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Explained: नकली बारिश बनाकर भी आग से नहीं बचा चीन, दुनियाभर की टेक्नोलॉजी फेल, आखिर इस पर बस क्यों नहीं चलता?

ABP Explainer: नमस्कार! आज मॉर्निंग एक्सप्लेनर में समझेंगे कि दुनिया की सबसे एडवांस्ड टेक्नोलॉजी बनाने वाला चीन आग से कैसे बच नहीं पाया. आग पर किसी का बस क्यों नहीं चलता है?

26 नवंबर को दोपहर 2:52 बजे चीन में हॉन्गकॉन्ग के ताई पो जिले में एक बड़े रिहायशी कॉम्प्लेक्स में आग लग गई. खबर लिखे जाने तक इस हादसे में 94 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 76 गंभीर रूप से घायल हैं और 280 लोग लापता हैं. यह 77 साल में लगी सबसे भीषण आग है. लेकिन ताज्जुब वाली बात है कि 5G, AI, बारूद, उड़ती कार और नकली बारिश जैसे सैकड़ों इन्वेंशन करने वाला चीन आग पर काबू नहीं पा सका. ABP एक्सप्लेनर में समझते हैं कि इस हादसे के मौजूदा हालात क्या हैं, कैसे दुनियाभर की तकनीक आग से हार जाती है और इसपर काबू पाना नामुमकिन क्यों है...

सवाल 1- चीन में 77 सालों में सबसे बड़ी आग कैसे लगी और अब हालात क्या हैं?
जवाब- चीन के जिस वांग फुक कोर्ट कॉम्प्लेक्स में आग लगी, उसमें कुल 8 इमारते हैं. वांग फुक कोर्ट न्यू टेरिटरीज के ताई पो इलाके में बना एक हाउसिंग कॉम्प्लेक्स है, जहां इस समय मरम्मत और नवीनीकरण का काम चल रहा है. सभी टावर बांस की मचान से ढंके हुए थे. इस एस्टेट में 1,984 फ्लैट हैं और यहां करीब 4,000 लोग रहते हैं. हर इमारत 35 मंजिल है.

आग इमारतों के बाहर लगे बांस के बंदों (स्कैफोल्डिंग) के जरिए तेजी से फैल गई. तेज हवा और जलते हुए मलबे की वजह से लपटें एक इमारत से दूसरी इमारत तक बढ़ती चली गईं. जब आग भड़की, तो कई लोगों को इसकी भनक तक नहीं लगी क्योंकि मरम्मत की वजह से खिड़कियां बंद थीं.

 

वांग फुक कोर्ट न्यू टेरिटरीज के ताई पो इलाके में बना एक हाउसिंग कॉम्प्लेक्स है.
वांग फुक कोर्ट न्यू टेरिटरीज के ताई पो इलाके में बना एक हाउसिंग कॉम्प्लेक्स है.

आग बुझाने पहुंची टीम को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. कई मंजिलों पर तापमान इतना ज्यादा था कि फायर फाइटर्स उन जगहों तक पहुंच भी नहीं पा रहे थे. इसी दौरान एक फायर फाइटर की मौत भी हो गई. पुलिस ने ठेकेदार समेत तीन लोगों को गिरफ्तार भी किया है. इनपर आग के मामले में लापरवाही या गैर-इरादतन हत्या का शक जताया गया है.

हालांकि, पुलिस ने इनके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी है. वहीं, 7 दिसंबर को होने वाले चुनाव से पहले चुनाव प्रचार गतिविधियां स्थगित कर दी गई हैं. चीन की स्थानीय पब्लिक ब्रॉडकास्टर RTHK ने पुलिस के हवाले से बताया कि कई लोग अब भी टावरों में फंसे हुए हैं.

हॉन्गकॉन्ग मीडिया साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, यह 77 साल में सबसे भीषण आग है. इससे पहले 1948 में पांच मंजिला गोदाम में विस्फोट हुआ था, जिसमें 176 लोग मारे गए थे. इसके बाद 1962 में शुई पो इलाके में लगी आग में लगभग 44 लोगों की मौत हो गई थी. वहीं, नवंबर 1996 में कोवलून में गार्ले बिल्डिंग में आग लगने से 41 लोग मारे गए थे और 81 घायल हुए थे.

