एक्सप्लोरर

पूर्व सीएम और पूर्व विधायक की पेंशन में कितना अंतर, किसे मिलता है ज्यादा पैसा?

पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व विधायक की पेंशन के बीच का अंतर मुख्य रूप से राज्य सरकारों द्वारा निर्धारित नियमों और पद की गरिमा पर आधारित होता है. आइए जानें कि किसे ज्यादा पैसा और सुविधाएं मिलती हैं.

Show Quick Read
Key points generated by AI, verified by newsroom
  • पूर्व सीएम व विधायकों को सेवानिवृत्ति के बाद मिलती है पेंशन.
  • पूर्व सीएम को पेंशन संग आजीवन आवास, वाहन, कर्मचारी भत्ते.
  • पूर्व विधायकों की पेंशन कार्यकाल पर निर्भर, बिहार में ₹45,000 से शुरू.
  • महंगाई भत्ते के साथ पारिवारिक पेंशन भी उपलब्ध.

राजनीति के मैदान में सक्रिय रहने के बाद जब कोई नेता सेवानिवृत्त होता है या चुनाव हार जाता है, तब भी सरकारी खजाने से उनकी सुविधाओं का सिलसिला थमता नहीं है. पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व विधायकों को मिलने वाली पेंशन न केवल उनके बुढ़ापे का सहारा बनती है, बल्कि कई बार यह चर्चा का विषय भी रहती है. आखिर एक पूर्व मुख्यमंत्री को पूर्व विधायक की तुलना में कितनी अधिक पेंशन और सुविधाएं मिलती हैं? आइए समझते हैं अलग-अलग राज्यों के पेंशन गणित और उन खास भत्तों को, जो इन माननीय नेताओं को आम नागरिक से अलग बनाते हैं.

पूर्व मुख्यमंत्री और विधायक की पेंशन का बुनियादी अंतर

पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व विधायक की पेंशन के बीच का अंतर मुख्य रूप से संबंधित राज्य के विधानसभा नियमों द्वारा तय किया जाता है. हालांकि दोनों ही पदों के लिए पेंशन का प्रावधान है, लेकिन एक पूर्व मुख्यमंत्री को मिलने वाली राशि और सुविधाएं पूर्व विधायक की तुलना में काफी व्यापक होती हैं. पूर्व सीएम को न केवल एक निश्चित मूल पेंशन मिलती है, बल्कि उन्हें पद की गरिमा के अनुरूप आजीवन कई विशेष भत्ते भी प्रदान किए जाते हैं. इसके विपरीत, एक पूर्व विधायक की पेंशन पूरी तरह से सदन में बिताए गए उनके वर्षों पर निर्भर करती है.

मुख्यमंत्री पद के साथ मिलने वाली आजीवन सुविधाएं

अधिकांश राज्यों में पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए पेंशन का पैमाना बहुत ऊंचा रखा गया है. उन्हें मिलने वाली वित्तीय सहायता के अलावा, उन्हें आजीवन सरकारी आवास, निजी वाहन, ड्राइवर और घरेलू कर्मचारियों की सुविधा भी दी जाती है. चिकित्सा सुविधाओं के मामले में भी पूर्व सीएम को विशेष रियायतें मिलती हैं. यह सुविधाएं उन्हें एक पूर्व विधायक की तुलना में कहीं अधिक शक्तिशाली और आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाती हैं, भले ही उनकी राजनीतिक पारी समाप्त हो चुकी हो.

यह भी पढ़ें: Mamata Banerjee Pension: चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी को कितनी मिलेगी पेंशन, क्या है नियम?

पूर्व विधायकों की पेंशन और कार्यकाल का गणित

एक पूर्व विधायक की पेंशन उसके कार्यकाल के आधार पर घटती या बढ़ती है. उदाहरण के तौर पर, बिहार जैसे राज्यों में पहली बार विधायक बनने वाले व्यक्ति को लगभग 45,000 रुपये प्रति माह की मूल पेंशन मिलती है. यदि वह विधायक दोबारा या उससे अधिक बार चुना जाता है, तो हर अतिरिक्त वर्ष के लिए पेंशन में लगभग ₹4,000 की सालाना वृद्धि की जाती है. कुछ राज्यों में यह पेंशन व्यवस्था इतनी आकर्षक है कि कई पूर्व विधायकों की मासिक राशि भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारियों के वेतन को भी पीछे छोड़ देती है.

महंगाई भत्ता और पेंशन में होने वाला इजाफा

पूर्व जनप्रतिनिधियों को भी सरकारी कर्मचारियों की तरह महंगाई भत्ते का लाभ मिलता है. राज्यों में पेंशन के नियम इतने उदार हैं कि कुछ जगहों पर महंगाई भत्ता 234% तक दर्ज किया गया है. हरियाणा जैसे राज्यों में कुछ दिग्गज पूर्व विधायक 2 लाख रुपये प्रति माह से भी अधिक की पेंशन उठा रहे हैं. इसका कारण उनका कई बार विधायक चुना जाना और समय-समय पर होने वाली वेतन-भत्ता वृद्धि है, जो उनकी पेंशन को अन्य सभी सरकारी पदों से कहीं अधिक ऊंचाइयों पर ले जाती है.

पारिवारिक पेंशन और सुरक्षा के प्रावधान

पेंशन का लाभ केवल पूर्व विधायक के जीवित रहने तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि उनके निधन के बाद भी परिवार को आर्थिक सुरक्षा दी जाती है. नियमों के अनुसार, पूर्व विधायक की मृत्यु के बाद उनके जीवनसाथी को कुल पेंशन का लगभग 75% हिस्सा पारिवारिक पेंशन के रूप में मिलता रहता है. यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि जनप्रतिनिधि का परिवार सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बना रहे.

