Jail Sentence Rule: क्या जेल में आधे दिन में पूरी हो जाती है एक दिन की सजा, क्या है नियम?
Jail Sentence Rule: जेल में दिन-रात अलग गिनने की बात पूरी तरह अफवाह है. कानून के मुताबिक, हर दिन 24 घंटे का ही होता है, सजा सिर्फ सेट ऑफ या रिमिशन के जरिए ही कम हो सकती है.

Jail Sentence Rule: जेल की सजा को लेकर लोगों के बीच कई तरह की भ्रांतियां चलती रहती हैं. इन्हीं में से एक सबसे पॉपुलर सवाल है कि क्या जेल में दिन और रात को अलग-अलग गिना जाता है? यानी क्या आधे दिन में ही एक दिन की सजा पूरी मान ली जाती है. सच्चाई जानने के लिए इस मिथक को कानून की नजर से समझना जरूरी है.
यह अफवाह कहां से आई?
आम बोलचाल में यह बात अक्सर सुनने को मिलती है कि जेल में दिन का हिसाब अलग होता है, कहीं-कहीं तो यह भी कहा जाता है कि दिन को एक दिन और रात को दूसरा दिन मान लिया जाता है, जिससे सजा जल्दी पूरी हो जाती है. हालांकि, असल में यह पूरी तरह गलत धारणा है, जिसका कानून में कहीं कोई जिक्र नहीं मिलता.
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हर दिन 24 घंटे का ही होता है
भारतीय कानून के मुताबिक, जेल में भी एक दिन 24 घंटे का ही गिना जाता है, ठीक वैसे ही जैसे बाहर की दुनिया में गिना जाता है. न कोई अलग फॉर्मूला है, न कोई छूट. संविधान या किसी भी कानूनी प्रावधान में ऐसा कहीं नहीं लिखा कि जेल में दिन और रात को अलग-अलग सजा के तौर पर गिना जाएगा. यानी अगर किसी को एक साल की सजा मिली है, तो उसे पूरे 365 दिन ही जेल में बिताने होंगे, कोई शॉर्टकट नहीं है.
फिर सजा कम कैसे होती है
अब सवाल उठता है कि फिर सजा कम होने की बातें कहां से आती हैं? असल में यहां जिस चीज को लोग गलती से 'आधा दिन' समझ लेते हैं, वह दरअसल सेट ऑफ और रिमिशन का नियम है. सीआरपीसी की धारा 428 के तहत, अगर कोई व्यक्ति ट्रायल के दौरान पहले से ही जेल में बंद रहा है तो वह समय उसकी अंतिम सजा में से घटा दिया जाता है, इसे सेट-ऑफ कहते हैं. इसके अलावा अच्छे व्यवहार, जेल में काम करने या खास परिस्थितियों में सरकार सीआरपीसी की धारा 432 और 433ए के तहत सजा में छूट यानी रिमिशन भी दे सकती है.
पैरोल और फरलो को भी लोग समझ लेते हैं सजा में छूट
कई बार पैरोल और फरलो को भी लोग सजा कम होने से जोड़ देते हैं, जबकि यह सिर्फ अस्थायी तौर पर जेल से बाहर जाने की इजाजत होती है, सजा में कोई कटौती नहीं होती. रेगुलर पैरोल आमतौर पर 30 दिन तक की होती है, और तय समय के बाद कैदी को वापस जेल लौटना ही पड़ता है. तो अगली बार अगर कोई कहे कि जेल में आधे दिन में सजा पूरी हो जाती है, तो समझ लीजिए यह सिर्फ एक भ्रांति है. कानून के मुताबिक हर दिन पूरे 24 घंटे का ही गिना जाता है, सजा घटाने का इकलौता वैध रास्ता है सेट ऑफ या रिमिशन, कोई छिपा हुआ शॉर्टकट नहीं.
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