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भारत में जन्म-मृत्यु का पंजीकरण 99% के पार, जानें 24 साल में कैसे आया इतना बदलाव

नागरिक पंजीकरण प्रणाली (CRS) रिपोर्ट 2024 के अनुसार भारत ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण में 99% से अधिक की ऐतिहासिक प्रगति की है. चलिए जानें कि आखिर ऐसा किन कारणों के चलते हुआ है.

भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत महापंजीयक और जनगणना आयुक्त कार्यालय ने नागरिक पंजीकरण प्रणाली के नए और बेहद महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय आंकड़े जारी किए हैं. इन सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में भारत ने अपने अनुमानित जन्म और मृत्यु के 99 प्रतिशत से अधिक पंजीकरण को दर्ज करने में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की है. पिछले एक दशक में नागरिक पंजीकरण के क्षेत्र में यह अब तक का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी सुधार माना जा रहा है. चलिए जानें कि आखिर यह बदलाव कैसे आया.

क्या है सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम?

भारत में जन्म, मृत्यु और मृत जन्म का लगातार और अनिवार्य लेखा-जोखा रखने के लिए नागरिक पंजीकरण प्रणाली काम करती है. यह प्रणाली कानूनी तौर पर जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969 के तहत वर्ष 1970 से पूरे देश में लागू है. सरकार ने हाल ही में जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 2023 के जरिए इसमें महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं. इस कानून के तहत किसी की भी मृत्यु या जन्म की घटना को उसके होने के अधिकतम 21 दिनों के अंदर रजिस्टर करना अनिवार्य होता है.

2000 से 2024 तक में कितना आया बदलाव?

भारत में पहले के वर्षों में नागरिक पंजीकरण की स्थिति काफी कमजोर थी. साल 2000 तक भारत केवल 56% जन्म और 48% मृत्यु दर्ज करने में ही सक्षम था. साल 2014 तक स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ और यह क्रमश: 86.6% और 72.5% तक पहुंची. लेकिनस वर्ष 2024 की ताजा रिपोर्ट ऐतिहासिक साबित हुई है. इस रिपोर्ट के अनुसार, अब भारत में जन्म पंजीकरण का स्तर 99.1% और मृत्यु पंजीकरण का स्तर 99.4% तक पहुंचा है.

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कितने राज्यों ने किया बेहतरीन प्रदर्शन?

साल 2024 के आंकड़ों की मानें तो देश के 18 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में जन्म पंजीकरण के मामले में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया है. वहीं मृत्यु पंजीकरण के मामले में 100% लक्ष्य हासिल कर लिया है. वहीं मृत्यु पंजीकरण के मामले में प्रदर्शन और भी बेहतर रहा है, जहां कुल 21 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने 100 फीसदी पंजीकरण दर्ज करने का नया रिकॉर्ड बनाया है. 

पंजीकरण में कैसे हुआ अभूतपूर्व सुधार?

इस बड़ी प्रशासनिक सफलता के पीछे कई सामाजिक और तकनीकी कारक जिम्मेदार हैं. जन्म पंजीकरण में वृद्धि के सबसे बड़ा कारण अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में होने वाले संस्थागत प्रसव की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, जिसे विभिन्न मातृत्व लाभ योजनाओं के जरिए बढ़ावा दिया गया है. इसके अलावा, स्कूल में दाखिल, सरकारी योजनाओं के लाभ और मतदाता पहचान पत्र न अन्य डिजिटल दस्तावेज बनवाने के लिए अब जन्म प्रमाण पत्र को एक अनिवार्य वैधानिक दस्तावेज घोषित कर दिया गया है. 

स्वास्थ्य बीमा योजनाएं और कागजी प्रक्रियाओं का सरलीकरण

इसी तरह से मृत्यु पंजीकरण के आंकड़ों में तेजी आने की वजह देश में औपचारिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार है. आयुष्मान भारत जैसी सार्वजनिक स्वास्थ्य योजनाओं के कारण गरीब और कमजोर वर्ग के परिवारों की अस्पतालों तक पहुंच आसान हुई है. इसके साथ ही परिवारों को बैंकों से धन की निकासी, संपत्ति के हस्तांतरण, बीमा दावे के निपटारे और सरकारी पेंशन योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए अनिवार्य रूप से मृत्यु प्रमाण पत्र की जरूरत होती है. इन सभी प्रशासनिक आवश्यकताओं के चलते लोगों की समय पर मृत्यु दर्ज कराने के प्रति जागरूकता तेजी से बढ़ी है. 

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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