Kharg Island: ईरान के लिए इतना खास क्यों है खार्ग आइलैंड, जानें यहां कितना तेल स्टोर है?
Kharg Island: हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खार्ग द्वीप पर हमले की वीडियो जारी की है. इसी बीच आइए जानते हैं कि यह द्वीप ईरान के लिए इतना जरूरी क्यों है.

Kharg Island: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खार्ग आईलैंड पर हुए हमले की वीडियो जारी की है. यह हमला ईरान पर हुआ अब तक का सबसे खतरनाक हमला माना जा रहा है. ईरान, इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के दौरान फारस की खाड़ी में बसा एक छोटा सा द्वीप ईरान की अर्थव्यवस्था और वैश्विक तेल बाजार के लिए काफी जरूरी बन चुका है. यह ईरान के बंदरगाह शहर बुशहर से लगभग 55 किलोमीटर और ईरान की मुख्य भूमि से लगभग 28 किलोमीटर की दूरी पर बसा है. हालांकि इस द्वीप की लंबाई सिर्फ 8 किलोमीटर और चौड़ाई 5 किलोमीटर है, लेकिन यह काफी ज्यादा जरूरी है. यह द्वीप ईरान की तेल निर्यात प्रणाली की रीढ़ के रूप में काम करता है.
क्यों है खार्ग द्वीप इतना जरूरी?
खार्ग द्वीप ईरान के प्राथमिक तेल निर्यात केंद्र के रूप में काम करता है. यहां देश के ज्यादातर कच्चे तेल की खेप को संभाला जाता है. ऐसा कहा जाता है कि ईरान के कुल कच्चे तेल निर्यात का लगभग 90% से 95% हिस्सा इसी एक द्वीप से होकर गुजरता है.
खार्ग द्वीप को ईरान की आर्थिक जीवनरेखा बताया जाता है. ईरानी सरकार के राजस्व का एक बड़ा हिस्सा तेल की बिक्री से आता है. उसी तेल का ज्यादातर हिस्सा इसी द्वीप पर स्थित टर्मिनलों के जरिए से देश से बाहर भेजा जाता है. इस निर्भरता की वजह से खार्ग द्वीप के बुनियादी ढांचे को होने वाला कोई भी नुकसान ईरान के अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से हिला सकता है.
क्यों है यह द्वीप अनोखा?
ईरान का खार्ग द्वीप पर अपना मुख्य तेल निर्यात टर्मिनल विकसित करने का सबसे जरूरी कारण इसके आसपास के जल की गहराई है. ईरान के ज्यादातर तटीय बंदरगाहों का पानी काफी उथला होता है. इससे बड़े तेल टैंकरों को वहां डॉक करना मुश्किल हो जाता है. यह द्वीप थोड़ा अनोखा है क्योंकि इसके आसपास का समुद्र इतना गहरा है कि दुनिया के सबसे बड़े तेल टैंकरों को भी वहां जगह मिल सकती है.
तेल जमा करने की क्षमता
खार्ग द्वीप में तेल जमा करने की काफी बड़ी सुविधा है. ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक यह द्वीप एक बार में लगभग 28 से 30 मिलियन बैरल कच्चा तेल जमा कर सकता है. यह स्टोरेज टैंक ईरान को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को तेल निर्यात करने से पहले उसे जमा करने में मदद करते हैं. तेल जमा करने की बड़ी क्षमता से सप्लाई और डिमांड में होने वाले उतार-चढ़ाव को संभालने में मदद मिलती है. इससे यह पक्का होता है कि तेल की खेप को ठीक से तैयार किया जा सके.
निर्यात की काफी बड़ी संभावना
इस द्वीप का निर्यात इंफ्रास्ट्रक्चर तेल की काफी बड़ी मात्रा को संभालने के लिए डिजाइन किया गया है. सैद्धांतिक रूप से खार्ग द्वीप का टर्मिनल सिस्टम हर दिन 7 मिलियन बैरल तक कच्चा तेल निर्यात कर सकता है. इस क्षमता की वजह से यह मध्य पूर्व के सबसे जरूरी तेल टर्मिनल में से एक बन गया है.
मुख्य तेल क्षेत्रों को जोड़ने वाला पाइपलाइन नेटवर्क
खार्ग द्वीप पाइपलाइन के एक बड़े नेटवर्क के जरिए ईरान के कई मुख्य तेल उत्पादक क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है. अहवाज तेल क्षेत्र, मारून तेल क्षेत्र और गचसारन तेल क्षेत्र जैसे मुख्य जमीनी तेल क्षेत्रों से कच्चा तेल पाइपलाइनों के जरिए इस द्वीप तक पहुंचाया जाता है. इसके अलावा अबुजर तेल क्षेत्र, फोरूजन तेल क्षेत्र और दोरूद तेल क्षेत्र जैसे समुद्री तेल क्षेत्र फारस की खाड़ी के नीचे बिछाई गई समुद्री पाइप लाइनों के जरिए खार्ग द्वीप से जुड़े हुए हैं.
क्या है इसका इतिहास?
खार्ग द्वीप का इतिहास काफी लंबा और पेचीदा है. इतिहास में यह द्वीप कई विदेशी ताकतों के हाथों में रहा. इनमें डच ईस्ट इंडिया कंपनी और उससे पहले फारस की खाड़ी में काम करने वाली पुर्तगाली सेनाएं शामिल थीं. आखिरकार 20वीं सदी में यह द्वीप पूरी तरह से ईरान के इलाके का हिस्सा बन गया.
रजा शाह पहलवी के शासनकाल के दौरान खार्ग द्वीप का इस्तेमाल एक अलग मकसद के लिए किया जाता था. उन्होंने 1925 से 1941 तक ईरान पर राज किया था. क्योंकि यह मुख्य भूमि से अलग थलग था, इस वजह से इस द्वीप का इस्तेमाल राजनीतिक कैदियों को रखने की जगह के तौर पर किया जाता था. इसकी दूर दराज की जगहें इसे वैसा ही बनाती थी जैसा कि औपनिवेशिक ताकतें कैदियों को रखने के लिए दूरदराज के द्वीपों का इस्तेमाल करती थीं. ठीक उसी तरह जैसे भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान अंडमान और निकोबार द्वीपों का इस्तेमाल होता था.
ईरान के आधुनिक तेल युग का उदय
हालांकि ईरान में तेल की खोज सबसे पहले 1908 में हुई लेकिन देश की आधुनिक पेट्रोलियम निर्यात प्रणाली दशकों बाद विकसित हुई. 1950 के दशक के आखिर तक ईरान ने बड़े पैमाने पर तेल निर्यात के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार करने के रणनीतिक महत्व को पहचान लिया था. 1958 में ईरान ने अपने तेल उद्योग में बड़े पैमाने पर निवेश करना शुरू किया. लगभग 1960 में सरकार ने एक अमेरिकी कंपनी को खार्ग द्वीप पर एक बड़ा गहरे पानी वाला तेल निर्यात टर्मिनल बनाने का काम सौंपा. यह द्वीप जल्द ही ईरान के तेल निर्यात कामों का मुख्य केंद्र बन गया.
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Source: IOCL



























