ITR Penalty Rules: ITR फाइलिंग में दी गलत जानकारी, कितनी हो सकती है सजा?
ITR Penalty Rules: इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय कई बार लोगों से जाने-अनजाने में गलतियां हो जाती हैं. ऐसे में समय रहते उसे सुधार लें वरना लंबा-चौड़ा जुर्माना लग सकता है.

ITR Penalty Rules: भारत में हर साल लाखों लोग अपना इनकम टैक्स रिटर्न ITR फाइल करते हैं. कई बार लोग टैक्स बचाने के चक्कर में या गलती से अपने फॉर्म में गलत जानकारी भर देते हैं. कुछ लोग झूठे खर्च दिखाते हैं तो कुछ लोग अपनी पूरी कमाई को छुपा लेते हैं. अगर आप भी ऐसा करते हैं तो सावधान हो जाइए. क्योंकि इनकम टैक्स विभाग अब बहुत आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है, जिससे ऐसी चोरियां तुरंत पकड़ ली जाती हैं. ITR में गलत जानकारी देना आपको बहुत महंगा पड़ सकता है. इसमें तगड़े जुर्माने से लेकर जेल जाने तक की सजा हो सकती है.
भारी जुर्माना, 200 फीसदी तक पेनल्टी
अगर आप अपने ITR में कोई कमाई छुपाते हैं या जानबूझकर गलत जानकारी देते हैं, तो इसे मिसरिपोर्टिंग माना जाता है. आयकर कानून की धारा 270A के तहत, अगर आप पकड़े जाते हैं तो आपको छुपाए गए टैक्स का 200 फीसदी तक जुर्माना देना पड़ सकता है. साथ ही ITR भरने की एक तय समय सीमा होती है, अगर आप तय समय के बाद ITR भरते हैं तो आयकर कानून की धारा 234F के तहत 5,000 रुपये तक की लेट फीस लग सकती है. हालांकि, अगर आपकी कुल आय 5 लाख रुपये से कम है, तो ये फीस अधिकतम 1,000 रुपये होगी.
कितने साल की हो सकती है सजा
ITR में जानबूझकर गलत घोषणा करना या झूठे दस्तावेज जमा करना एक कानूनी अपराध माना जाता है. इसके लिए इनकम टैक्स एक्ट की धारा 277 के तहत जेल जाना पड़ सकता है. अगर आपने जानबूझकर 25 लाख रुपये से ज्यादा की टैक्स चोरी की है या गलत जानकारी दी है, तो आपको कम से कम 6 महीने और अधिकतम 7 साल की जेल हो सकती है. इसके साथ ही भारी जुर्माना भी लगाया जाता है. अगर टैक्स चोरी की रकम कम है, तब भी कोर्ट आपको 3 महीने से लेकर 2 साल तक की जेल और जुर्माने की सजा सुना सकता है.
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अनजाने में हुई गलती पर भी हो सकती है जेल
इनकम टैक्स विभाग पहले यह देखता है कि क्या टैक्सपेयर ने यह काम जानबूझकर किया है या यह केवल एक साधारण भूल है. अगर आपसे गलती से कोई डेटा छूट गया है, तो विभाग आपको उसे सुधारने का मौका देता है. ऐसे में आप रिवाइज्ड ITR दाखिल करके अपनी गलती को समय रहते ठीक कर सकते हैं. लेकिन अगर विभाग को जांच में यह पता चलता है कि आपने टैक्स बचाने के इरादे से फर्जी दस्तावेज या फर्जी रिफंड का दावा किया था, फिर तो कानूनी कार्रवाई तय है.
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