यूरोप में क्यों खाली हो रहे चर्च? कई में खुल गईं आर्ट गैलरी
European Churches: यूरोप के कई चर्च अब धीरे-धीरे बंद होते जा रहे हैं. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह और साथ ही यूरोप में ईसाई धर्म की भागीदारी के बारे में.

- यूरोप में घटती आस्था से चर्च खाली, आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे।
- बढ़ती धर्मनिरपेक्षता, विवादों ने ईसाई आबादी घटाई, दान कम किया।
- खाली चर्च अब कला, सांस्कृतिक या व्यापारिक केंद्र बनाए जा रहे हैं।
European Churches: पूरे यूरोप में कई ऐतिहासिक चर्च में आने वाले लोगों की संख्या लगातार कम हो रही है. ऐसा इसलिए क्योंकि धर्मनिरपेक्षता बढ़ती जा रही है और कम लोग नियमित रूप से ईसाई धर्म को मानते हैं या फिर उसका पालन करते हैं. चर्च में लोगों के कम आने से धार्मिक संस्थाओं के लिए एक गंभीर आर्थिक चुनौती पैदा हो गई है. ऐसा इसलिए क्योंकि इनमें से कई सदियों पुरानी इमारतों की मरम्मत और रखरखाव में काफी खर्च आता है. यही वजह है कि जो चर्च कभी बड़े धार्मिक केंद्र हुआ करते थे उन्हें अब बेचा जा रहा है, बंद किया जा रहा है या फिर आर्ट गैलरी, लाइब्रेरी, कैफे, होटल और कम्युनिटी स्पेस के रूप में बदल दिया जा रहा है.
ईसाई आबादी में कमी
प्यू रिसर्च केंद्र की रिपोर्ट के मुताबिक चर्च के बंद होने के पीछे की सबसे बड़ी वजहों में से एक यूरोप का बदलता धार्मिक माहौल है. पारंपरिक रूप से ईसाई धर्म ने यूरोपीय समाज में बड़ी भूमिका निभाई है लेकिन युवा पीढ़ी अब खुद को गैर धार्मिक मान रही है या फिर धार्मिक कार्यक्रमों में कम शामिल हो रही है. रिपोर्ट के मुताबिक यूरोप की ईसाई आबादी में लगातार गिरावट देखने की बात कही गई है. बीते 10 सालों में खुद को ईसाई मानने वाले लोग 74% से घटकर 67% हो गए हैं. चर्च में कम लोगों के आने से दान और इनकम के दूसरे स्रोत भी कम हो जाते हैं. इससे धार्मिक संगठनों के पास बड़ी ऐतिहासिक संपत्तियों के रखरखाव के लिए कम संसाधन बचते हैं.

बढ़ती धर्मनिरपेक्षता
बीते कुछ सालों में यूरोपीय समाज तेजी से धर्मनिरपेक्ष हुआ है. कई देशों में रोजमर्रा के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में धर्म का महत्व धीरे-धीरे कम हुआ है. खासकर युवा यूरोपीयों के लिए. उनके लिए चर्च जाना अब पारिवारिक या फिर समुदाय के जीवन का जरूरी हिस्सा नहीं माना जाता. सामाजिक बदलाव ने पूजा पाठ की पारंपरिक जगह की मांगों को कम कर दिया है और महाद्वीप के कई हिस्सों में चर्चों के बंद होने या फिर उनके विलय में योगदान दिया है.

चर्च से जुड़े विवादों का असर
चर्च से जुड़े विवादों ने भी धार्मिक संस्थाओं में लोगों के भरोसे को प्रभावित किया है. पिछले कुछ दशकों में यूरोप के अलग-अलग देशों में शोषण और संस्थागत विफलताओं के आरोपों ने कुछ श्रद्धालुओं को दूर कर दिया है. व्यापक सामाजिक बदलावों के साथ मिलकर एक विवादों ने लोगों की भागीदारी कम करने और कुछ चर्चों की आर्थिक स्थिति को कमजोर करने में योगदान दिया है.
ऐतिहासिक इमारत के रखरखाव का भारी खर्च
कई यूरोपीय चर्च वास्तुकला के लिहाज से काफी जरूरी और सैकड़ों साल पुराने हैं. उनकी छत, दीवार, रंगीन कांच, पेंटिंग और दूसरी ऐतिहासिक विशेषताओं के रखरखाव में काफी सारा पैसा खर्च हो सकता है.
जब लगातार दान नहीं मिलता तो चर्च प्रशासन यह फैसला कर सकता है कि हर इमारत को खुला रखना आर्थिक रूप से असंभव है. इस वजह से कुछ संपत्तियों को बेच दिया जाता है और कुछ को नए कामों के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
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चर्चों में हो रहा बदलाव
पुराने चर्च की वास्तुकला उन्हें सांस्कृतिक और कलात्मक गतिविधियों के लिए खास तौर पर आकर्षक बनाती है. बड़े हॉल, ऊंची छतें, रंगीन कांच वाली खिड़कियां और ऐतिहासिक इंटीरियर प्रदर्शनियों के लिए अनोखी जगह देती हैं. यही वजह है कि कई पुराने चर्च आर्ट गैलरी, म्यूजियम, एग्जिबिशन स्पेस और कल्चरल सेंटर में बदल दिए गए हैं.
इसी के साथ कुछ चर्च लाइब्रेरी और किताबों की दुकानों के तौर पर भी काम कर रहे हैं. नीदरलैंड और जर्मनी जैसे देश ऐसे उदाहरणों के लिए जाने जाते हैं जहां ऐतिहासिक धार्मिक इमारत को किताबों और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए शानदार जगह में बदल दिया गया है.
कमर्शियल रीडेवलपमेंट एक और विकल्प बन चुका है. पुराने चर्च को होटल, रेस्टोरेंट, कैफे और मनोरंजन की दूसरी जगह में बदल दिया गया है. उनकी खास बनावट व्यवसायों को एक अनोखा माहौल देती है.
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