इमारत अचानक कैसे गिरती है? नींव से लेकर छत तक समझें पूरा साइंस
Delhi Satya Niketan Building Collapsed: दिल्ली के सत्य निकेतन में एक बड़ी इमारत भरभराकर गिर गई. आइए जानते हैं कि इमारत अचानक कैसे गिरती है. जानें क्या है इसके पीछे का साइंस.

- दिल्ली में इमारत ढही, 6 मौतें; अचानक पतन पर उठे सवाल.
- नींव की कमजोरी, घटिया सामग्री से इमारत की संरचना अस्थिर होती है.
- अतिरिक्त भार, जंग लगना या भूकंप संरचनात्मक विफलता का कारण.
- एक हिस्से की विफलता पूरी इमारत का अचानक पतन कराती है.
Delhi Satya Niketan Building Collapsed: दिल्ली के सत्य निकेतन में एक बड़ी इमारत के गिरने के बाद बचाव एजेंसियां हरकत में आ गई हैं. इसी के साथ मरने वालों की संख्या बढ़कर 6 हो गई है. बचाव कार्य जारी रहने के साथ ही यह घटना एक बड़ा सवाल भी खड़ा करती है. आखिर इतनी बड़ी और मजबूत दिखने वाले इमारत अचानक कुछ ही सेकंड में कैसे गिर सकती है? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.
नींव का फेल होना
नींव पूरी इमारत का वजन जमीन तक पहुंचाती है. अगर नींव या उसे सहारा देने वाली मिट्टी अस्थिर हो जाती है तो इमारत सुरक्षित रूप से सीधी खड़ी रहने की अपनी क्षमता खो सकती है. मिट्टी का धंसना एक संभावित वजह है. अगर मिट्टी की ठीक से जांच या फिर उसे ठीक से दबाया नहीं गया तो वह असमान रूप से धंस सकती है. इससे नींव झुक सकती है और भार का बंटवारा असमान हो सकता है. इससे दीवारों, बीम और कॉलम पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. मिट्टी का कटाव भी नींव को कमजोर कर सकता है. जमीन के नीचे से पाइप का रिसाव या फिर भारी बारिश मिट्टी को बहा सकती है. इससे नींव के कुछ हिस्सों को पूरा सहारा नहीं मिल पाता.

कॉलम और बीम
कॉलम इमारत के ज्यादातर वर्टिकल भार को संभालते हैं. इसी के साथ बीम भार को कॉलम तक बांटते और पहुंचाते हैं. यह मिलकर इमारत के ढांचे का एक बड़ा हिस्सा बनाते हैं. कंक्रीट दबाव सहने में मजबूत होता है लेकिन खिंचाव सहने में कमजोर होता है. इस वजह से रीइन्फोर्स्ड कंक्रीट के अंदर स्टील की छड़ें डाली जाती हैं. अगर खराब गुणवत्ता वाले कंक्रीट या फिर अपर्याप्त रीइन्फोर्समेंट का इस्तेमाल किया जाता है तो काफी ज्यादा भार की वजह से बनावट के हिस्से फेल हो सकते हैं.
पतले कॉलम में बकलिंग भी हो सकती है. इसमें वह अपनी क्षमता से ज्यादा भार पड़ने पर मुड़ सकता है. अगर कोई एक जरूरी कॉलम फेल हो जाता है तो उसका भार अचानक आसपास के कॉलम पर जा सकता है. इससे और ज्यादा हिस्सों के फेल होने की संभावना बढ़ जाती है.

छत और स्लैब
फर्श और छत अपना भार बीम और कॉलम पर डालते हैं. हर इमारत को उसकी बनावट और इस्तेमाल के आधार पर खास भार सहने के लिए डिजाइन किया जाता है. अगर गैर कानूनी तरीके से अतिरिक्त मंजिलें बनाई जाती हैं या फिर इमारत की डिजाइन क्षमता से ज्यादा भारी सामान रखा जाता है तो निचले कॉलम और बनावट के दूसरे हिस्सों पर खतरनाक रूप से ज्यादा भार पड़ सकता है.
एक और गंभीर समस्या पंचिंग शियर है. इसमें कॉलम अपने जुड़ाव बिंदु के आस-पास कंक्रीट स्लैब को तोड़कर आर-पार निकल सकता है. इससे फर्श का कुछ हिस्सा गिर सकता है.
इमारत अचानक क्यों गिरती है?
प्रोग्रेसिव कॉलेप्स की वजह से रैपिड कॉलेप्स हो सकता है. ऐसा तब होता है जब किसी एक जरूरी संरचनात्मक घटक की विफलता दूसरे घटकों की विफलताओं को जन्म देती है. उदाहरण के लिए अगर भूतल का कोई बड़ा स्तंभ जंग, काफी ज्यादा भार या फिर निर्माण दोषों की वजह से विफल हो जाता है तो उसे पर पड़ने वाला भार आस-पास के स्तंभों पर पहुंच जाता है. अगर वे खंभे इतना ज्यादा भार सहन नहीं कर पाए तो एक के बाद एक गिरने लगते हैं. इससे पैनकेक कोलैप्स हो सकता है. इसमें एक मंजिल नीचे वाली मंजिल पर गिर जाती है.
जंग संरचना को कमजोर कर सकता है
पानी और नमी कंक्रीट में प्रवेश करके अंदर मौजूद स्टील रीइन्फोर्समेंट तक पहुंच सकते हैं. इसके बाद स्टील में जंग लग सकता है और वह फैल सकता है. इससे आस-पास के कंक्रीट में दरारें पड़ सकती हैं. गंभीर जंग रीइन्फोर्समेंट की प्रभावशीलता को कम कर सकता है और वक्त के साथ खंभों, बीमों और स्लैब को कमजोर कर सकता है. यही वजह है कि पानी का रिसाव और लंबे समय तक नमी के संपर्क में रहना गंभीर संरचनात्मक चिंता का विषय बन सकता है.
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भूकंप संरचनात्मक विफलता की वजह बन सकते हैं
भूकंप इमारतों को शक्तिशाली क्षैतिज और गतिशील बलों के संपर्क में लाते हैं. खराब भूकंपरोधी डिजाइन या फिर अपर्याप्त रीइन्फोर्समेंट वाली इमारत को गंभीर नुकसान हो सकता है.
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