राज्यवार नियमों में विविधता और तुलना

भारत के हर राज्य में पूर्व विधायकों और मुख्यमंत्रियों की पेंशन के अपने अलग नियम हैं. जहां पंजाब में एक विधायक-एक पेंशन जैसे सुधार लागू किए गए हैं, वहीं बिहार और हरियाणा जैसे राज्यों में अब भी कार्यकाल के आधार पर संचयी पेंशन का लाभ मिलता है. रिपोर्ट्स बताती हैं कि बिहार में पूर्व विधायकों की पेंशन पूर्व सांसदों से भी अधिक हो सकती है, जो यह दर्शाता है कि राज्य स्तर पर राजनीति का आर्थिक पक्ष कितना मजबूत है.

यह भी पढ़ें: Mamata Banerjee Resignation: ममता बनर्जी से पहले कौन-कौन से सीएम इस्तीफा देने से कर चुके हैं इनकार? जान लें उनके नाम

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

Vegetarian Villages India: भारत के ये गांव हैं पूरी तरह से शाकाहारी, जानें क्या है इसके पीछे की वजह?
भारत के ये गांव हैं पूरी तरह से शाकाहारी, जानें क्या है इसके पीछे की वजह?
UAE Oil Reserve: भारत के लिए 30 मिलियन बैरल 'स्ट्रैटजिक तेल' रिजर्व करेगा UAE, इससे कितने दिन चल सकता है काम?
भारत के लिए 30 मिलियन बैरल 'स्ट्रैटजिक तेल' रिजर्व करेगा UAE, इससे कितने दिन चल सकता है काम?
Gold Utensils: सोने-चांदी के बर्तनों में क्यों खाते थे राजा महाराजा, जानें क्या‌ थी वजह
सोने-चांदी के बर्तनों में क्यों खाते थे राजा महाराजा, जानें क्या‌ थी वजह
Mosquito Deaths: सांप न बिच्छू और न शेर, इस पिद्दी से जीव की वजह से दुनिया में होती हैं सबसे ज्यादा मौतें
सांप न बिच्छू और न शेर, इस पिद्दी से जीव की वजह से दुनिया में होती हैं सबसे ज्यादा मौतें
Advertisement

वीडियोज

NEET Paper Leak:नोट उड़ाकर जताया गुस्सा! शिक्षा मंत्री के आवास पर यूथ कांग्रेस का भारी हंगामा!
Sansani: मुंब्रा में फरेबी प्रेमिका ने प्रेमी को दिया धोखा....! | Crime News | Maharashtra
Top News: बड़ी खबरें, फटाफट | Massive Hike in Silver Import Duty | PM Modi Appeal
भगवान बने Suriya ने corruption के खिलाफ दिखाई दमदार लड़ाई
India में Dhurandhar 2 की OTT release delay होने पर भड़के fans
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement
Petrol Price Today
₹ 94.77 / litre
New Delhi
Diesel Price Today
₹ 87.67 / litre
New Delhi

Source: IOCL

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
7 अक्टूबर के मास्टरमाइंड का खात्मा: रिहायशी अपार्टमेंट पर हुए इजरायली हमले में हमास चीफ एजेद्दीन अल-हद्दाद की मौत, पत्नी और बेटी भी मारे गए
IDF का बड़ा दावा: 7 अक्टूबर के मास्टरमाइंड का खात्मा, इजरायली हमले में हमास चीफ एजेद्दीन की मौत
डिजिटल जनगणना में CM योगी ने भरा ऑनलाइन फॉर्म, बोले- ‘हमारी जनगणना, हमारा विकास’
डिजिटल जनगणना में CM योगी ने भरा ऑनलाइन फॉर्म, बोले- ‘हमारी जनगणना, हमारा विकास’
'गब्बर सिंह' उर्फ अमजद खान के निधन से टूट गए थे बेटे शादाब, सलीम ने चुपचाप उठाया था पूरा खर्च
'गब्बर सिंह' उर्फ अमजद खान के निधन से टूट गए थे बेटे शादाब, सलीम ने चुपचाप उठाया था पूरा खर्च
मोहम्मज सिराज के '200' पूरे, ईडन गार्डन्स में KKR के खिलाफ रचा इतिहास 
मोहम्मज सिराज के '200' पूरे, ईडन गार्डन्स में KKR के खिलाफ रचा इतिहास 
ओलंपिक की मेजबानी, दुनिया के विकास का इंजन... नीदरलैंड्स दौरे में PM मोदी ने सेट किया भारत का एजेंडा
ओलंपिक की मेजबानी, दुनिया के विकास का इंजन... नीदरलैंड्स दौरे में PM मोदी ने सेट किया भारत का एजेंडा
'हालात अच्छे नहीं हुए तो खत्म हो सकता सब कुछ', ऊर्जा संकट को लेकर पीएम मोदी ने चेताया
'हालात अच्छे नहीं हुए तो खत्म हो सकता सब कुछ', ऊर्जा संकट को लेकर पीएम मोदी ने चेताया
CBSE ने छात्रों की चिंता पर तोड़ी चुप्पी, OSM सिस्टम को लेकर दिया बड़ा बयान
CBSE ने छात्रों की चिंता पर तोड़ी चुप्पी, OSM सिस्टम को लेकर दिया बड़ा बयान
रेतीली मिट्टी में उगायें लाल फल, ये तकनीक बदल देगी किस्मत, किसान भाई जानें तरीका
रेतीली मिट्टी में उगायें लाल फल, ये तकनीक बदल देगी किस्मत, किसान भाई जानें तरीका
Embed widget