क्या भारत की तरह अमेरिका की संसद भी पलट सकती है कोर्ट का फैसला? जान लीजिए जवाब
US Birthright Citizenship: कोर्ट ने नागरिकता से जुड़े अमेरिकी सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है. क्या अमेरिका की संसद भारत की संसद की तरह कोर्ट केस फैसले को पलट सकती है. चलिए आपको बताते हैं इसका जवाब.

US Birthright Citizenship: अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ लेने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने एक के बाद बड़े फैसले लिए थे. जिनमें एक फैसला बर्थ राइट सिटीजनशिप यानी जन्म के आधार पर नागरिकता का भी था. डोनाल्ड ट्रंप ने जन्मसिद्ध अधिकार पर रोक लगा दी थी. लेकिन अमेरिकी कोर्ट ने ट्रंप कैसे फैसले पर रोक लगा दी है.
कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले को असंवैधानिक बताया है. और इसे अस्थाई तौर पर रोकने का आदेश दे दिया है. बता दें डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में जन्म के आधार पर नागरिकता देने के कानून को रद्द कर दिया था. अब कोर्ट ने रोक लगा दी है तो क्या अमेरिका की संसद भारत की संसद की तरह कोर्ट केस फैसले को पलट सकती है. चलिए आपको बताते हैं इसका जवाब.
क्या कोर्ट का डिसीजन बदल सकती है अमेरिकन पार्लियामेंट?
भारतीय संविधान के अनुसार संसद को कानून बनाने की शक्ति है. लेकिन वह न्यायपालिका के फैसलों को सीधा नहीं पलट सकती. यानी सुप्रीम कोर्ट ने अगर किसी कानून को असंवैधानिक घोषित किया है. तो सीधे संसद उसे नहीं बदल सकती. लेकिन संविधान में संशोधन करके उसे फैसले को बदला जा सकता है. लेकिन अमेरिका में ऐसा हो पाना काफी मुश्किल काम है.
अमेरिकी संविधान के तहत सुप्रीम कोर्ट को आखरी संवैधानिक व्याख्या का अधिकार प्राप्त है. अब अगर ऐसे में अमेरिकी संसद कोर्ट के किसी फैसले को पलटना चाहती है. तो उसके लिए काफी कठिन होता है, इसमें या तो संसद को संविधान में संशोधन करना पड़ता है या फिर नया कानून बनाना पड़ता है. यानी कहें तो अमेरिकी संसद कोर्ट के फैसले को पलट सकती है लेकिन इसकी प्रक्रिया काफी कठिन होगी.
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कैसे पलटा जा सकता है कोर्ट का फैसला?
अमेरिकी कोर्ट का फैसला बदलना आसान काम नहीं है. इसके लिए या तो संविधान में संशोधन की जरूरत पड़ेगी या फिर नया कानून लागू करना होगा और दोनों ही काम काफी कठिन और समय लेने वाले हैं. संविधान में संशोधित करने के लिए अमेरिकी संसद जिसे कांग्रेस कहा जाता है. उसके दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत से संशोधन का पास होना जरूरी है. इसके बाद तीन चौथाई राज्यों में इस संशोधन पर सहमति जरूरी है.
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वहीं अगर नए कानून की बात की जाए तो अगर अमेरिकी संसद कोई नया कानून पास करती है और सुप्रीम कोर्ट उसे कानून को संवैधानिक तौर पर वैध नहीं पाती तो वह उसे रद्द कर सकती है. बता दें अमेरिका में जन्म सिद्ध अधिकार आर्टिकल 14 के तहत दिए गए हैं. अगर अमेरिकी संसद को कोर्ट के फैसले को पलटना है तो पहले आर्टिकल 14 में संशोधन करने होंगे जिसकी प्रक्रिया काफी कठिन है.
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