धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कांग्रेस का आया पहला रिएक्शन, कहा - 'घबराहट में सरकार ने...'
Dharmendra Pradhan Resignation News: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस फैसले को नाकाफी और देरी से उठाया गया कदम बताया. खेड़ा ने कहा, 'काफी देर से उठाया गया अधूरा कदम लेकिन अंतत इस बला से छुटकारा मिला.'

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर आते ही कांग्रेस ने सरकार पर चौतरफा हमला बोल दिया. पार्टी के आधिकारिक हैंडल से सीधे तौर पर प्रधानमंत्री को निशाने पर लिया गया. कांग्रेस ने कहा, 'नरेंद्र मोदी भारत का अतीत हैं. अतीत कभी भविष्य से नहीं लड़ सकता.'
Narendra Modi is India's past. The past can never fight the future. pic.twitter.com/MgL86cCUtk
— Congress (@INCIndia) July 25, 2026
वहीं, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस फैसले को नाकाफी और देरी से उठाया गया कदम बताया. खेड़ा ने कहा, 'काफी देर से उठाया गया अधूरा कदम (A day late and a dollar short). लेकिन आखिरकार इस बला से छुटकारा मिला. भारत के लोगों को हार्दिक बधाई."
A day late and a dollar short. But finally, good riddance.
— Pawan Khera 🇮🇳 ಪವನ್ ಖೇರಾ (@Pawankhera) July 25, 2026
Heartiest congratulations to the people of India. https://t.co/AdCUYg093x
'सत्य की जीत, मोदी के हठ की हार': खड़गे की हुंकार
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के तुरंत बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे युवाओं और सत्य की बड़ी जीत बताया है.
खरगे ने 'एक्स' पर कड़ा रुख अपनाते हुए लिखा, "भारत के छात्रों की गूंज आखिरकार अहंकारी सत्ता की दहलीज तक पहुंच गई. यह मोदी जी के हठ की हार है."
भारत के ‘छात्रों की गूँज’ आख़िरकार अंहकारी सत्ता की दहलीज़ तक पहुँच गई।
— Mallikarjun Kharge (@kharge) July 25, 2026
ये हमारे करोड़ों युवाओं की जीत है जिन्होंने देशभर में शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सड़क पर आवाज़ उठाई।
ये सत्य की जीत है और मोदी जी के हठ की हार है।
ये उन सभी परिवारों की जीत हैं जिन्होंने…
उन्होंने इसे भ्रष्ट तंत्र में अपनों को खोने वाले परिवारों और साझा विपक्ष के सड़क से संसद तक के संघर्ष की जीत करार दिया.
सरकार से जवाबदेही की मांग करते हुए खरगे ने दो टूक कहा, "अब मोदी जी को युवा पीढ़ी से माफी मांगनी चाहिए. साथ ही, जिन लोगों ने निहत्थे छात्रों पर लाठी-डंडे और पैलेट गन चलवाई है, उन पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए."
'पैलेट गन, आंसू गैस और लाठीचार्ज से बचा जा सकता था'- अधीर
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने सरकार की नीयत और इस्तीफे की टाइमिंग पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा, "अंततः, कम से कम मैं यह कह सकता हूं कि सरकार को सद्बुद्धि आई है. यह काम बहुत पहले किया जा सकता था. अगर ऐसा पहले ही कर दिया जाता, तो इस तरह की अप्रिय घटनाओं से बचा जा सकता था. पैलेट गन, आंसू गैस, लाठीचार्ज, इन सभी से बचा जा सकता था."
चौधरी ने इसे सरकार का दबाव में लिया गया फैसला बताते हुए तीखा प्रहार किया. उन्होंने कहा, "अब मुझे लगता है कि घबराहट में, सरकार को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा है... अपनी हताशा के चलते सरकार ने अपने ही मंत्री का इस्तीफा लिया है."
'व्यक्तिगत प्रतिष्ठा' नहीं-- धर्मेंद्र प्रधान
लाखों छात्रों के भविष्य और सड़कों पर मचे बवाल के बीच, शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार अपने पद से इस्तीफा दे दिया. पिछले कुछ दिनों से देशभर में हो रहे उग्र प्रदर्शनों और विपक्ष के तीखे हमलों ने मोदी सरकार को पूरी तरह से बैकफुट पर धकेल दिया था.
धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपते हुए स्पष्ट किया कि यह उनके लिए 'व्यक्तिगत प्रतिष्ठा' का विषय नहीं है. उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले 10 दिनों में जो भी घटनाक्रम सामने आए हैं, उसने उन्हें विचलित कर दिया है. हालांकि, इस इस्तीफे को लेकर विपक्ष आक्रामक है और इसे सरकार की नैतिकता नहीं, बल्कि उसकी मजबूरी करार दे रहा है.
शिक्षा मंत्री का इस्तीफा (Education Minister Resigns) भले ही हो गया हो, लेकिन नीट परीक्षा विवाद (NEET Controversy) ने परीक्षा तंत्र पर जो गंभीर सवाल खड़े किए हैं, उनके जवाब देश का युवा अभी भी मांग रहा है। देखना यह होगा कि इस भारी सियासी डैमेज को कंट्रोल करने के लिए सरकार अगला कदम क्या उठाती है।