सवाल 2- दुनियाभर में तकनीक में सबसे आगे रहने वाला चीन, आग से कैसे हार गया?
जवाब- चीन ने पिछले डेढ़ दशक में कई बड़े इन्वेंशन किए...

  • 2023 में दुनिया का पहला 6G टेस्ट सैटेलाइट लॉन्च करने वाला देश बना.
  • 2024 में 600 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार वाली मैग्लेव ट्रेन चलाई.
  • दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटर 'जूझांग-3' उसके पास है, जो अमेरिका के 'फ्रंटियर' से 10 लाख गुना तेज है.
  • 5G बेस स्टेशनों की संख्या 38 लाख से ज्यादा है. यानी दुनिया के बाकी देश मिलकर भी इतने नहीं लगा पाए.
  • 2025 में लॉन्च हुआ लूनर रिसर्च स्टेशन का बेस मॉड्यूल पूरी तरह चीनी तकनीक से बना.
  • दुनिया का सबसे ऊंचा (1,000 मीटर) स्काईस्क्रेपर 'स्काई सिटी' भी चीन ने ही बनाया.
  • यही चीन EV बैटरी में 70% ग्लोबल मार्केट रखता है, सौर पैनल में 80% और ड्रोन टेक्नोलॉजी में ऐसा दबदबा कि DJI अकेला 90% कमर्शियल मार्केट कब्जा रखता है.

चीन ने भले ही दुनियाभर में अपनी टेक्नोलॉजी के दम पर खूब वाहवाही लूटी हो, लेकिन इस एक आग ने बता दिया कि तकनीक 'उपकरण' है, न कि 'समाधान'. चीन ने रिन्यूएबल एनर्जी और EV में निवेश किया, लेकिन फायर-रेजिस्टेंट मटेरियल जैसी बुनियादी सुरक्षा में चूक गया. चीन की तकनीकी तरक्की के बावजूद यह हादसा मानवीय चूक और पुरानी प्रथाओं का नतीजा था...

  • ज्वलनशील सामग्री: यह इमारतें जुलाई 2024 से कंस्ट्रक्टेड थीं. बांस के सहारे और हरी जाली से ढकी हुई थीं, जो चीन और खासकर हॉन्गकॉन्ग में आम है. यह मचान स्टील स्कैफोल्डिंग का एक विकल्प है, जिसे निर्माण कार्य में इसलिए ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि यह हल्की और बहुत मजबूत होती है. इसे ले जाना और ऊंचाई तक पहुंचाना आसान होता है. बांस की लंबी पोलें आसानी से जोड़ी जा सकती हैं, जिससे बड़ी इमारतों के चारों तरफ मचान जल्दी खड़ी हो जाती है. लेकिन लिफ्ट की खिड़कियों पर लगे स्टायरोफोन ब्लॉक (जो आग बुझाने वाले नहीं, बल्कि सजावटी थे) ने आग को तेजी से फैलने दिया. आग बाहर से शुरू हुई, लेकिन कॉरिडोर के जरिए फ्लैट्स तक पहुंच गई.
  • निर्माण में लापरवाही: पुलिस ने घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कंस्ट्रक्शन कंपनी के जिम्मेदारों को गिरफ्तार किया. जांच के शुरू में पाया गया कि ज्वलनशील सामग्री का इस्तेमाल सुरक्षा मानकों का उल्लंघन था. हॉन्गकॉन्ग में घर बनाने की नियम ऊंचे हैं, लेकिन नवीनीकरण पर नजर रखना कमजोर पड़ गया. हॉन्गकॉन्ग बांस के मचान के उपयोग के लिए दुनियाभर में मशहूर है. इसे बनाने के लिए बांस की लंबी पोलों को नायलॉन फास्टनर से बांधकर खड़ा किया जाता है. हालांकि बांस में अगर एक बार आग लग जाए तो यह जल्दी जलता है और लपटें तेजी से ऊपर की ओर फैलती हैं. यही वजह है कि सरकार का डेवलपमेंट ब्यूरो बांस के मचान के इस्तेमाल को धीरे-धीरे खत्म करने की कोशिश कर रहा है.
  • स्मार्ट सिस्टम की कमी: आधुनिक भवनों में AI-बेस्ड स्मोक डिटेक्टर, ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर और अलार्म होते हैं, जो आग के फैलाव को 50-70% तक रोक सकते हैं. लेकिन यह पुराना कॉम्पलेक्स था, जहां ऐसी तकनीक सीमित थी.
  • ड्रोन और रोबोट्स का अभाव: चीन आग बुझाने वाले रोबोट्स और ड्रोन्स में एडवांस्ड है, लेकिन घनी बस्ती में इन्हें तैनात करने में देरी हुई. नतीजतन, फायरफाइटर्स को जोखिम उठाना पड़ा.

