दुनिया में सबसे ज्यादा कहां रहते हैं नीली आंखों वाले लोग, इसका कारण क्या?
पूरी दुनिया में नीली आंखों वाले लोगों की संख्या काफी कम है, लेकिन कुछ देशों में यह आंखों का रंग बहुत आम है. जानिए नीली आंखों वाले लोग सबसे ज्यादा कहां मिलते हैं और इसका कारण क्या है.

दुनिया में लोगों की आंखों का रंग अलग-अलग होता है. किसी की आंखें काली होती हैं तो किसी की भूरी, हरी या नीली. नीली आंखों को बेहद खूबसूरत माना जाता है और इन्हें देखने पर अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि आखिर ये रंग आता कहां से है. दरअसल, आंखों का रंग हमारे शरीर में मौजूद जीन और मेलेनिन से जुड़ा होता है. दुनिया के हर हिस्से में नीली आंखों वाले लोग नहीं मिलते. कुछ देशों में इनकी संख्या दूसरे देशों की तुलना में काफी ज्यादा है.
इन देशों में सबसे ज्यादा नीली आंखों वाले लोग
नीली आंखों वाले लोग उत्तरी और पूर्वी यूरोप के देशों में सबसे ज्यादा पाए जाते हैं. फिनलैंड, एस्टोनिया, स्वीडन, नॉर्वे और डेनमार्क में नीली आंखों वाले लोगों की संख्या काफी ज्यादा है. खासकर फिनलैंड को दुनिया के उन देशों में माना जाता है जहां नीली आंखें बहुत आम हैं. इन देशों की आबादी में पीढ़ियों से नीली आंखों से जुड़े जीन मौजूद रहे हैं, इसलिए यहां दूसरे हिस्सों की तुलना में यह आंखों का रंग ज्यादा दिखाई देता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति की आंखें नीली होंगी.
आंखों में नहीं होता नीला रंग
नीली आंखों को देखकर ऐसा लगता है कि आंखों के अंदर कोई नीला रंग मौजूद है, लेकिन ऐसा नहीं है. हमारी आंखों के आइरिस में मेलेनिन नाम का पिगमेंट होता है. जिन लोगों की आंखों में मेलेनिन ज्यादा होता है, उनकी आंखें आमतौर पर भूरी या गहरे रंग की दिखाई देती हैं. नीली आंखों में मेलेनिन की मात्रा कम होती है. इसी वजह से जब रोशनी आंखों के आइरिस पर पड़ती है तो वह अलग तरह से बिखरती है और आंखें नीली दिखाई देती हैं.
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जीन तय करते हैं आंखों का रंग
आंखों का रंग माता-पिता से मिलने वाले जीन पर काफी हद तक निर्भर करता है. इसमें कई जीन काम करते हैं, जिनमें OCA2 और HERC2 भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं. इन जीन में मौजूद कुछ बदलाव आंखों में मेलेनिन की मात्रा को प्रभावित कर सकते हैं. अगर परिवार में नीली आंखों से जुड़े जीन मौजूद हैं तो बच्चे की आंखें भी नीली होने की संभावना हो सकती है. हालांकि सिर्फ माता-पिता की आंखों का रंग देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि बच्चे की आंखें बिल्कुल उसी रंग की होंगी.
यूरोप में नीली आंखों का जीन कैसे फैला?
वैज्ञानिकों के अनुसार यूरोप में हजारों साल पहले आंखों के रंग से जुड़ा एक खास जेनेटिकल बदलाव सामने आया था. इसके बाद यह बदलाव कई पीढ़ियों में आगे बढ़ता गया. माना जाता है कि आज यूरोप में पाए जाने वाले कई नीली आंखों वाले लोगों के पूर्वजों में यह बदलाव मौजूद रहा होगा. समय के साथ आबादी बढ़ी और लोगों के एक जगह से दूसरी जगह जाने के कारण यह जीन अलग-अलग इलाकों में फैलता गया. यही एक वजह है कि आज उत्तरी यूरोप के देशों में नीली आंखें काफी आम दिखाई देती हैं.
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