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ज्यादा दिन तक भूखे रहने पर क्या वाकई खुद को खाने लगता है शरीर? ये है जवाब

12 से 16 घंटे में हमारी शरीर में स्टोर ग्लूकोज खत्म हो जाता है, जिसके बाद शरीर एनर्जी के लिए शरीर में जमा वसा को जलाने का काम शुरू करता है. इस प्रॉसेस को मेटाबॉलिक स्विच कहते हैं.

मोटापा दुनिया में बड़ी समस्या बनता जा रहा है. सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के अन्य हिस्सों में भी मोटे लोगों की कमी नहीं है, इसका कारण है हमारी बेतरतीब लाइफस्टाइल. ऐसे में वजन कम करने के लिए लोग एक्सरसाइज के बजाय इंटरमिटेंट फास्टिंग कर रहे हैं. आजकल यह काफी ट्रेंड में है. इंटरमिटेंट फास्टिंग में लोग 12 से 16 घंटे तक बिना कुछ खाए-पिए रहते हैं. 

इंटरमिटेंट फास्टिंग को लेकर लोगों का मानना है कि ज्यादा लंबे समय तक भूखा रहने से हमारा शरीर फैट बर्न करने लगता है. हालांकि, कुछ लोग इंटरमिटेंट फास्टिंग का सही तरीका नहीं जानते और डिनर से लेकर ब्रेक फास्ट को भी स्किप करते हैं, जिससे आने वाले शरीर में उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इंटरमिटेंड फास्टिंग का सही तरीका क्या है? क्या इससे वाकई में फैट बर्न होता है? क्या वाकई ज्यादा दिन तक भूखे रहने पर हमारा शरी खुद को खाने लगता है? 

क्या है इंटरमिटेंट फास्टिंग

इंटरमिटेंट फास्टिंग वजन को नियंत्रित करने का एक अच्छा तरीका है. इसमें लोग 18/6 घंटे के रुटीन को अपनाते हैं, जिसमें लोग 18 घंटे का फास्ट रखते हैं और 6 घंटे के दौरान ही कुछ खा सकते हैं. फास्टिंग के दौरान भूख लगने पर सिर्फ लिक्विड डाइट पर रहना होता है. यह प्रक्रिया कई दिनों तक दोहराई जाती है, जिससे वजन नियंत्रित होने लगता है. 

भूखे रहने से शरीर खुद को खाने लगता है?

बहुत से लोगों का मानना होता है कि लंबे समय तक कुछ न खाने या भूखे रहने से हमारा शरीर खुद को खाने लगता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो यह सही है, लेकिन लंबे समय तक फास्टिंग से शरीर हमारी बॉडी में मौजूद वसा और फैट का उपयोग ऊर्जा के रूप में करता है. हालांकि, यह प्रक्रिया एक समय तक ही सही है. दरअसल, फास्टिंग शुरू करने से पहले हमारी बॉडी एनर्जी के लिए ग्लूकोज का उपयोग करती है. खाने से मिलने वाले कार्बोहाइड्रेट ग्लूकोज में बदल जाते हैं, जिससे शरीर को एनर्जी प्राप्त होती है. हालांकि, 12 से 16 घंटे में हमारी शरीर में स्टोर ग्लूकोज खत्म हो जाता है, जिसके बाद शरीर एनर्जी के लिए शरीर में जमा वसा को जलाने का काम शुरू करता है. इस प्रॉसेस को मेटाबॉलिक स्विच कहते हैं, जिसमें शरीर ग्लूकोज के लिए हमारी शरीर में जमा फैट को प्राइमरी फ्यूल के रूप में यूज करता है. अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक भूखा रहता है या खाना छोड़ देता है तो इससे हमें नुकसान हो सकता है और शरीर कमजोर होना शुरू हो जाता है. 

यह भी पढ़ें: शरीर में विटामिन ए की कमी के कारण हो सकता है ये डिसऑर्डर, जानें इसके शुरुआती लक्षण

 

प्रांजुल श्रीवास्तव एबीपी न्यूज में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. फिलहाल फीचर डेस्क पर काम कर रहे प्रांजुल को पत्रकारिता में 9 साल तजुर्बा है. खबरों के साइड एंगल से लेकर पॉलिटिकल खबरें और एक्सप्लेनर पर उनकी पकड़ बेहतरीन है. लखनऊ के बाबा साहब भीम राव आंबेडकर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता का 'क, ख, ग़' सीखने के बाद उन्होंने कई शहरों में रहकर रिपोर्टिंग की बारीकियों को समझा और अब मीडिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं. प्रांजुल का मानना है कि पाठक को बासी खबरों और बासी न्यूज एंगल से एलर्जी होती है, इसलिए जब तक उसे ताजातरीन खबरें और रोचक एंगल की खुराक न मिले, वह संतुष्ट नहीं होता. इसलिए हर खबर में नवाचार बेहद जरूरी है.

प्रांजुल श्रीवास्तव काम में परफेक्शन पर भरोसा रखते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता सिर्फ सूचनाओं को पहुंचाने का काम नहीं है, यह भी जरूरी है कि पाठक तक सही और सटीक खबर पहुंचे. इसलिए वह अपने हर टास्क को जिम्मेदारी के साथ शुरू और खत्म करते हैं. 

अलग अलग संस्थानों में काम कर चुके प्रांजुल को खाली समय में किताबें पढ़ने, कविताएं लिखने, घूमने और कुकिंग का भी शौक है. जब वह दफ्तर में नहीं होते तो वह किसी खूबसूरत लोकेशन पर किताबों और चाय के प्याले के साथ आपसे टकरा सकते हैं.

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