 

आग बुझाने के दौरान एक फायरफाइटर की मौत भी हो गई.
आग बुझाने के दौरान एक फायरफाइटर की मौत भी हो गई.

सवाल 3- आग पर काबू पाना इतना मुश्किल क्यों है, जो दुनियाभर की तकनीक फेल हो जाती है?
जवाब- सबसे पहले आग को समझते हैं. यह एक केमिकिल रिएक्शन है, जो चार बुनियादी तत्वों से बनती और फैलती है. इसे 'फायर टेट्राहेड्रॉन' कहते हैं, जो पुराने 'फायर ट्रायंगल' का अपग्रेडेड वर्जन है. नेशनल फायर प्रोटेक्शन एसोसिएशन (NFPA) की रिपोर्ट ऑल अबाउट फायर: अ गाइड फॉर रिपोर्टर्स के मुताबिक, आग के यह चार तत्व हैं...

  • ईंधन: जो जलने वाली चीज है, जैसे लकड़ी, प्लास्टिक या कपड़े.
  • ऑक्सीजन: हवा में मौजूद गैस, जो आग को सांस देती है.
  • गर्मी: जो शुरुआती स्पार्क या हीट सोर्स है.
  • केमिकल चेन रिएक्शन: यह सबसे जरूरी तत्व है, क्योंकि एक बार शुरू होने के बाद जो खुद-ब-खुद चलने लगता है.

यह चार तत्वों के मिलने से आग सिर्फ जलती नहीं, ब्लिक खुद को तेजी से फैलाने लगती है. NFPA के मुताबिक दुनियाभर में 80% से ज्यादा आगें इन्हीं तत्वों के गलत मिश्रण से शुरू होती हैं. एक बार चेन रिएक्शन शुरू हो जाए, तो आग को रोकना नामुमकिन हो जाता है.

  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्टैंडर्ड्स एंड टेक्नोलॉजी (NIST) की स्टडी 'डिफाइनिंग फ्लेशओवर फॉर फायर हाजार्ड कैलकुलेशंस' में एक्सपेरिमेंट्स से साबित हुआ है कि फ्लैशओवर के दौरान तापमान 600 डिग्री सेल्सियस से 1,000 डिग्री तक पहुंच जाता है और यह 30 सेकेंड से कम समय में हो जाता है. एक एक्सपेरिमेंट वीडियो में दिखाया गया कि एक सोफा जलने से शुरू हुई आग 3-5 मिनट में पूरे रूम को कंट्रोल कर लेती है, क्योंकि गर्म हवा ऊपर जाती है और ठंडी हवा नीचे से खींची जाती है, जैसे वैक्यूम क्लीनर.
  • इस आग को बुझाने के लिए सबसे तेज फायर ड्रोन भी पहुंचने में 4-8 मिनट लगाता है और फायर ट्रक को ट्रैफिक में 10-15 मिनट लगते हैं. यह तकनीक इतनी तेज नहीं पहुंच पाती, जितनी तेज आग फैल जाती है.
  • फिर आता है ऑक्सीजन का खेल, जो आग को अमर बना देता है. आग को बुझाने के लिए पानी डालते हैं, जो गर्मी कम करता है, लेकिन ऑक्सीजन को पूरी तरह खत्म नहीं करता. फोम या CO2 गैस से ऑक्सीजन ब्लॉक कर सकते हैं, लेकिन ऊंची इमारतों में हवा का दबाव इतना तेज होता है कि यह केमिकल 10-15 सेकेंड में ही उड़ जाते हैं.
  • इंटरनेट ऑफ थिंग्स यानी IoT सेंसर ऑक्सीजन लेवल मॉनिटर कर सकते हैं, लेकिन एक बार आग फैल जाए, तो वेंटिलेशन सिस्टम खुद आग को फीड कर देते हैं. हैरानी की बात है कि 2023 में सिंगापुर जैसे एडवांस्ड शहर में भी एक हाई-राइज फायर में CO2 सिस्टम फेल हो गया, क्योंकि आग ने पहले ही चेन रिएक्शन शुरू कर दिया था.
  • आज की बिल्डिंग्स में प्लास्टिक, पॉलीयूरेथेनम फोम, स्टायरोफोन और PVC पाइप भरे पड़े हैं. यह पुरानी लकड़ी या ईंट से 5-10 गुना ज्यादा तेज जलते हैं. अंडरराइटर्स लेबोरेट्रीज (UL) के एक्सपेरिमरेंट्स में मॉडर्न फर्नीचर सोफा, 1950 के पुराने फर्नीचर से 20 गुना तेज आग फैलाता है, क्योंकि इसमें सिन्थेटिक फोम होता है जो 1000 डिग्री पर पिघलकर आग को ईंधन देता है.
  • ऊंची इमारतें तो आग की सबसे बड़ी दुश्मन हैं. 100 मीटर ऊपर पानी का प्रेशर अपने आप कम हो जाता है, इसलिए हेलिकॉप्टर या ड्रोन से पानी डालना पड़ता है, जो नाकाफी साबित होता है. हाई-राइज में 'स्टैक इफेक्ट' होता है, यानी गर्म हवा ऊपर जाती है, ठंडी नीचे आती है, जिससे आग और धुआं तेजी से फैलते हैं.

