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विदेश में पढ़ाई का सपना होगा पूरा! सरकार दे रही स्कॉलरशिप, जानें कौन और कैसे कर सकता है आवेदन?

NOS योजना के तहत भारत सरकार आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी छात्रों को विदेश में मास्टर और पीएचडी की पढ़ाई के लिए पूर्ण वित्तीय सहायता प्रदान करती है.

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  • आवेदन संबंधित मंत्रालयों के ओवरसीज पोर्टल पर करें.

विदेश के टॉप विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करना लाखों भारतीय छात्रों का सपना होता है, लेकिन ज्यादा फीस और रहने का खर्च कई प्रतिभाशाली छात्रों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है. ऐसे छात्रों की मदद के लिए भारत सरकार राष्ट्रीय ओवरसीज स्कॉलरशिप (NOS) योजना संचालित करती है. इस योजना के तहत पात्र छात्रों को विदेश में मास्टर डिग्री और पीएचडी की पढ़ाई के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है.

राष्ट्रीय ओवरसीज स्कॉलरशिप केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी छात्रों को विश्व स्तरीय शिक्षा प्राप्त करने का अवसर देना है. इस योजना के माध्यम से छात्र दुनिया के टॉप और मान्यता प्राप्त विदेशी विश्वविद्यालयों में हायर एजुकेशन हासिल कर सकते हैं.

यह स्कॉलरशिप विशेष रूप से अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), DNT, भूमिहीन कृषि मजदूरों और पारंपरिक कारीगर परिवारों के छात्रों के लिए उपलब्ध है. सरकार का लक्ष्य इन वर्गों के छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा तक पहुंच प्रदान करना और उनके करियर को नई दिशा देना है.

स्कॉलरशिप के तहत छात्रों की पढ़ाई से जुड़ा लगभग पूरा खर्च सरकार वहन करती है. इसमें विश्वविद्यालय की ट्यूशन फीस, रहने और खाने के लिए वार्षिक मेंटेनेंस अलाउंस, मेडिकल इंश्योरेंस, वीजा शुल्क और आने-जाने के लिए इकोनॉमी क्लास हवाई यात्रा का खर्च शामिल होता है. इस प्रकार छात्रों और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ता और वे पूरी तरह अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं.

क्या है जरूरी पात्रता?

योजना का लाभ लेने के लिए कुछ पात्रता शर्तें भी निर्धारित की गई हैं. अनुसूचित जाति, डीएनटी, भूमिहीन कृषि मजदूर और पारंपरिक कारीगर श्रेणी के आवेदकों के परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम होनी चाहिए. वहीं अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के छात्रों के लिए यह आय सीमा 6 लाख रुपये प्रतिवर्ष निर्धारित की गई है.

यह भी पढ़ें - UGC Scholarship 2026: मास्टर्स के लिए छात्रों को मिलेगी आर्थिक मदद, जानिए कौन-कौन सी स्कॉलरशिप का उठा सकते हैं लाभ?

इसके अलावा आवेदक की आयु आवेदन के समय 35 वर्ष से कम होनी चाहिए. सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि छात्र को किसी मान्यता प्राप्त विदेशी विश्वविद्यालय से मास्टर या पीएचडी कार्यक्रम में बिना शर्त प्रवेश प्रस्ताव प्राप्त होना चाहिए. आमतौर पर विश्व स्तर पर अच्छी रैंकिंग वाले विश्वविद्यालयों में प्रवेश पाने वाले छात्रों को प्राथमिकता दी जाती है.

कहां कर सकते हैं अप्लाई?

राष्ट्रीय ओवरसीज स्कॉलरशिप के लिए आवेदन प्रक्रिया संबंधित मंत्रालयों के माध्यम से संचालित की जाती है. अनुसूचित जाति, डीएनटी और भूमिहीन कृषि मजदूर श्रेणी के छात्र सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (MSJE) के राष्ट्रीय ओवरसीज स्कॉलरशिप पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं.

जरूरी जानकारी देखना आवश्यक

वहीं, अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के छात्रों के लिए आवेदन प्रक्रिया जनजातीय कार्य मंत्रालय (Ministry of Tribal Affairs) के राष्ट्रीय ओवरसीज स्कॉलरशिप पोर्टल के माध्यम से पूरी की जाती है. आवेदन से पहले छात्रों को पात्रता, आवश्यक दस्तावेज और आवेदन की अंतिम डेट से जुड़ी जानकारी अच्छे से देखनी चाहिए.

यह भी पढ़ें - इंजीनियरिंग छात्रों के लिए सरकार दे रही मोटी स्कॉलरशिप, जानें कौन-कौन सी योजनाएं हैं और कैसे कर सकते हैं अप्लाई

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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