क्या हैं पीजी बनाने के नियम? बिल्डिंग बायलॉज के हिसाब से जानें सब कुछ
Delhi Satya Niketan Building Collapsed: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक पीजी के ढह जाने से बड़ा हादसा हो गया. इसी बीच आइए जानते हैं कि पीजी बनाने के क्या नियम हैं और क्या कहता है बिल्डिंग बायलॉज.

- अवैध निर्माण, अग्निशमन सुरक्षा व किराएदार सत्यापन जरूरी है।
Delhi Satya Niketan Building Collapsed: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक पांच मंजिला अवैध हॉस्टल के अचानक ढहने से कंस्ट्रक्शन की सुरक्षा और बिल्डिंग नियमों का पालन किए बिना रहने की सुविधा चलाने के जोखिमों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. बेसमेंट की मरम्मत के काम के दौरान हुई इस घटना ने पीजी आवासों से जुड़े नियमों की तरफ ध्यान खींचा है. आइए जानते हैं क्या हैं पीजी बनाने के नियम.
पीजी रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा
प्रस्तावित पेइंग गेस्ट अकोमोडेशन रेगुलेशन एंड सेफ्टी बिल 2026 के तहत दिल्ली में पीजी चलाने वालों को सरकारी पोर्टल के जरिए अपनी प्रॉपर्टी का रजिस्ट्रेशन कराना होगा. रजिस्टर्ड जगह को एक यूनीक रजिस्ट्रेशन नंबर दिया जाएगा. इस नंबर से अधिकारियों के लिए पीजी आवासों की पहचान करना और उन पर नजर रखना आसान हो जाएगा.
ऑपरेटिंग लाइसेंस की जरूरत होगी
सिर्फ रजिस्ट्रेशन काफी नहीं होगा. प्रस्तावित नियमों के तहत पीजी चलाने वालों को लोकल जोनल अथॉरिटी से पीजी ऑपरेटिंग लाइसेंस भी लेना होगा. उम्मीद है कि कानून लागू होने के 90 दिनों के अंदर यह लाइसेंस लेना होगा.
इस जरूरत का मकसद पीजी जगहों को एक औपचारिक रेगुलेटरी सिस्टम के दायरे में लाना है, ना कि रिहायशी प्रॉपर्टी को बिना नियम कानून वाले हॉस्टल के तौर पर चलने देना.

स्ट्रक्चरल सुरक्षा एक बड़ी जरूरत
किसी प्रॉपर्टी को पीजी में बदलते समय बिल्डिंग की सुरक्षा सबसे जरूरी बातों में से एक है. पुरानी बिल्डिंग के मामले में सर्टिफाइड इंजीनियर से स्ट्रक्चरल ऑडिट करवाना पड़ सकता है. स्ट्रक्चरल सुरक्षा सर्टिफिकेट से यह पता चलेगा कि क्या बिल्डिंग पीजी से जुड़े वजन और लोगों की संख्या को सुरक्षित रूप से झेल सकती है. यह तब और भी जरूरी हो जाता है जब आम रिहायशी इस्तेमाल के लिए बनी बिल्डिंग में कई अतिरिक्त लोग रह रहे हों.
अवैध मंजिल और बेसमेंट होने पर सीलिंग हो सकती है
बिना मंजूरी के पीजी में मंजिलें नहीं बढ़ाई जा सकतीं और ना ही बेसमेंट में बदलाव किया जा सकता है. बिल्डिंग को मंजूर किए गए बिल्डिंग प्लान, लागू बिल्डिंग बायलॉज, मास्टर प्लान की जरूरतों, तय ऊंचाई और फ्लोर एरिया रेश्यो का पालन करना होगा. अगर अधिकारियों को मंजूरी के बिना मंजिलें, अवैध बेसमेंट या फिर मंजूर प्लान से कोई और बड़ा अंतर मिलता है तो उस जगह को सील किया जा सकता है और दूसरी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
फायर सेफ्टी क्लियरेंस जरूरी है
जब एक ही बिल्डिंग में काफी सारे लोग रहते हैं तो फायर सेफ्टी काफी जरूरी हो जाती है. बिल्डिंग की ऊंचाई और उसमें रहने वाले लोगों की संख्या जैसी वजहों के आधार पर दिल्ली फायर सर्विस से फायर सेफ्टी एनओसी लेना जरूरी हो सकता है.
प्रस्तावित जरूरत के तहत अगर बिल्डिंग की ऊंचाई 9 मीटर से ज्यादा है और उसमें 20 से ज्यादा लोग रहते हैं तो फायर एनओसी लेना जरूरी होगा. वहां रहने वाले लोगों के लिए आग से सुरक्षा के सही इंतजाम भी होने चाहिए.

एमसीडी से मंजूरी जरूरी है
पीजी चलाने वालों को म्युनिसिपल नियमों का भी पालन करना होगा. म्युनिसिपल कारपोरेशन ऑफ दिल्ली की मंजूरी में जमीन के इस्तेमाल की इजाजत, साफ सफाई और म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के दूसरे स्टैंडर्ड जैसे मामले शामिल होते हैं.
सिर्फ इस वजह से कि कोई रिहायशी प्रॉपर्टी का इस्तेमाल कानूनी तौर पर घर के तौर पर हो रहा है, यह नहीं माना जा सकता कि वह पीजी की सभी जरूरी शर्तों को पूरा करती है.
किराएदारों का पुलिस वेरिफिकेशन
किराएदारों का वेरिफिकेशन भी एक जरूरी शर्त है. पीजी चलाने वाले से यह उम्मीद की जाती है कि वह पीजी में रहने वाले हर व्यक्ति का पुलिस वेरीफिकेशन पक्का करे. इससे अधिकारियों को वहां रहने वालों का रिकॉर्ड रखने में मदद मिलती है और साथ ही बड़ी संख्या में लोगों के साथ रहने से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं को दूर करने में भी मदद मिलती है.
प्रस्तावित नियमों का मकसद पीजी में रहने वालों को मनमाने चार्ज से बचना भी है. किराए और बिजली के बिलों पर सीमा तय किए जाने की उम्मीद है. ऐसा इसलिए ताकि छात्रों और दूसरे निवासियों को बिजली के काफी ज्यादा कमर्शियल चार्ज न देने पड़ें.
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