कड़वा सच यह है कि तकनीक आग को रोक नहीं सकती, बल्कि सिर्फ धीमा कर सकती है. NFPA और USFA की रिपोर्ट्स कहती हैं कि 70% फायर्स प्रिवेंट हो सकते हैं अगर बिल्डिंग्स कोड्स फॉलो हों. लेकिन जब लापरवाही और कॉस्ट-कटिंग रहेगी, तब तक 6G या AI बनाने वाला देश भी एक छोटी चिंगारी से हार जाएगा.

सवाल 4- दुनियाभर में आग ने कब और कितनी तबाही मचाई है?
जवाब- दुनिया के 5 भयानक आग हादसे साबित करते हैं कि वह इंसानों की सबसे पुरानी और खतरनाक दुश्मन बनी हुई है...

1. कैलिफोर्निया वाइल्डफायर्स (2025): 7 जनवरी को अमेरिका के लॉस एंजिलिस काउंटी में सांता आना हवाओं और सूखे की मार ने 14 विनाशकारी वाइल्डफायर्स यानी जंगल की आग को जन्म दिया. कुछ कसर बिजली के तारों ने पूरी कर दी. इसमें 32 से ज्यादा मौतें हुईं, 15 हजार से ज्यादा घर-दुकानें तबाह हो गईं और 40 हजार एकड़ से ज्यादा इलाका जलकर खाक हो गया.

 

यह कैलिफोर्निया का सबसे घातक जंगल अग्निकांड था.
यह कैलिफोर्निया का सबसे घातक जंगल अग्निकांड था.

2. ग्रेनफेल टावर फायर (2017): 14 जून को लंदन में एक फ्रिज के शॉर्ट सर्किट से शुरू हुई आग ने लंदन के 24 मंजिला ग्रेनफेल टावर को सिर्फ 30 मिनट में लपटों में ला दिया, क्योंकि ज्वलनशील क्लैडिंग ने आग को रॉकेट की स्पीड दी और 'स्टे-पुट' नीति ने लोगों को ऊपरी मंजिलों पर फंसा दिया. इसमें 72 लोगों की मौत हुई और पूरा टावर नष्ट हो गया.

3. ग्रेट शिकागो फायर (1871): 8 से 10 अक्टूबर को अमेरिका के शिकागो में सूखे मौसम और तेज हवाओं ने शहर को निगल लिया, जब एक गाय के लात मारने से लालटेन गिरकर आग लग गई (हालांकि, यह किंवदंती है). इसने 9 वर्ग किलोमीटर इलाके को जला डाला, 17,400 इमारतें तबाह कर दीं और 1 लाख से ज्यादा लोग बेघर हो गए. इसमें करीब 300 लोगों की मौत हुई. यह अमेरिका का पहला बड़ा शहरी अग्निकांड था, जिसने आधुनिक फायर डिपार्टमेंट की स्थापना को जन्म दिया और शहर को स्टील-फ्रेम बिल्डिंग्स की ओर धकेल दिया.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

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