CJP Protest Delhi: बड़े आंदोलन को संभालने के लिए कहां रिजर्व रहती है फोर्स? जानिए कितनी ताकतवर है दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के जैसे बड़े प्रदर्शन से निपटने के लिए CRPF, RAF और पुलिस की रिजर्व कंपनियां विशेष केंद्रों में तैनात रहती हैं, जो दिल्ली की हाई-टेक सुरक्षा व्यवस्था के साथ शहर में शांति बनाए रखती हैं.

CJP Protest Delhi: नीट पेपर लीक का पर्चा लीक होने के मुद्दे को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च के दौरान सोमवार को जंतर-मंतर पर जोरदार हंगामा देखने को मिला. प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों के साथ तीखी झड़प देखने को मिली. इस बड़े उग्र आंदोलन को देखते हुए राजधानी के संवेदनशील हिस्सों जंतर-मंतर से संसद भवन तक खासतौर से इसके आसपास के इलाकों को पूरी तरह से छावनी में बदल दिया गया है. यहां पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है. ऐसे में जनता के मन में यह सवाल उठना लाजमी है इतने बड़े प्रदर्शन को रोकने के लिए इतनी रिजर्व पुलिस फोर्स आखिर कहां से आती है और राजधानी की सुरक्षा प्रणाली कितनी पुख्ता है, चलिए जानें.
आपात परिस्थितियों के लिए रिजर्व फोर्स का रणनीतिक नेटवर्क
किसी भी बड़े शहर में अचानक उपजे आंदोलन या उपद्रव को काबू करने के लिए सुरक्षा बलों को एक खास व्यवस्था के तहत स्टैंडबाय मोड पर रखा जाता है. सीआरपीएफ भारत का सबसे बड़ा सशस्त्र बल है, जिसकी दर्जनों कंपनियां देश के प्रमुख शहरों और रणनीतिक परिसरों में स्थित बैरकों में हर पल मुस्तैद रहती हैं. किसी भी जिले में स्थिति बिगड़ने पर इनको तुरंत सड़क या एयरलिफ्ट के जरिए मौके पर रवाना किया जाता है. वहीं राज्यों के स्तर पर प्रांतीय सशस्त्र बल (PAC, SAP या IRB) की बटालियनें जिला पुलिस लाइंस में रिजर्व रहती हैं, जिनको जिला प्रशासन की मांग पर तुरंत तैनात कर दिया जाता है.
विशेष दंगा रोधी दस्ता RAF की तैनाती
भीड़ को तितर बितर करने और उग्र माहौल को शांत करने के लिए सीआरपीएफ की विषेश शाखा रैपिड एक्शन फोर्स को जिम्मेदारी सौंपी जाती है. दंगा-रोधी तकनीकों, आंसू गैस के गोले और रबर की बुलेट के इस्तेमाल में माहिर इन फोर्स के जवान देशभर में चिन्हित संवेदनशील केंद्रों और विशेष बैरकों में रिजर्व रहते हैं.
कितनी पुख्ता है दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था?
दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था देश में सबसे सख्त और अभेद्य मानी जाती है, जिसका सीधा संचालन गृह मंत्रालय करता है. पूरी राजधानी, खासतौर से दिल्ली और मध्य दिल्ली क्षेत्र को त्रि-स्तरीय सुरक्षा चक्र में ढाला गया है. वीवीआईपी इलाकों, राष्ट्रपति भवन और संसद की सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल, अर्धसैनिक बलों (CRPF/BSF) की अतिरिक्त कंपनियों और एनएसजी (NSG) के घातक कमांडो की चौबीसों घंटे तैनाती रहती है. किसी भी आपात स्थिति या अचानक बेकाबू होती भीड़ से निपटने के लिए यह बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था एक मजबूत ढाल की तरह से काम करती है.
AI, CCTV और ड्रोन से निगरानी
जमीनी घेराबंदी के अलावा दिल्ली की सुरक्षा को आधुनिक तकनीक से पूरी तरह से लैस किया गया है. सेफ सिटी प्रोजेक्ट के तहत पूरी राजधानी में फेशियल रिकग्निशन वाले सीसीटीवी कैमरे और एआई-संचालित सर्विलांस सिस्टम लगाए गए हैं. ये कैमरे भीड़ में छिपे संदिग्ध तत्वों उपद्रवियों को तुरंत पकड़ लेते हैं. इसके साथ ही हवाई खतरों और अवैध ड्रोन से निपटने के लिए एंटी-ड्रोन सिस्टम और रडार तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. संसद और अति-संवेदनशील इमारतों की सुरक्षा के लिए कैपिटल डोम जैसी आधुनिक मिसाइल रक्षा प्रणालियां भी सक्रिय रखी जा रही हैं.
बॉर्डर पर सख्त नाकाबंदी
किसी भी आंदोलन के दौरान बाहरी तत्वों को शहर में घुसने से रोकने के लिए दिल्ली की सभी सीमाओं पर मल्टी-लेयर बैरिकेडिंग की जाती है. बॉर्डर पर वाहनों की गहन जांच और पुलिस चेकिंग प्वाइंट बनाए जाते हैं, जिससे कि उपद्रवी राजधानी में प्रवेश न कर सकें. पुलिस कंट्रोल रूम और केंद्रीय खुफिया एजेंसियां पल-पल की रिपोर्ट रिजर्व फोर्स तक पहुंचाती रहती हैं. इस अभेद्य सर्विलांस, प्रशिक्षित जवानों की मौजूदगी और सीमा पर कड़े पहरे के चलते दिल्ली की सुरक्षा प्रणाली इतनी ताकतवर बनती है कि कोई भी बड़ा आंदोलन कानून-व्यवस्था को तोड़ न पाए.
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