Delhi Metro Brake System: दिन में कितनी बार लगते हैं दिल्ली मेट्रो के ब्रेक? क्यों नहीं खराब होता इसका ब्रेकिंग सिस्टम
Delhi Metro Brake System : दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) का नेटवर्क लगातार बढ़ रहा है और यह देश का सबसे बड़ा ऑपरेशनल मेट्रो रेल नेटवर्क बना हुआ है.

Delhi Metro Brake System: दिल्ली मेट्रो में रोजाना लाखों लोग सफर करते हैं. किसी के लिए यह ऑफिस पहुंचने का सबसे आसान रास्ता है तो किसी के लिए दिल्ली-एनसीआर में एक जगह से दूसरी जगह जाने का सबसे भरोसेमंद साधन है. मेट्रो की स्पीड के बीच हर स्टेशन पर ट्रेन का कुछ ही समय में रुकना और फिर दोबारा चल पड़ना आम बात लगती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रोजाना हजारों ट्रेन ट्रिप के दौरान मेट्रो के ब्रेक कितनी बार इस्तेमाल होते होंगे. इतनी बार ब्रेक लगाने के बाद भी इसका ब्रेकिंग सिस्टम कैसे काम करता है.
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) का नेटवर्क लगातार बढ़ रहा है और यह देश का सबसे बड़ा ऑपरेशनल मेट्रो रेल नेटवर्क बना हुआ है. दिल्ली-एनसीआर में ही करीब 416 किलोमीटर का मेट्रो नेटवर्क है, जिसमें 303 स्टेशन शामिल हैं. ऐसे में मेट्रो के सुरक्षित और भरोसेमंद संचालन में उसके ब्रेकिंग और ऑटोमेशन सिस्टम की जरूरी भूमिका होती है. तो आइए जानते हैं कि दिन में कितनी बार दिल्ली मेट्रो के ब्रेक लगते हैं और इसका ब्रेकिंग सिस्टम क्यों नहीं खराब होता है.
दिन में कितनी बार दिल्ली मेट्रो के ब्रेक लगते हैं?
दिल्ली मेट्रो के पास कुल 343 ट्रेनें हैं, जिनमें 2,368 कोच शामिल हैं. ये ट्रेनें हर दिन करीब 4,508 ट्रेन ट्रिप करती हैं और लगभग 1,40,112 ट्रेन किलोमीटर की दूरी तय करती हैं. मेट्रो की समय पर चलने की दर करीब 99.9 फीसदी बताई गई है. इतनी बड़ी संख्या में ट्रेन ट्रिप के दौरान ट्रेनों को अलग-अलग स्टेशनों पर रुकना पड़ता है. ब्रेकिंग सिस्टम का इस्तेमाल भी लगातार होता रहता है. ऐसे में रोजाना हजारों ट्रेन ट्रिप और स्टेशन स्टॉपेज की वजह से ब्रेकिंग सिस्टम लगातार ऑपरेशन में रहता है.
दिल्ली मेट्रो का ब्रेकिंग सिस्टम क्यों नहीं खराब होता है?
दिल्ली मेट्रो की ट्रेनों में सेंट्रलाइज्ड ऑटोमैटिक ट्रेन कंट्रोल यानी CATC सिस्टम का इस्तेमाल होता है. इसमें Automatic Train Operation (ATO), Automatic Train Protection (ATP) और Automatic Train Signaling (ATS) जैसे सिस्टम शामिल हैं. इन तकनीकों का इस्तेमाल ट्रेन के संचालन, सुरक्षा और सिग्नलिंग को कंट्रोल करने के लिए किया जाता है. इस तरह मेट्रो का संचालन केवल ड्राइवर के कंट्रोल पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि ऑटोमेशन और सुरक्षा सिस्टम भी ट्रेन की गतिविधियों में जरूरी भूमिका निभाते हैं.
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ब्रेक के साथ सुरक्षा सिस्टम भी रखते हैं नजर
मेट्रो में ट्रेन को सुरक्षित तरीके से चलाने के लिए कई सिस्टम मिलकर काम करते हैं. ट्रेन में इमरजेंसी कम्युनिकेशन के लिए इंटरकॉम की सुविधा दी गई है. यात्रियों को हिंदी और अंग्रेजी में ट्रेन से जुड़ी घोषणाएं भी सुनाई जाती हैं, हर कोच में रूट मैप और LCD सिस्टम भी मौजूद होते हैं, इसके अलावा मेट्रो में सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में CCTV कैमरे लगाए गए हैं. स्टेशनों पर करीब 5,200 CCTV कैमरों से सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाता है.
ड्राइवरलेस मेट्रो में ऑटोमेशन की बड़ी भूमिका
दिल्ली मेट्रो भारत के सबसे बड़े ड्राइवरलेस मेट्रो नेटवर्क में से एक है. फिलहाल करीब 121 किलोमीटर नेटवर्क पर ड्राइवरलेस ट्रेन ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध है. पिंक लाइन पर करीब 71.55 किलोमीटर और मैजेंटा लाइन पर करीब 49.19 किलोमीटर हिस्से में ड्राइवरलेस ट्रेन ऑपरेशन चल रहा है. इन दोनों लाइनों के लिए DMRC के पास कुल 80 ड्राइवरलेस ट्रेनें हैं. ड्राइवरलेस संचालन में ऑटोमेशन और सुरक्षा तकनीक की भूमिका और भी जरूरी हो जाती है. ट्रेन के संचालन और सुरक्षा से जुड़े सिस्टम मिलकर इसकी आवाजाही को कंट्रोल करते हैं.
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