जब गुड़ की मिठास बनी मातम, 8 फीट ऊंची बाढ़ में बहीं मालगाड़ी और मरे 21 लोग
दुनिया में पानी से आई बाढ़ के बारे में तो सुना होगा, लेकिन क्या कभी गुड़ की बाढ़ के बारे में सुना है. दुनिया के एक शहर में ऐसी भी खौफनाक और चिपचिपी बाढ़ आई थी, जिसमें कई लोग मरे थे.

आमतौर पर जब नदियां उफान पर होती हैं या फिर मूसलाधार बारिश से सड़कों पर पानी की भयंकर बाढ़ आती है, लेकिन इतिहास में एक ऐसा भयानक हादसा भी दर्ज है जब पानी की जगह कई फीट ऊंचा उबलता और चिपचिपा गुड़ सड़कों पर सैलाब बनकर दौड़ पड़ा था. सुनने में भले ही यह बात काल्पनिक लगे, लेकिन अमेरिकी इतिहास की यह एक बहुत ही खौफनाक और दिल दहला देने वाली औद्योगिक त्रासदी है. गुड़ के एक बहुत बड़े टैंक के अचानक फटने से पूरा शहर चिपचिपे मलबे में डूब गया था, जिससे चारों तरफ भारी तबाही मच गई और कई बेकसूर लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी.
बोस्टन शहर में हुआ भयानक औद्योगिक हादसा
यह खौफनाक वाकया 15 जनवरी 1919 का है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका के बोस्टन शहर के नॉर्थ एंड पार्क स्थित कमर्शियल स्ट्रीट पर घटित हुआ था. वहां यूनाइटेड स्टेट्स इंडस्ट्रियल अल्कोहल कंपनी का एक विशालकाय स्टोरेज प्लांट बना हुआ था. इस परिसर में करीब 58 फीट ऊंचा और बेहद विशाल मेटल टैंक स्थापित था, जिसमें लगभग 25 लाख गैलन कच्चा और गाढ़ा गुड़ भरकर रखा गया था. उस समय औद्योगिक कार्यों और अल्कोहल बनाने के लिए इतनी बड़ी मात्रा में गुड़ का स्टॉक करके रखा जाता था, लेकिन यही विशालकाय ढांचा शहर के लिए काल बन गया.
अचानक हुए विस्फोट से टैंक टूटने का मंजर
घटना वाले दिन मौसम का मिजाज आम दिनों की तुलना में थोड़ा गर्म था. दोपहर के लंच का समय नजदीक था और कारखाने के मजदूर मालगाड़ियों के डिब्बों में सामान लादने के काम में व्यस्त थे. तभी अचानक दोपहर से ठीक पहले उस विशाल मेटल टैंक से गूंजती हुई आवाज के साथ धमाका हुआ. टैंक के निचले हिस्से को कसने वाले लोहे के बोल्ट बंदूक की गोलियों की तरह हवा में उड़ने लगे. बोल्ट टूटते ही भारी दबाव में भरा हुआ गर्म और गाढ़ा गुड़ तेज धमाके के साथ बाहर की ओर फूट पड़ा और तबाही का दौर शुरू हो गया.
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आठ फीट ऊंची खौफनाक लहर और तबाही
टैंक फटते ही लाखों गैलन गर्म और गाढ़ा गुड़ करीब आठ फीट ऊंची विशाल लहर के रूप में सड़कों पर दौड़ पड़ा. इस चिपचिपे बहाव की ताकत इतनी ज्यादा थी कि रास्ते में खड़ी भारी-भरकम मालगाड़ियां तक ताश के पत्तों की तरह बह गईं. कंपनी की पूरी इमारत के खिड़की-दरवाजे पल भर में चकनाचूर हो गए. बेसमेंट में काम कर रहे मजदूरों को भागने का संभलने तक का मौका नहीं मिला और वे गुड़ के उस खौफनाक दलदल में दब गए. कुछ ही मिनटों में चारों तरफ चीख-पुकार और मातम का सन्नाटा छा गया.
सड़कों पर बहता सैलाब और जानमाल का नुकसान
टैंक से निकला हुआ चिपचिपा गुड़ आसपास के इलाकों में नदी की तरह बहने लगा. इसकी चपेट में पास स्थित फायर स्टेशन भी आ गया और ऊंचाई पर बनी रेलवे लाइन के मजबूत पिलर तक उखड़ गए. पब्लिक वर्क्स विभाग में काम कर रहे पांच कर्मचारी भी इस बहाव में फंस गए. कई राहगीर और घोड़े इस गाढ़े और चिपचिपे दलदल में ऐसे जकड़े गए कि वे चाहकर भी बाहर नहीं निकल सके. इस भयानक त्रासदी में कुल 21 बेकसूर लोगों की दर्दनाक मौत हो गई और दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल पहुंचे.
महीनों चली चिपचिपी गुड़ की सफाई और जांच
हादसे के बाद पूरे बोस्टन शहर में चारों तरफ गाढ़ा गुड़ जम गया था. इसकी अत्यधिक चिपचिपाहट की वजह से स्थानीय प्रशासन को सड़कों और इमारतों को पूरी तरह साफ करने में कई हफ्तों का समय लग गया. इसके बाद पीड़ित परिवारों ने कंपनी के खिलाफ 100 से ज्यादा केस दर्ज कराए. इस मामले की कानूनी जांच करीब छह साल तक चली, जिसमें लगभग 3,000 गवाहों के बयान दर्ज किए गए और 45,000 पन्नों से अधिक के दस्तावेज इकट्ठे किए गए. यह अमेरिका की सबसे चर्चित और लंबी अदालती जांचों में से एक बन गई.

कंपनी को देना पड़ा भारी मुआवजा
विस्तृत जांच पूरी होने के बाद अदालत और जांच अधिकारियों ने इस पूरी तबाही के लिए कंपनी को सीधे तौर पर जिम्मेदार पाया. जांच रिपोर्ट में साफ कहा गया कि कंपनी का स्टोरेज टैंक कमजोर था और वह 25 लाख गैलन गुड़ का भारी दबाव झेलने में पूरी तरह अक्षम था. लापरवाही उजागर होने के बाद अदालत ने कंपनी पर सख्त रुख अपनाते हुए पीड़ितों और उनके परिजनों को भारी नुकसान की भरपाई करने का हुक्म सुनाया. कंपनी को हर्जाने के तौर पर उस जमाने में करीब 10 लाख डॉलर का भारी-भरकम मुआवजा चुकाना पड़ा था.
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