Tahir Hussain Life Imprisonment: ताहिर हुसैन को उम्रकैद, क्या सिर्फ 20 साल में पूरी हो जाती है सजा?
Tahir Hussain Life Imprisonment: दिल्ली में साल 2020 में हुए दंगों के मामले में आरोपी ताहिर हुसैन को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है. लेकिन यहां सवाल यह है कि क्या उम्रकैद की सजा 20 साल में पूरी हो जाती है, चलिए जानें.

- 14 या 20 वर्ष बाद रिहाई केवल सरकारी दया पर।
Tahir Hussain Life Imprisonment: साल 2020 में दिल्ली में हुए भीषण दंगों के मामले में कोर्ट ने पूर्व आम आदमी पार्टी पार्षद ताहिर हुसैन को उम्रकैद की सजा सुनाई है. इस बड़े फैसले के बाद से ही लोगों के बीच एक बार फिर यह बहस छिड़ गई है कि उम्रकैद का असली मतलब क्या होता है. बहुत से लोग मानते हैं कि उम्रकैद की सजा पाने वाला कैदी सिर्फ 14 या 20 साल में जेल से छूट जाता है. लेकिन क्या सच में उम्रकैद का असली मतलब आजीवन कारावास ही होता है, या इसके पीछे भी कानून के कुछ और पहलू छुपे हैं.
ताहिर हुसैन को क्यों हुई उम्रकैद?
ताहिर हुसैन पर 2020 में हुए दिल्ली हिंसा के दौरान दंगों की साजिश रचने, भीड़ को भड़काने और हिंसा के लिए पैसे मुहैया कराने के बेहद गंभीर आरोप लगे थे. जब जांच हुई तो सामने आया कि ताहिर हुसैन के घर की छत का इस्तेमाल दंगाइयों ने पत्थरों, पेट्रोल बमों और तेजाब की बोतलों को फेंकने के लिए एक ठिकाने के रूप में किया था. साथ ही इंटेलिजेंस ब्यूरो आईबी के कर्मचारी अंकित शर्मा की बेरहमी से हत्या के मामले में भी इसका नाम मुख्य आरोपियों में शामिल था. कोर्ट ने इन सभी सबूतों और गवाहों के आधार पर माना कि ताहिर हुसैन उस हिंसक भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे. जिसने बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान पहुंचाया. इसी वजह से अदालत ने उन्हें इस मामले में दोषी पाते हुए उम्रकैद की कड़ी सजा सुनाई है.
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20 साल में पूरी हो जाएगी उम्रकैद की सजा?
ताहिर हुसैन को उम्रकैद मिलने के बाद आम लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या वह 14 या 20 साल बाद जेल से बाहर आ जाएंगे. देश के कानून और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के मुताबिक, इस सवाल का जवाब है, नहीं. क्योंकि, कानूनन उम्रकैद का सीधा मतलब होता है व्यक्ति की प्राकृतिक मृत्यु यानी आखिरी सांस तक जेल में रहना. कोर्ट जब किसी को उम्रकैद देता है, तो उसका मतलब 14 या 20 साल नहीं, बल्कि पूरी जिंदगी की सजा होता है.
तो फिर 20 साल का भ्रम क्यों है?
असल में जेल की किताबों और कागजी कार्रवाई के हिसाब से उम्रकैद के दिनों को गिनने के लिए इसे 20 साल मान लिया जाता है. यह सिर्फ जेल के तकनीकी काम और जुर्माने का हिसाब लगाने के लिए है. इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि 20 साल होते ही कैदी बाहर आ जाएगा.
फिर भी बहुत से लोग सोचते हैं कि 14 साल बाद कैदी पक्का छूट जाता है. लेकिन सच यह है कि अगर किसी कैदी का जेल में बर्ताव बहुत अच्छा रहता है, तो 14 साल की सजा पूरी होने के बाद राज्य सरकार उसकी सजा माफ करने पर सोच सकती है. लेकिन यह पूरी तरह सरकार का फैसला होता है, इसमें कैदी जबरदस्ती रिहाई नहीं मांग सकता है. लेकिन दिल्ली दंगों जैसे देश को दहलाने वाले गंभीर मामलों में सरकारों के लिए ताहिर हुसैन की सजा माफ करना बिल्कुल आसान नहीं होगा. ऐसे बड़े अपराधों में दोषियों को अपनी पूरी जिंदगी जेल की में ही काटनी पड़ती है.
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