CJP Protest: कितनी मजबूत होती है संसद की सुरक्षा, जानें कितने लेयर में तैनात होते हैं जवान
CJP Protest Jantar Mantar: बीते दिन जब कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ता और जंतर-मंतर पर एकत्रित छात्र संसद की ओर कूच करने लगे तो वहां की सुरक्षा व्यवस्था सभी के सामने आ गई.

CJP Protest Jantar Mantar: संसद भवन की सुरक्षा अचानक तब पूरी दुनिया के सामने आ गई, जब बीते दिन कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं और छात्रों ने जंतर-मंतर से संसद की तरफ कूच कर दिया. प्रदर्शनकारियों को रेल भवन के करीब पहुंचके देख वहां तैनात अधिकारियों के हाथ-पैर फूल गए और तुरंत आपातकालीन प्रोटोकॉल लागू कर दिया गया. देखते ही देखते संसद के तमाम मुख्य दरवाजों को लॉक कर दिया गया और स्पेशल क्विक रिस्पॉन्स टीम ने अपनी-अपनी पोजिशन संभाल ली. इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो अब इंटरनेट पर जमकर देखा जा रहा है. हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब देश की सबसे अहम इमारत की चौकसी को परखने की कोशिश हुई हो. आइए जानें कि संसद की सुरक्षा कितनी लेयर में होती है.
संसद की सुरक्षा का जिम्मा और नई व्यवस्थाएं
साल 2001 में संसद पर हुए कायराना आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने संसद परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से आधुनिक रूप दे दिया है. अब यहां सिर्फ हथियारों से लैस जवान ही नहीं खड़े रहते हैं, बल्कि हाई-टेक बायोमेट्रिक एंट्री, अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे, एक्सप्लोसिव डिटेक्टर्स और स्पेशल कमांडो दस्ता हर पल मौजूद रहता है. इस पूरे सुरक्षा तंत्र की कमान मुख्य रूप से केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी सीआईएसएफ और पार्लियामेंट सिक्योरिटी सर्विस के पास होती है. किसी भी बड़े सत्र या जंतर-मंतर पर होने वाले आंदोलन के दौरान सुरक्षा की परतें और ज्यादा गहरी कर दी जाती हैं.
हजारों जवानों का पहरा और वीवीआईपी सुरक्षा प्रणाली
संसद की इन-हाउस सुरक्षा एजेंसी यानी पार्लियामेंट सिक्योरटी सर्विस का प्राथमिक काम सांसदों, मंत्रियों और अतिविशिष्ट मेहमानों को सुरक्षित माहौल देना है. लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय के शीर्ष अधिकारी मिलकर इस पूरे नेटवर्त का संचालन करते हैं. परिसर के अंदर लगभग 3300 जवान अलग-अलग शिफ्टों में तैनात रहते हैं, जिनमें प्रशिक्षित कमांडो, डॉग स्क्वॉड, फायर ब्रिग्रेड और बम निरोधक दस्ता हमेशा तैयार रहता है. बिना पुख्ता पहचान और जांच के किसी भी इंसान या वाहन के अंदर जाने की बिल्कुल भी इजाजत नहीं है.
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सुरक्षाकर्मियों की स्पेशल इन-हाउस ट्रेनिंग
इन जवानों को हर तरह ती आपात स्थिति से निपटने के लिए बेहद कड़ा प्रशिक्षण दिया जाता है. वर्ष 2021 में सुरक्षाकर्मियों के लिए 256 विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए थे, जिनमें उन्हें तनाव प्रबंधन, प्राथमिक चिकित्सा और आपदा प्रबंधन जैसी महत्वपूर्ण चीजें सिखाई गई हैं. इतना ही नहीं, सदन के अंदर सांसदों के हंगामे को शांत कराने वाले मार्शलों की भूमिका, शारीरिक तंदुरुस्ती के लिए विशेष प्रोग्राम और विदेशी भाषाओं का ज्ञान भी इन जवानों को दिया जाता है, ताकि वे हर परिस्थिति में सही फैसले ले सकें.
देश की दिग्गज एजेंसियों के साथ ज्वाइंट ऑपरेशन
संसद की सुरक्षा को अचूक बनाने के लिए जवानों को देश की सबसे बेहतरीन सुरक्षा एजेंसियों के पास भी ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता है. जवानों ने एनएसजी मानेसर में स्पेशल फील्ड ऑपरेशन्स, सीआईएसएफ की हैदराबाद अकादमी में बेसिक सिक्योरिटी और मेघालय में लीडरशिप का हुनर सीखा है. इसके अलावा इंटेलिजेंस ब्यूरो के विशेषज्ञों के जवानों को खतरनाक बम और आईईडी पहचानकर उन्हें निष्क्रिय करने की बारीक तकनीकें सिखाई गई हैं, जिससे संसद की सुरक्षा में कोई चूक न हो सके.
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