E20 Janta Party: किसने शुरू किया E20 आंदोलन, क्यों मांगा जा रहा गडकरी का इस्तीफा?
E20 Janta Party: भारत में अब E20 पेट्रोल को लेकर भी चर्चा शुरू हो चुकी है. E20 जनता पार्टी नाम का एक समूह इसका खिलाफ अभियान चला रहा है. आइए जानते हैं पूरी जानकारी.

- E20 एथेनॉल पेट्रोल पर बहस; उपभोक्ता विकल्प मांग रहे हैं।
- E20 के प्रभावों पर चिंता; गडकरी से इस्तीफे की मांग।
- गडकरी ने आरोप नकारे; इसे 'पेट्रोल लॉबी' का अभियान बताया।
E20 Janta Party: भारत में E20 एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल को लेकर बहस एक बार फिर से शुरू हो चुकी है. वाहन मालिक और एक्टिविस्ट का एक वर्ग सरकार द्वारा बढ़ावा दिए जा रहे E20 ब्लेंड के बजाय 100% पेट्रोल खरीदने के विकल्प की मांग कर रहे हैं. कॉकरोच जनता पार्टी से प्रेरित होकर E20 जनता पार्टी नाम का एक समूह उपभोक्ताओं को ज्यादा विकल्प दिखाने के लिए अभियान चला रहा है. इस मांग के साथ-साथ कुछ विरोध करने वाले और विपक्षी नेताओं ने E20 फ्यूल पॉलिसी को लेकर चिंता दिखाते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के इस्तीफे की भी मांग की है. हालांकि गडकरी ने इन आरोपों को खारिज किया है और सरकार के एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम का बचाव किया है.
क्यों है गडकरी के इस्तीफे की मांग?
विरोध करने वालों की मुख्य चिंता में से एक E20 पेट्रोल का वाहन पर पड़ने वाला कथित असर है. आलोचकों के मुताबिक E20 फ्यूल के इस्तेमाल से कुछ वाहन की माइलेज में 8% से 15% तक की कमी देखने को मिली है. उनका यह भी दावा है कि पुराने वाहनों के इंजन, फ्यूल पंप और फ्यूल टैंक में जंग लगने और ज्यादा घिसाव की समस्या हो रही है. इससे मालिकों को मेंटेनेंस पर ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है.
एक्टिविस्ट और विपक्षी पार्टियों द्वारा उठाया गया एक और मुद्दा हितों के टकराव से जुड़ा है. उनका यह दावा है कि नितिन गडकरी के परिवार के सदस्यों के स्वामित्व वाले व्यवसाय को एथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी से काफी फायदा हो सकता है. विरोध करने वालों ने ज्यादा पारदर्शिता की मांग करते हुए इन आरोपों का जिक्र किया है.
उपभोक्ता की अपनी पसंद
इस अभियान की एक बड़ी मांग यह है कि उपभोक्ता को E20 फ्यूल और 100% पेट्रोल के बीच चुनने की आजादी मिलनी चाहिए. विरोध करने वालों का यह तर्क है कि रेगुलर पेट्रोल या तो अब आसानी से उपलब्ध नहीं है या फिर काफी ज्यादा कीमत पर बेचा जा रहा है. उनका कहना है कि अगर वाहन चालक चाहे तो उन्हें बिना ब्लेंडिंग वाला पेट्रोल खरीदने का विकल्प मिलना चाहिए.
यह भी पढ़ेंः FCRA से किस विदेशी पैसे को खतरा, जानें क्या हैं नियम?
इस मुद्दे पर राजनीतिक दबाव
यह विवाद अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है. नीट पेपर लीक विवाद के बाद धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के बाद विपक्षी पार्टी और इसका विरोध करने वालों ने नितिन गडकरी और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पूरी पर दबाव बढ़ा दिया है और E20 फ्यूल पॉलिसी को लेकर जवाबदेही की मांग की है.
क्या कहना है सरकार का?
नितिन गडकरी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. उन्होंने इस अभियान को पेड कैंपेन बताया है और आरोप लगाया है कि इसके पीछे पेट्रोल लॉबी का हाथ है. जो उनके मुताबिक भारत को साफ-सुथरी ऊर्जा की तरफ बढ़ने से रोकने की कोशिश कर रही है.
यह भी पढ़ेंः शिक्षा मंत्री को कौन-सा बंगला अलॉट होता है, इसका किराया कितना है?
























