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पूर्व मुख्यमंत्री के अंतिम संस्कार में क्या होता है प्रोटोकॉल, उन्हें कितनी तोपों की सलामी दी जाती है?

विमान हादसे में जान गवाने वालों में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी शामिल हैं. गुरुवार को वह अहमदाबाद के सरदार वल्लभ भाई पटेल एयरपोर्ट से अपनी बेटी से मिलने लंदन जा रहे थे.

गुजरात के अहमदाबाद में एयर इंडिया विमान हादसे में 242 लोगों की मौत हो गई है. इस विमान में जान गवाने वालों में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी शामिल हैं. गुरुवार को वह अहमदाबाद के सरदार वल्लभ भाई पटेल एयरपोर्ट से अपनी बेटी से मिलने लंदन जा रहे थे. विमान टेकऑफ के तुरंत बाद हादसे का शिकार हो गया था, जिसमे उनकी मौत हो गई. गुजरात बीजेपी चीफ सीआर पाटिल ने उनकी मौत पर शोक जताया है. 

गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के निधन के बाद लोगों का सवाल है कि किसी राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री का अंतिम संस्कार कैसे किया जाता है? इसका प्रोटोकॉल क्या होता है? क्या राजकीय शोक की घोषणा भी की जाती है और पूर्व सीएम के अंतिम संस्कार में कितने तोपों की सलामी दी जाती है? चलिए जानते हैं... 

राजकीय शोक की होती है घोषणा

किसी भी पूर्व राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या वरिष्ठ नेताओं की मृत्यु पर केंद्र सरकार द्वारा राजकीय शोक की घोषणा की जाती है. पहले राजकीय शोक की घोषणा करने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार के पास ही था. हालांकि अब राज्य सरकार भी इसकी घोषणा कर सकती है. जहां तक पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के निधन की बात है तो इसके लिए राजकीय शोक की घोषणा गुजरात सरकार की ओर से की जानी चाहिए. इस दौरान राज्य सरकार के सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए जाते हैं और राज्य सरकार के कार्यालयों व सचिवालय में झंडे को आधा झुका दिया जाता है. 

ऐसे किया जाता है अंतिम संस्कार

किसी भी पूर्व मुख्यमंत्री का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाता है. इस दौरान मौजूदा सरकार के मुख्यमंत्री व अन्य मंत्री अंतिम संस्कार में मौजूद रहे हैं. संबंधित जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को भी मौजूद रहना होता है. शव को तिरंगे में लपेटा जाता है. वहीं, अंतिम संस्कार से पहले गन सैल्यूट भी दिया जा सकता है. 

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प्रांजुल श्रीवास्तव एबीपी न्यूज में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. फिलहाल फीचर डेस्क पर काम कर रहे प्रांजुल को पत्रकारिता में 9 साल तजुर्बा है. खबरों के साइड एंगल से लेकर पॉलिटिकल खबरें और एक्सप्लेनर पर उनकी पकड़ बेहतरीन है. लखनऊ के बाबा साहब भीम राव आंबेडकर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता का 'क, ख, ग़' सीखने के बाद उन्होंने कई शहरों में रहकर रिपोर्टिंग की बारीकियों को समझा और अब मीडिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं. प्रांजुल का मानना है कि पाठक को बासी खबरों और बासी न्यूज एंगल से एलर्जी होती है, इसलिए जब तक उसे ताजातरीन खबरें और रोचक एंगल की खुराक न मिले, वह संतुष्ट नहीं होता. इसलिए हर खबर में नवाचार बेहद जरूरी है.

प्रांजुल श्रीवास्तव काम में परफेक्शन पर भरोसा रखते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता सिर्फ सूचनाओं को पहुंचाने का काम नहीं है, यह भी जरूरी है कि पाठक तक सही और सटीक खबर पहुंचे. इसलिए वह अपने हर टास्क को जिम्मेदारी के साथ शुरू और खत्म करते हैं. 

अलग अलग संस्थानों में काम कर चुके प्रांजुल को खाली समय में किताबें पढ़ने, कविताएं लिखने, घूमने और कुकिंग का भी शौक है. जब वह दफ्तर में नहीं होते तो वह किसी खूबसूरत लोकेशन पर किताबों और चाय के प्याले के साथ आपसे टकरा सकते हैं.

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