इतनी है उम्र तो हर हाल में कराना होगा आई टेस्ट, वरना गाड़ी नहीं चलाने देगी सरकार
ब्रिटेन में 70 साल या उससे ज्यादा उम्र के ड्राइवरों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यू कराते समय आंखों की जांच अनिवार्य की जा सकती है. आई टेस्ट नहीं कराने पर ड्राइवरों पर गाड़ी चलाने पर बैन लग सकता है.

ब्रिटेन में सड़क सुरक्षा को लेकर सरकार बड़े बदलाव करने की तैयारी कर रही है. दरअसल ब्रिटेन में एक नए प्रस्ताव के अनुसार 70 साल या उससे ज्यादा उम्र के ड्राइवरों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यू कराते समय आंखों की जांच अनिवार्य की जा सकती है. तय समय पर आई टेस्ट नहीं कराने या टेस्ट में फेल होने की कंडीशन में ऐसे ड्राइवरों पर गाड़ी चलाने पर बैन लग सकता है. इसे लेकर सरकार का मानना है कि बढ़ती उम्र के साथ नजर कमजोर होना सड़क हादसों की बड़ी वजह बन रहा है और मौजूदा सिस्टम लोगों की जान बचाने में नाकाम साबित हो रहा है. यहीं वजह है कि ब्रिटेन सरकार 70 साल या उससे ज्यादा उम्र के ड्राइवरों के लिए आंखों की जांच अनिवार्य कर सकती है.
70 साल से ऊपर वालों के लिए बदलेगा नियम
फिलहाल ब्रिटेन में 70 साल की उम्र के बाद ड्राइविंग लाइसेंस हर तीन साल में रिन्यू कराना होता है. अभी यह सिस्टम पूरी तरह सेल्फ-रिपोर्टिंग पर आधारित है, जिसका मतलब है कि ड्राइवर को खुद ही बताना होता है कि उसकी नजर ड्राइविंग के लायक है या नहीं. नई व्यवस्था में सरकार हर तीन साल में कम्पल्सरी आई टेस्ट को लाइसेंस रिन्यूअल से जोड़ने पर विचार कर रही है. अगर ड्राइवर आंखों की जांच नहीं कराता तो उसका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है.
सड़क हादसों के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
दरअसल ब्रिटेन के सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2024 में सड़क हादसों में मारे गए कुल ड्राइवरों में से 24 प्रतिशत की उम्र 70 साल या उससे ज्यादा थी. वहीं कुल कार एक्सीडेंट पीड़ितों में 12 प्रतिशत बुजुर्ग ड्राइवर शामिल थे इन्हीं आंकड़ों के आधार पर सरकार का कहना है कि सड़क सुरक्षा के लिए अब सख्त कदम उठाने जरूरी हो गए है. वहीं ब्रिटेन उन यूरोपीय देशों में शामिल है, जहां ड्राइविंग के लिए आंखों की बीमारी को लेकर खुद बताने वाला सिस्टम लागू है.
ऑप्टोमेट्रिस्ट्स ने आंकड़ों में हुआ खुलासा
ऑप्टोमेट्रिस्ट्स आंकड़ों के अनुसार 56 प्रतिशत ऑप्टोमेट्रिस्ट्स ने पिछले एक महीने में ऐसे मरीज देखे, जो कानूनी मानक से कम नजर होने के बावजूद गाड़ी चला रहे थे. वहीं 26 प्रतिशत लोग किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं, जिसकी नजर कमजोर है फिर भी वह ड्राइव करता है. इसके अलावा 14 प्रतिशत लोगों के रिश्तेदार खुलेआम नियम तोड़ रहे हैं. कई मामलों में यह भी सामने आया कि ड्राइवरों को पहले ही ड्राइविंग के लिए अनफिट बताया गया था, फिर भी उन्होंने गाड़ी चलाना नहीं छोड़ा. वहीं कुछ मामलों में ड्राइवरों ने अपनी आंखों की बीमारी की जानकारी संबंधित विभाग को दी ही नहीं.
भारत में क्या है नियम?
भारत में भी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए कई नियमों को मानना जरूरी होता है. भारत में ड्राइविंग लाइसेंस के लिए व्यक्ति को फिजिकल और मेंटल रूप से वाहन चलाने के लिए स्वस्थ होना चाहिए. वहीं नियमों के अनुसार भारत में 50 वर्ष से ज्यादा आयु के आवेदकों के लिए अनिवार्य चिकित्सा प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती और वैध लाइसेंस के बिना वाहन चलाने पर सख्त दंड का प्रावधान होगा.
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