Delhi Lal Dora Areas : किन इलाकों को कहा जाता है लाल डोरा, इसका अंग्रेजों से क्या कनेक्शन?
Delhi Lal Dora Areas : दिल्ली सरकार स्वामित्व योजना के तहत क्यूआर कोड वाले स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड जारी करने की तैयारी कर रही है. मुख्यमंत्री ने इस प्रक्रिया को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं.

Delhi Lal Dora Areas : दिल्ली में लाल डोरा एक बार फिर चर्चा में है. दिल्ली के लाल डोरा और आबादी वाले गांवों में रहने वाले लोगों को जल्द ही अपनी जमीन और मकान का डिजिटल रिकॉर्ड मिलने वाला है. दिल्ली सरकार स्वामित्व (SVAMITVA) योजना के तहत क्यूआर कोड वाले स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड जारी करने की तैयारी कर रही है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अधिकारियों को इस प्रक्रिया को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं. सरकार का कहना है कि सालों से इन इलाकों में संपत्तियों का सही रिकॉर्ड नहीं होने के कारण लोगों को कई परेशानियां होती थीं. अब ड्रोन सर्वे और डिजिटल तकनीक से हर संपत्ति का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है, जिससे जानकारी अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद होगी. ऐसे में आइए जानते हैं कि किन इलाकों को लाल डोरा कहा जाता है और इसका अंग्रेजों से क्या कनेक्शन है.
किन इलाकों को लाल डोरा कहा जाता है?
दिल्ली में लाल डोरा उन इलाकों को कहा जाता है, जिन्हें ब्रिटिश शासन के दौरान गांवों की आबादी वाले क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया था. साल 1908 में अंग्रेजों ने राजस्व रिकॉर्ड तैयार करते समय गांवों के नक्शों पर लाल रंग की एक रेखा खींची. इस रेखा के अंदर रहने वाले लोगों का रिहायशी इलाका था, जबकि इसके बाहर की जमीन कृषि भूमि मानी जाती थी. इसी लाल निशान की वजह से इन क्षेत्रों को लाल डोरा कहा जाने लगा.
अंग्रेजों से क्या है इसका कनेक्शन?
ब्रिटिश सरकार ने गांव की आबादी और खेती वाली जमीन को अलग-अलग दर्ज करने के लिए यह व्यवस्था बनाई थी. लाल डोरा के अंदर आने वाले क्षेत्रों को कई राजस्व और भवन निर्माण संबंधी नियमों से छूट दी गई थी, जिससे गांवों में लोग आसानी से अपने घर बना सकें. आजादी के बाद भी लंबे समय तक इन इलाकों में यही व्यवस्था जारी रही. समय के साथ दिल्ली का विस्तार हुआ और कई पुराने गांव शहर का हिस्सा बन गए, लेकिन लाल डोरा की पहचान बनी रही.
क्यों अलग माने जाते हैं लाल डोरा क्षेत्र?
लाल डोरा वाले इलाकों में लंबे समय तक भवन निर्माण और नक्शा पास कराने जैसे कई नियम सामान्य कॉलोनियों की तुलना में अलग रहे. यही वजह है कि यहां कई जगह अनियमित निर्माण, संकरी गलियां और संपत्तियों के डॉक्यूमेंट्स से जुड़ी समस्याएं देखने को मिलती हैं. महरौली, छतरपुर, लाडो सराय, नजफगढ़, कंझावला और बवाना जैसे कई पुराने गांव आज भी लाल डोरा क्षेत्रों में शामिल हैं.
अब क्या बदलने जा रही है दिल्ली सरकार?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में स्वामित्व (SVAMITVA) योजना की प्रगति पर चर्चा की गई. सरकार के अनुसार, भारतीय सर्वेक्षण विभाग के साथ समझौते के तहत फिलहाल 48 गांवों को इस योजना में शामिल किया गया है. इनमें से 30 गांवों का सर्वे पूरा हो चुका है और उनके स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड तैयार करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है. अब तक 12,232 संपत्तियों का सर्वे किया जा चुका है. इनमें 8,423 संपत्तियां विवाद-मुक्त पाई गई हैं. दक्षिण और उत्तर-पश्चिम जिले में सर्वे की गई सभी संपत्तियां विवाद-मुक्त बताई गई हैं.
कैसे तैयार होता है स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड?
इस योजना के तहत सबसे पहले लाल डोरा क्षेत्र की सीमाएं तय की जाती हैं. इसके बाद भारतीय सर्वेक्षण विभाग ड्रोन की मदद से पूरे गांव का सर्वे करता है. राजस्व विभाग के अधिकारी जमीन पर जाकर ड्रोन मैप का वास्तविक स्थिति से मिलान करते हैं. अगर कोई विसंगति मिलती है तो उसमें सुधार कराया जाता है. इसके बाद हर संपत्ति को एक यूनिक प्रॉपर्टी आईडी (PID) दी जाती है और उसी के आधार पर स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किया जाता है. बाद में पूरे रिकॉर्ड को दिल्ली ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन इन्फॉर्मेशन सिस्टम (DORIS) से रियल टाइम में जोड़ा जाएगा.
यह भी पढ़ें - Journalist Attack Laws India: किसी पत्रकार पर हमला करना कितना बड़ा अपराध, जानें पत्रकारों के लिए भारत में क्या कानून?



















