क्या चीन को भी कर्ज देता है भारत, जानें इस पड़ोसी देश पर कितना पैसा उधार?
चीन में जरूरत से ज्यादा उत्पादन उसके लिए परेशानी बनता जा रहा है. चीन के बाजार में सामान तो बहुत है, लेकिन उसे खरीदने वाले लोग कम है. इसी वजह से रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में लगातार कटौती हो रही है.

चीन की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में शामिल है. हालांकि, अब चीन की असल हालत धीरे-धीरे सामने आने लगी है. बाहर से चमकता हुआ दिखने वाला चीन अंदर से आर्थिक दबाव और कर्ज के बोझ से जूझ रहा है. एक तरफ चीन खुद को मजबूत अर्थव्यवस्था के तौर पर पेश करता है, तो दूसरी ओर बढ़ता कर्ज उसकी कमजोर होती आर्थिक स्थिति बता रहा है. ऐसे में एक सवाल यह भी सामने आता है कि क्या भारत भी चीन को कर्ज देता है और दोनों देशों की आर्थिक स्थिति में क्या फर्क है.
चीन की अर्थव्यवस्था में अपस्फीति (Deflation) का खतरा
चीन में जरूरत से ज्यादा उत्पादन अब उसके लिए परेशानी बनता जा रहा है. चीन के बाजार में सामान तो बहुत है, लेकिन उसे खरीदने वाले लोग कम है. इसी वजह से रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में लगातार कटौती हो रही है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 70 आम उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें CPI के आंकड़ों से भी तेज रफ्तार से गिरी है. यह कंडीशन एक असंतुलित अर्थव्यवस्था का साफ संकेत मानी जा रही है. वहीं चीन पर सरकारी और घरेलू कर्ज तेजी से बढ़ रहा है. स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ फॉरेन एक्सचेंज की रिपोर्ट के अनुसार 2025 के अंत तक चीन का सरकारी कर्ज करीब 18.8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान था, जबकि बाहरी कर्ज 2.4 ट्रिलियन डॉलर के आसपास पहुंचने का अनुमान था. सबसे बड़ी चिंता घरेलू कर्ज को लेकर है जो प्राइवेट सेक्टर की वजह से लगातार बढ़ रहा है. वहीं वैश्विक वित्तीय संकट के बाद चीन में कर्ज लेने की रफ्तार तेज हुई और कुछ ही सालों में नॉन फाइनेंसियल प्राइवेट सेक्टर का कर्ज GDP के मुकाबले बहुत ऊंचे स्तर पर पहुंच गया.
क्या भारत देता है चीन का कर्ज?
चीन की GDP बढ़ने की बड़ी वजह उसका भारी निर्यात है. IMF और वर्ल्ड बैंक के अनुमानों के अनुसार, 2024-25 में चीन की प्रति व्यक्ति GDP करीब 13,300 से 13,800 डॉलर तक पहुंच गई है. हालांकि, एक्सपर्ट्स मानते हैं कि GDP की यह बढ़त कर्ज के सहारे टिकी हुई है. वहीं पीपल्स बैंक ऑफ चाइना के डिप्टी गवर्नर के अनुसार चीन का कुल कर्ज उसकी GDP के 300 फीसदी से ज्यादा हो चुका है. यानी चीन जितना एक साल में कमाता है, उससे तीन गुना से ज्यादा उस पर कर्ज है. भारत आमतौर पर चीन को कोई बड़ा सरकारी कर्ज नहीं देता है. भारत की नीति विकासशील देशों को सहायता देने की रही है. आपको बता दें कि भारत खुद वर्ल्ड बैंक और BRICS के न्यू डेवलपमेंट बैंक जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्था से कर्ज लेता है, जिसमें चीन भी एक सदस्य है.
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Source: IOCL
























