्थितियों में अदालत या सरकार की अनुमति से त्योहारों, मानवीय आधार या अन्य जरूरी कारणों पर भी पैरोल मंजूर की जा सकती है. 

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उम्रकैद के कैदी को कितनी बार मिल सकती है पैरोल?

भारत में पैरोल के नियम हर राज्य में अलग हो सकते हैं. कई राज्यों में साल भर में पैरोल की अधिकतम अवधि तय होती है. हरियाणा गुड कंडक्ट प्रिजनर्स एक्ट 2022 के अनुसार, एक कैदी को एक कैलेंडर वर्ष में कुल 10 हफ्तों तक पैरोल मिल सकती है. इसे अलग-अलग हिस्सों में लिया जा सकता है. इसके अलावा अलग से फरलो का प्रावधान भी होता है. वहीं राम रहीम को जनवरी 2026 में 40 दिन और अब मई 2026 में 30 दिन की पैरोल मिली. इसके साथ ही राम रहीम का इस साल का पैरोल कोटा पूरा हो गया है. 

कितनी तरह की होती है पैरोल?

भारत में मुख्य रूप से दो तरह की पैरोल होती हैं. जिसमें पहली कस्टडी पैरोल होती है. यह बहुत कम समय के लिए दी जाती है. आमतौर पर किसी करीबी रिश्तेदार की मौत या अंतिम संस्कार जैसे मामलों में दी जाती है. इसमें कैदी पुलिस सुरक्षा के बीच रहता है. इसकी अवधि अक्सर कुछ घंटों से लेकर कुछ दिनों तक होती है. वहीं दूसरी रेगुलर पैरोल होती है. यह लंबी अवधि के लिए दी जाती है. आमतौर पर 30 दिन तक की पैरोल मिलती है, जिसे विशेष परिस्थितियों में बढ़ाया भी जा सकता है. 

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मानसी उपाध्याय करीब दो साल से डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में काम कर रही हैं. फिलहाल वह एबीपी नेटवर्क के टेक सेक्शन में काम कर रही हैं, जहां टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने के साथ-साथ उनके लिए रिसर्च और कंटेंट तैयार करने की जिम्मेदारी संभालती हैं.

पत्रकारिता में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अक्टूबर 2024 में एबीपी नेटवर्क से इंटर्न के रूप में की. इसके बाद से वह डिजिटल कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं. फीचर, टेक और इंफॉर्मेटिव स्टोरीज लिखने के साथ-साथ उनकी रुचि स्क्रिप्ट राइटिंग, सोशल मीडिया और रिसर्च आधारित कंटेंट तैयार करने में है.

मूल रूप से उत्तराखंड से जुड़ी मानसी ने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से पूरी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए (ऑनर्स) हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की. वर्तमान में वह राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म कर रही हैं.मानसी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखती हैं.

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