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गृहमंत्री अमित शाह को धमकाने के लिए अभिषेक बनर्जी के ऊपर केस दर्ज, जानें ऐसे मामलों में कितनी मिलती है सजा?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को कथित तौर पर धमकी देने और भड़काऊ भाषण देने के मामले में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की गई है. आइए ऐसे मामलों में सजा के बारे में जानें.

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  • उच्च पदस्थ व्यक्ति को धमकी पर 7 साल तक की सजा.

पश्चिम बंगाल की सियासत से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है. तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कद्दावर नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी की कानूनी मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही हैं. चुनाव के दौरान दिए गए उनके कुछ बयानों को लेकर अब उनके खिलाफ पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. देश के गृह मंत्री को सीधे तौर पर निशाना बनाने और जनता के बीच नफरत फैलाने के आरोपों के बाद मामला थाने तक पहुंच चुका है. आइए विस्तार से जानते हैं कि इस पूरे विवाद के पीछे की मुख्य वजह क्या है और देश के कानून में ऐसे मामलों को लेकर सजा के क्या प्रावधान तय किए गए हैं.

अभिषेक बनर्जी पर शिकंजा

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी एक गंभीर कानूनी पचड़े में फंस गए हैं. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान कथित तौर पर भड़काऊ और आपत्तिजनक भाषण देने के मामले में उनके खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपनी चुनावी रैलियों में देश के गृह मंत्री अमित शाह को सीधे तौर पर धमकी दी थी. ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के खिलाफ यह एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही राज्य की राजनीति में अचानक भारी गरमाहट आ गई है. चुनाव नतीजे आने के अगले ही दिन यानी 5 मई को पुलिस में यह मामला दर्ज कराया गया है.

गैर जमानती गंभीर धाराएं

पुलिस ने इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एफआईआर में बेहद सख्त और गंभीर कानूनी धाराएं जोड़ी हैं. दर्ज मामले के मुताबिक, अभिषेक बनर्जी के भाषणों से समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आपसी दुश्मनी को बढ़ावा मिला और इसके कारण सार्वजनिक शांति भी पूरी तरह भंग हुई. एफआईआर में इस बात का साफ जिक्र है कि उन्होंने देश के गृह मंत्री अमित शाह को खुलेआम धमकियां दी थीं. पुलिस ने जो धाराएं लगाई हैं, उनमें से कई धाराएं पूरी तरह से गैर-जमानती हैं, जो मुख्य रूप से दंगों के लिए उकसाने और विभिन्न समूहों के बीच नफरत फैलाने से संबंधित हैं.

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ऐसे मामलों में कितनी हो सकती है सजा?

भारत के कानून में किसी भी आम या खास व्यक्ति को डराने या धमकाने पर सख्त कार्रवाई की बात कही गई है. भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत इन मामलों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर देखा जाता है. अगर किसी मामले में दी गई धमकी बहुत सामान्य प्रकृति की होती है, तो उसे बीएनएस की धारा 351 के दायरे में रखा जाता है. इस धारा के तहत दोषी साबित होने वाले अपराधी को कोर्ट की तरफ से अधिकतम दो साल तक की जेल की सजा सुनाई जा सकती है, या फिर उस पर आर्थिक जुर्माना लगाया जा सकता है, या कई बार दोनों सजाएं साथ में दी जाती हैं.

हाई प्रोफाइल केस में सजा

जब धमकी देश के गृह मंत्री जैसे किसी बेहद उच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को दी जाती है, तो कानून का रूप और ज्यादा सख्त हो जाता है. ऐसी स्थिति में जान से मारने या गंभीर शारीरिक नुकसान पहुंचाने की धमकी देने पर बीएनएस की धारा 351(2) के तहत मुकदमा चलता है. इस धारा के तहत अपराध साबित होने पर आरोपी को 7 साल तक की कड़ी कैद भुगतनी पड़ सकती है और साथ ही भारी जुर्माना भी देना पड़ता है. चूंकि मामला एक वीवीआईपी की सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए पुलिस इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से देखती है.

जांच का दायरा और कानून

ऐसे संवेदनशील मामलों की जांच करते समय पुलिस और देश की सुरक्षा एजेंसियां बेहद सतर्कता से कदम उठाती हैं. कानून के मुताबिक, धमकी कितनी गंभीर है और उसे देने के लिए किस माध्यम (जैसे चुनावी मंच, सोशल मीडिया, फोन या पत्र) का इस्तेमाल किया गया है, इस पर पूरी कार्रवाई निर्भर करती है. अगर मामला बहुत ज्यादा गंभीर और देश की आंतरिक सुरक्षा को प्रभावित करने वाला पाया जाता है, तो पुलिस आरोपी के खिलाफ सामान्य धाराओं के अलावा आतंकवाद निरोधक कानून या अन्य विशेष कड़े कानूनों के तहत भी मामला दर्ज कर सकती है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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