Dharmendra Pradhan Resignation : शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफे के बाद क्या बंद हो जाएगी धर्मेंद्र प्रधान की सैलरी? जानें क्या है नियम
Dharmendra Pradhan Resignation : शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा भेज दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी है.

Dharmendra Pradhan Resignation : NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर देशभर में चले विवाद और छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा भेज दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी है.
इस्तीफे के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफे के बाद क्या धर्मेंद्र प्रधान की सैलरी बंद हो जाएगी और क्या इस्तीफा देने के बाद भी उन्हें मंत्री के तौर पर मिलने वाले वेतन और सुविधाओं का लाभ मिलता है या फिर सब कुछ तत्काल प्रभाव से समाप्त हो जाता है. तो आइए जानते हैं कि मंत्री के इस्तीफे के बाद वेतन और सुविधाओं को लेकर क्या नियम हैं.
इस्तीफे के बाद क्या बंद हो जाती है मंत्री की सैलरी?
सरकारी नियमों के अनुसार, किसी केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद उसकी मंत्री के रूप में मिलने वाली सैलरी और भत्ते उसी दिन से बंद हो जाते हैं, जिस दिन उनके इस्तीफे या पद छोड़ने की अधिसूचना जारी होती है. सैलरी एंड अलाउंसेस ऑफ मिनिस्टर्स एक्ट, 1952 के नियमों के तहत, जैसे ही किसी मंत्री के इस्तीफे या पद छोड़ने की आधिकारिक अधिसूचना ऑफिशियल गजट में प्रकाशित होती है, ठीक उसी दिन से उनका वेतन रुक जाता है. इसमें मंत्री के तौर पर मिलने वाली सैलरी, दैनिक भत्ता और निर्वाचन क्षेत्र भत्ता शामिल है.
अगर मंत्री सांसद भी हैं तो क्या होगा?
नियम के अनुसार, कोई भी राजनेता एक ही समय में मंत्री और सांसद या विधायक दोनों का वेतन नहीं ले सकता है. अब धर्मेंद्र प्रधान का मंत्री पद का वेतन बंद हो जाएगा, तो अगर वह अपनी विधायी सीट बरकरार रखते हैं, तो उन्हें केवल एक सामान्य सांसद को मिलने वाले मानक भत्ते और सैलरी ही दी जाएगी.
कौन-कौन सी सैलरी और भत्ते बंद हो जाते हैं?
मंत्री पद छोड़ने के बाद उन्हें मिलने वाले मंत्री पद से जुड़े सैलरी और भत्ते बंद हो जाते हैं. इनमें मंत्री के रूप में मिलने वाली सैलरी, दैनिक भत्ता (Daily Allowance), निर्वाचन क्षेत्र से जुड़ा मंत्री भत्ता (Constituency Allowance), मंत्री पद से जुड़े अन्य तय भत्ते शामिल हैं. इन सभी का भुगतान पद छोड़ने की तारीख से ही खत्म हो जाता है.
सरकारी बंगला कब तक खाली करना होता है?
नियमों के मुताबिक मंत्री को सरकारी आवास एक तय अवधि के अंदर खाली करना होता है. यह अवधि आमतौर पर एक महीने तक होती है. साथ ही मंत्री पद छोड़ने के बाद मंत्री के लिए उपलब्ध कराई गई कई सरकारी सुविधाएं भी खत्म हो जाती हैं. इनमें आधिकारिक सरकारी वाहन, मंत्री को मिलने वाला विशेष भत्ता (Sumptuary Allowance), मंत्री पद के लिए नियुक्त निजी या सचिवीय स्टाफ जैसी सुविधाएं शामिल हैं. इस्तीफा प्रभावी होते ही मंत्री पद से जुड़ी ये सुविधाएं वापस ले ली जाती हैं.
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