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TV Restriction: इस देश के नागरिक नहीं देख सकते अपनी मर्जी से टीवी चैनल, जानें क्यों है यह नियम

TV Restriction: दुनिया में एक ऐसा देश भी है जहां पर बिना सरकार की इजाजत के टेलीविजन पर मनपसंद कार्यक्रम भी नहीं देख सकते. आइए जानते हैं कौन सा है वह देश और क्यों है यह कानून.

TV Restriction: दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में लोग रिमोट से चैनल बदल सकते हैं और चुन सकते हैं कि वह क्या देखना चाहते हैं. लेकिन नॉर्थ कोरिया में यह आजादी नहीं है. देश में टेलीविजन कंटेंट पर सरकार का कड़ा कंट्रोल है. यहां नागरिकों को विदेशी चैनल या फिर इंडिपेंडेंट प्रोग्रामिंग देखने की इजाजत नहीं है. यह रोक इनफॉरमेशन कंट्रोल के एक बड़े सिस्टम का हिस्सा है जो इस बात को तय करता है कि लोग अपनी सीमाओं के बाहर दुनिया को कैसे देखते हैं.

सरकार द्वारा लॉक किए गए टेलीविजन सेट 

नॉर्थ कोरिया में नागरिकों को बेचे जाने वाले टेलीविजन सेट सिर्फ राज्य द्वारा मंजूर फ्रीक्वेंसी पाने के लिए पहले से कॉन्फिगर किए जाते हैं. खरीदने के बाद मालिकों को अपने टीवी सेट लोकल अधिकारियों के पास रजिस्टर कराने होते हैं. ऐसा कहा जाता है कि अधिकारी चैनलों को फिजिकल लॉक कर देते हैं और एक ऑफिशियल सरकारी सील या स्टीकर लगा देते हैं.

यह टेलीविजन आमतौर पर सिर्फ एक से चार राज्य कंट्रोल्ड चैनल दिखाते हैं. इनमें सबसे खास कोरियन सेंट्रल टेलीविजन है. आम नागरिकों के लिए अपने टेलीविजन के जरिए विदेशी न्यूज, एंटरटेनमेंट या फिर इंडिपेंडेंट मीडिया देखने का कोई कानूनी तरीका नहीं है.

मीडिया आईडियोलॉजी का एक टूल 

टेलीविजन कंटेंट को रूलिंग लीडरशिप और सरकार की आईडियोलॉजी के प्रति वफादारी को मजबूत करने के लिए डिजाइन किया गया है. प्रोग्राम अक्सर देश की लीडरशिप की तारीफ करने, मिलिट्री की कामयाबी को दिखाने और सोशलिस्ट वैल्यूज को बढ़ावा देने पर फोकस करते हैं. बाहरी जानकारी को कम करके सरकार पॉलिटिक्स, इकोनॉमिक्स और ग्लोबल इवेंट्स से जुड़ी बातों पर कड़ा कंट्रोल रखती है. नागरिकों को दूसरे नजरिए, विदेशी कल्चर और इंटरनेशनल आलोचना से काफी हद तक बचाया जाता है.

विदेशी कंटेंट के लिए सख्त सजा 

नॉर्थ कोरिया विदेशी मीडिया, खासकर साउथ कोरिया या पश्चिमी देशों का कंटेंट देखने या बांटने पर कड़ी सजा देता है. रिएक्शनरी आईडियोलॉजी और कल्चरल रिजेक्शन लॉ के तहत बैन फिल्म, ड्रामा, म्यूजिक देखते या शेयर करते हुए पकड़े जाने पर लोगों को कड़ी सजा भुगतनी पड़ सकती है. ह्यूमन राइट्स ग्रुप की रिपोर्ट बताती हैं की सजा में सालों तक कड़ी मेहनत शामिल हो सकती है. काफी गंभीर मामलों में सजा और भी कड़ी हो सकती है. 

अचानक इंस्पेक्शन और निगरानी 

रिपोर्ट्स के मुताबिक अधिकारी समय-समय पर घरों का इंस्पेक्शन करते हैं ताकि यह पक्का किया जा सके कि टेलीविजन लॉक के साथ कोई छेड़छाड़ तो नहीं की गई. सिक्योरिटी एजेंट यह वेरीफाई करने के लिए डिवाइस चेक कर सकते हैं कि कोई बिना इजाजत बदलाव तो नहीं किया गया. नॉर्थ कोरिया के टेलीविजन पर रोक एक बड़े मीडिया कंट्रोल सिस्टम का हिस्सा है जिसमें सीमित इंटरनेट एक्सेस, सरकारी अखबार और रेगुलेटेड रेडियो फ्रीक्वेंसी शामिल हैं. दरअसल यह नियम मुख्य रूप से पॉलिटिकल कंट्रोल बनाए रखने, विदेशी असर को सीमित करने और सरकार की बात को बनाए रखने के लिए है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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