Pralay Missile: कितनी ताकतवर है प्रलय मिसाइल, इसे चलाने में किस ईंधन का होता है इस्तेमाल?
Pralay Missile: हाल ही में उड़ीसा तट पर प्रलय मिसाइल का परीक्षण किया गया. इस बीच आइए जानते हैं कि यह मिसाइल कितनी ताकतवर है और इसकी क्या खासियत है.

- 6.1 मैक रफ्तार, 10 मीटर सटीकता, त्वरित तैनाती क्षमता।
Pralay Missile: उड़ीसा तट पर प्रलय मिसाइल के सफल परीक्षण के साथ भारत ने अपनी स्वदेशी मिसाइल क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन द्वारा बनाई गई प्रलय एक कम दूरी की, सतह से सतह पर मार करने वाली क्वासी बैलिस्टिक मिसाइल है, इसे स्वदेशी तकनीक से बनाया गया है.
इसकी सबसे खास बात यह है कि उड़ान के दौरान कम ऊंचाई पर रहते हुए भी यह अपना रास्ता बदल सकती है. पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइल के उलट जो एक निश्चित रास्ते पर चलती हैं प्रलय की यह उड़ान क्षमता दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इस ट्रैक करना या रोकना काफी मुश्किल बना देती है.
मारक दूरी और परिचालन पहुंच
प्रलय की मारक दूरी 150 से 500 किलोमीटर के बीच है. इसकी पहुंच इस बात पर निर्भर करती है कि यह कितना पेलोड ले जा रही है. अगर पेलोड को आधा कर दिया जाए तो यह मिसाइल 500 किलोमीटर की दूरी तय कर सकती है. मारक दूरी में इस बदलाव की सुविधा की वजह से किसी मिशन की जरूरत और पेलोड की जरूरत के मुताबिक मिसाइल को तैयार किया जा सकता है.
इस मिसाइल को 500 से 1000 किलोग्राम वजन वाले पारंपरिक वॉरहेड ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है. इस वॉरहेड का इस्तेमाल दुश्मन के कमांड सेंटर, रनवे और रडार इंस्टॉलेशन जैसे ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है. इस वजह से इसका मुख्य काम जमीन पर मौजूद जरूरी सैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना है.

रफ्तार और दिशा बदलने की क्षमता
प्रहलाद 6.1 मैक की अधिकतम रफ्तार तक पहुंच सकती है. इतनी ज्यादा रफ्तार होने की वजह से मिसाइल लॉन्च होने के बाद दुश्मन को प्रतिक्रिया देने के लिए काफी कम समय मिलता है. इसके अलावा इसका उड़ान का रास्ता भी इसके डिजाइन में एक बड़ा हिस्सा है.
आमतौर पर एक पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइल एक तय और काफी ऊंचे वाले रास्ते पर चलती है. इसके उलट प्रलय कम ऊंचाई पर उड़ान भरती है और हवा में रहते हुए ही अपनी दिशा बदल सकती है. क्वासी बैलिस्टिक मिसाइल की यह दिशा बदलने की क्षमता इसके रास्ते का अनुमान लगाना मुश्किल बना देती है. रिपोर्ट के मुताबिक इस वजह से दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इस मिसाइल को ट्रैक करना या फिर रोकना काफी मुश्किल हो सकता है.

सटीकता और लक्षित निशाने
यह मिसाइल एडवांस्ड नेविगेशन और गाइडेंस सिस्टम का इस्तेमाल करती है और इसका सर्कुलर एरर प्रोबेबल 10 मीटर से कम है. सीईपी किसी हथियार के अपने लक्षित निशाने के आसपास वार करने की सटीकता को दर्शाती है. 10 मीटर से कम का आंकड़ा यह बताता है की प्रलय को काफी सटीक तरीके से हमला करने के लिए डिजाइन किया गया है.
इसके संभावित लक्ष्यों में कमांड सेंटर, एयरफील्ड रनवे और रडार इंस्टॉलेशन शामिल हैं. अलग-अलग वजन के पारंपरिक वॉरहेड ले जाने की क्षमता, साथ ही इसकी तरह रेंज और गाइडेंस की सटीकता मिलकर इसकी मारक क्षमता का आधार बनती हैं.
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मिसाइल को ताकत देने वाला प्रोपेलेंट
प्रलय को एक हाई एनर्जी वाले कंपोजिट सॉलिड प्रोपेलेंट से ताकत मिलती है. इसके प्रोपल्शन सिस्टम को दो चरण वाली प्रणाली के रूप में बताया गया है. इसमें इसी ठोस ईंधन का इस्तेमाल होता है. लिक्विड प्रोपेलेंट वाली मिसाइल के उलट जिसमें लॉन्च से ठीक पहले ईंधन भरना पड़ता है सॉलिड प्रोपेलेंट मिसाइल में ईंधन पहले से ही भरा होता है.
यह व्यवस्था तैयारी के मामले में व्यावहारिक फायदा देती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मिसाइल को फायर करने के लिए तैयार हालत में सालों तक सुरक्षित रखा जा सकता है. आपात स्थिति में इसे एक मोबाइल लॉन्चर पर रखकर तुरंत दागा जा सकता है. इसमें तरल ईंधन वाली मिशनों की तरह अलग से ईंधन भरने की प्रक्रिया की जरूरत नहीं पड़ती है. इससे तैयारी का समय कम हो जाता है और अलग-अलग जगह पर तेजी से तैनाती करना आसान हो जाता है.
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