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Dharmendra Pradhan Resignation: धर्मेंद्र प्रधान की चिट्ठी भर से छूट जाएगा मंत्री पद? जानें क्या होती है इस्तीफे की पूरी प्रक्रिया

संविधान के अनुसार मंत्रिपरिषद का प्रमुख प्रधानमंत्री होता है, इसलिए कोई भी मंत्री अपना इस्तीफा सीधे राष्ट्रपति को न भेजकर पहले प्रधानमंत्री को सौंपता है.

NEET-UG परीक्षा में अनियमितताओं और जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' के हफ्तों चले बड़े छात्र आंदोलन के बाद आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है. हालांकि, राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या सिर्फ एक पत्र या सार्वजनिक घोषणा से मंत्री पद कानूनी रूप से समाप्त हो जाता है? आइए जानते हैं कि इस प्रक्रिया से जुड़े संवैधानिक तथ्य और नियम क्या कहते हैं.

क्या सिर्फ पत्र सौंपने से पद छूट जाता है?

नहीं, भारतीय संविधान के अनुसार किसी भी केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा सिर्फ प्रधानमंत्री को पत्र सौंपने या सोशल मीडिया पर घोषणा करने मात्र से तुरंत प्रभावी नहीं होता है. जब तक राष्ट्रपति इसे स्वीकार कर आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं करते, तब तक मंत्री कानूनी रूप से अपने पद पर बने रहते हैं. मंत्री पद से हटने की पूरी संवैधानिक प्रक्रिया भारतीय संविधान और संसदीय नियमों के अनुसार, किसी मंत्री के इस्तीफे की प्रक्रिया चार प्रमुख चरणों से गुजरती है. आइए आपको बताते हैं.

प्रधानमंत्री को दिया जाता है लिखित इस्तीफा

संविधान के अनुसार मंत्रिपरिषद का प्रमुख प्रधानमंत्री होता है, इसलिए कोई भी मंत्री अपना इस्तीफा सीधे राष्ट्रपति को न भेजकर पहले प्रधानमंत्री को सौंपता है. इस्तीफा मिलने के बाद प्रधानमंत्री यह तय करते हैं कि उसे स्वीकार करना है या नहीं. यदि प्रधानमंत्री इस्तीफे को मंजूरी देते हैं, तो वे इसे अपनी औपचारिक सिफारिश के साथ राष्ट्रपति के पास भेजते हैं. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत, केंद्रीय मंत्री राष्ट्रपति के 'प्रसादपर्यंत' यानी During the pleasure of the President अपना पद धारण करते हैं.  इसलिए, प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा ही इस्तीफे को अंतिम मंजूरी दी जाती है.

यह भी पढ़ें: आजाद भारत के इतिहास में सबसे पहले किस कैबिनेट मंत्री ने छोड़ा था पद, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बीच जानिए इतिहास

कैबिनेट सचिवालय की अधिसूचना से जारी होता है पत्र

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद मंत्रिमंडल सचिवालय द्वारा भारत के राजपत्र में एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाती है. इस गजट नोटिफिकेशन के प्रकाशन के बाद ही कानूनी रूप से मंत्री का पद खाली माना जाता है.  हालांकि यह शक्ति राष्ट्रपति के नाम पर होती है, लेकिन इसका वास्तविक उपयोग प्रधानमंत्री की सलाह पर किया जाता है. अगर प्रधानमंत्री चाहें तो किसी मंत्री से इस्तीफा मांग सकते हैं या राष्ट्रपति से उसे बर्खास्त करने की सिफारिश कर सकते हैं.

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शेख इंजमाम उल हक एबीपी लाइव में बतौर कॉपी एडिटर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वह फीचर सेक्शन में खबरों की कांट छांट और उन्हें तराशने का बेहतरीन हुनर रखते हैं. 4 साल से पत्रकारिता की दुनिया में कार्यरत शेख इंजमाम विकिपीडिया एंव इंडिया न्यूज जैसे संस्थानों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. इन सभी जगहों पर उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं.

शेख इंजमाम ने नई दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की, जहां उन्होंने हिंदी जर्नलिज्म में एमए एमफिल किया. इसके अलावा उन्होंने कोटा से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की, जो उनका जन्म स्थल भी है.

शेख इंजमाम को टीवी इंटरव्यू देखना, फिल्में देखना काफी पसंद है. शेख इंजमाम पत्रकारिता के अलावा साहित्य और इतिहास की भी गहरी समझ रखते हैं.

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