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Census 2027 Rules: जनगणना के दौरान गलत जवाब दे दिया तो क्या उठा ले जाएगी पुलिस, जान लीजिए कानून?

Census 2027 Rules: भारत में 1 अप्रैल से जनगणना शुरू होने वाली है. आइए जानते हैं कि अगर कोई गलत जानकारी दे तो क्या पुलिस उसे गिरफ्तार कर सकती है.

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  • 1 अप्रैल से डिजिटल जनगणना, जानकारी देना अनिवार्य है।
  • गलत या अधूरी जानकारी पर ₹1000 जुर्माना या 3 साल की कैद।
  • जनगणना अधिकारी को सहयोग न करना या बाधा डालना दंडनीय।
  • अधिकारियों द्वारा दुरुपयोग या लापरवाही पर भी कड़ी कार्रवाई संभव।

Census 2027 Rules: भारत में 1 अप्रैल से डिजिटल जनगणना शुरू होने वाली है. इसी बीच नागरिकों के बीच उत्सुकता और भ्रम दोनों बढ़ रहे हैं.  लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि अगर गलत जानकारी दी गई तो क्या होगा? एक आम डर यह है कि क्या गलत जवाब देने पर किसी को पुलिस भी हिरासत में ले सकती है? आइए जानते हैं क्या है इन सवालों का जवाब.

जनगणना अधिनियम के तहत कानूनी जिम्मेदारी 

जनगणना अधिनियम 1948 साफ तौर से कहता है कि हर नागरिक जनगणना के दौरान सटीक जानकारी देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है. यह कोई वैकल्पिक चीज नहीं है. अधिनियम की धारा 8 के तहत जब कोई जनगणना अधिकारी सवाल पूछता है तो व्यक्तियों को सभी सवालों के जवाब सच्चाई से देने होंगे. इन कड़े नियम के पीछे का विचार काफी आसान है. सरकारी नीति, कल्याणकारी योजना और राष्ट्रीय योजना काफी हद तक सटीक जनगणना के डेटा पर ही निर्भर करती हैं.

क्या पुलिस आपको गिरफ्तार कर सकती है? 

पुलिस सिर्फ इस वजह से तुरंत आकर आपको गिरफ्तार नहीं करेगी क्योंकि आपने कोई गलत जवाब दिया है. जनगणना से जुड़े उल्लंघन को आपातकालीन अपराधिक अपराधों की तरह नहीं माना जाता है. हालांकि अगर यह पाया जाता है कि किसी ने जानबूझकर गलत जानकारी दी है या फिर सहयोग करने से इनकार कर दिया है तो कानूनी कार्यवाही शुरू की जा सकती है.

अगर गलत जानकारी दें तो क्या होगा? 

अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत जानकारी देता है या फिर जरूरी जानकारी को छुपाता है तो इसे अधिनियम की धारा 11 के तहत दंडनीय अपराध माना जाता है. कानून के मुताबिक ₹1000 तक का जुर्माना, 3 साल तक की कैद या दोनों का प्रावधान है. 

भाग लेने से इनकार करना भी एक अपराध 

कुछ लोग सोच सकते हैं कि वे सवालों के जवाब देना छोड़ सकते हैं. लेकिन कानून इसकी इजाजत नहीं देता. जानकारी देने से मना करना या फिर किसी जनगणना अधिकारी के काम में बाधा डालना भी दंडनीय है.  

जनगणना अधिकारियों के लिए नियम 

जनगणना अधिकारी भी कड़े नियमों से बंधे होते हैं. अगर कोई अधिकारी अनुचित या फिर आपत्तिजनक सवाल पूछता है, इकट्ठा किए गए डेटा का गलत इस्तेमाल करता है या फिर अपने कर्तव्य में लापरवाही दिखता है तो उन्हें भी दंड का सामना करना पड़ सकता है. इसमें जेल की सजा भी शामिल है.

यह भी पढ़ें: फिलीपींस में इमरजेंसी, पाकिस्तान में स्मार्ट लॉकडाउन... ईरान जंग से किन देशों की हालत पतली?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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