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खुशखबरी: वैश्विक तनाव और यूएस के साथ ट्रेड डील पर बातचीत के बीच आयी ये राहत की खबर

इस सप्ताह का सबसे सकारात्मक पहलू सोने के भंडार में तेज बढ़ोतरी रही. आरबीआई के मुताबिक, सोने का भंडार 1.568 अरब डॉलर बढ़कर 112.83 अरब डॉलर पहुंच गया.

India's Forex Reserve: वैश्विक तनाव और अमेरिका के साथ लंबे समय से चल रही व्यापार सौदे पर बातचीत के बीच यह राहत भरी खबर सामने आयी है. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को बताया कि 9 जनवरी को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 392 मिलियन डॉलर बढ़कर 687.19 अरब डॉलर हो गया. इससे पिछले रिपोर्टिंग सप्ताह में देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 9.809 अरब डॉलर घटकर 686.80 अरब डॉलर रह गया था.

विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में गिरावट

आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा घटक फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) में 1.124 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह घटकर 550.866 अरब डॉलर रह गया.

डॉलर के संदर्भ में व्यक्त किए गए विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं के मूल्य में उतार-चढ़ाव का प्रभाव भी शामिल होता है.

सोने के भंडार में जोरदार उछाल

इस सप्ताह का सबसे सकारात्मक पहलू सोने के भंडार में तेज बढ़ोतरी रही. आरबीआई के मुताबिक, सोने का भंडार 1.568 अरब डॉलर बढ़कर 112.83 अरब डॉलर पहुंच गया. स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) में 39 मिलियन डॉलर की गिरावट आई और यह घटकर 18.739 अरब डॉलर रह गया.

वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ भारत की आरक्षित स्थिति 13 मिलियन डॉलर घटकर 4.758 अरब डॉलर रह गई. हालांकि विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में गिरावट देखने को मिली, लेकिन सोने के भंडार में मजबूत बढ़ोतरी के चलते कुल विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़त दर्ज की गई. वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत का मजबूत फॉरेक्स रिज़र्व देश की आर्थिक स्थिरता और बाहरी झटकों से निपटने की क्षमता को दर्शाता है.

विदेशी मुद्रा भंडार क्यों जरूरी?

किसी भी देश के लिए विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) उसकी आर्थिक रीढ़ की हड्डी की तरह होता है. यह न केवल देश की वित्तीय मजबूती को दर्शाता है, बल्कि संकट के समय अर्थव्यवस्था को संभालने में भी अहम भूमिका निभाता है.

1. आयात और विदेशी भुगतान में मदद

देश को कच्चा तेल, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरी जरूरी वस्तुओं का आयात करना पड़ता है. इन सभी के भुगतान के लिए विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल होता है. इसके अलावा विदेश से लिए गए कर्ज के ब्याज और मूलधन के भुगतान में भी यही भंडार काम आता है.

2. रुपये को स्थिर रखने में भूमिका

भारत में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग रुपये की कीमत को स्थिर रखने के लिए करता है. जब रुपये पर दबाव बढ़ता है या उसमें तेज गिरावट आती है, तो आरबीआई बाजार में डॉलर बेचकर रुपये को संभालने की कोशिश करता है.

3. वैश्विक संकट से सुरक्षा कवच
वैश्विक मंदी, युद्ध, तेल कीमतों में उछाल या पूंजी के अचानक बाहर जाने जैसी स्थितियों में विदेशी मुद्रा भंडार देश के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है और अर्थव्यवस्था को झटकों से बचाता है.

4. विदेशी निवेशकों का भरोसा
मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार से विदेशी निवेशकों का देश पर भरोसा बढ़ता है. इससे एफडीआई और एफपीआई को प्रोत्साहन मिलता है और देश के अलग-अलग सेक्टरों में निवेश बढ़ता है.

5. अंतरराष्ट्रीय साख और रेटिंग
ज्यादा विदेशी मुद्रा भंडार होने से देश की क्रेडिट रेटिंग बेहतर होती है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी आर्थिक विश्वसनीयता मजबूत होती है.

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