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India Gold Rules: क्या आम लोगों का सोना जमा करवा सकती है सरकार, इस देश में हो चुका है ऐसा

India Gold Rules: हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एक साल तक सोना ना खरीदने की अपील की है. आइए जानते हैं कि क्या सरकार आम लोगों का सोना जमा करवा सकती है.

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  • प्रधानमंत्री ने विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव के कारण सोना खरीदने से बचने को कहा।
  • अमेरिका में ग्रेट डिप्रेशन के दौरान नागरिकों से सोना जमा करने पर रोक लगी थी।
  • भारत ने 1968 में स्वर्ण नियंत्रण अधिनियम से सोने के आभूषणों को छोड़कर सब पर रोक लगाई।
  • सामान्यतः सरकार निजी सोना जब्त नहीं कर सकती, आपातकाल में नियंत्रण संभव।

 India Gold Rules: भारत में सोना परंपरा, बचत और आर्थिक सुरक्षा से गहराई से जुड़ा हुआ है. शादियों और त्योहार से लेकर लंबे समय के निवेश तक भारतीय परिवारों में सोने को सबसे सुरक्षित संपत्तियों में से एक माना जाता है. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से अपील की है कि वे मौजूदा वैश्विक तनाव और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे दबाव की वजह से 1 साल तक सोना खरीदने से बचें. इससे लोगों के बीच एक बड़ी बहस छिड़ गई है. आइए जानते हैं कि क्या सरकार आम नागरिकों को अपना सोना जमा करने के लिए मजबूर कर सकती है और साथ ही ऐसा पहले कहां हो चुका है. 

नागरिकों को सोना जमा करने के लिए मजबूर करना 

निजी सोने के स्वामित्व के खिलाफ सरकारी  कर्रवाई का सबसे मशहूर उदाहरण अमेरिका में ग्रेट डिप्रेशन के दौरान देखने को मिला था. 1933 में तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट ने कार्यकारी आदेश 6102 जारी किया.  इसने प्रभावी रूप से नागरिकों द्वारा सोना जमा करने पर रोक लगा दी थी. इस आदेश के तहत अमेरिकियों को अपने ज्यादातर सोने के सिक्के, बुलियन और सोने के प्रमाण पत्र सरकार को सौंपने पड़ते थे. इसके बदले में उन्हें कागजी मुद्रा दी जाती थी. नागरिकों को सिर्फ अपने निजी इस्तेमाल के लिए सीमित मात्रा में सोना रखने की अनुमति थी. उस समय इस आदेश का उल्लंघन करने पर कड़ी सजा हो सकती थी. इसमें भारी जुर्माना और जेल की सजा भी शामिल थी. 

 अमेरिकी सरकार ने यह कदम क्यों उठाया था?

यह फैसला एक बड़े आर्थिक पतन के दौर में लिया गया था. इसे ग्रेट डिप्रेशन के नाम से जाना जाता है. बैंक दिवालिया हो रहे थे, बेरोजगारी तेजी से बढ़ रही थी और अर्थव्यवस्था संकट में थी. अमेरिकी सरकार अपने सोने के भंडार को मजबूत करना चाहती थी और मौद्रिक नीति पर ज्यादा कंट्रोल हासिल करना चाहती थी. अधिकारियों का ऐसा मानना था कि निजी तौर पर सोना जमा करने की प्रवृत्ति आर्थिक सुधार में बाधा डाल रही थी. साथ ही अर्थव्यवस्था में पैसे के प्रवाह को सीमित कर रही थी. 

भारत में सोने पर कड़े प्रतिबंध 

हालांकि भारत ने कभी भी आम नागरिकों से सीधे तौर पर उस तरह से सोना जब्त नहीं किया है जैसा अमेरिका ने किया था. लेकिन देश ने पहले भी सोने के स्वामित्व और व्यापार पर कड़े नियंत्रण लागू किए हैं. 1968 में भारत सरकार ने स्वर्ण नियंत्रण अधिनियम लागू किया था. इस कानून के तहत नागरिकों को सोने की ईंटें और सोने के सिक्के रखने से प्रतिबंधित कर दिया गया था. इसी के साथ सोने की बड़ी मात्रा होने पर उसकी घोषणा करना अनिवार्य था. लोगों को मुख्य रूप से सिर्फ आभूषण के रूप में ही सोना रखने की अनुमति थी. यह कानून सोने के इंपोर्ट को कम करने और काले धन पर रोक लगाने के लिए लाया गया था. लेकिन 1990 में भारत के आर्थिक उदारीकरण के दौर में इस कानून को खत्म कर दिया गया. 

यह भी पढ़ेंः क्या सोने की खरीद पर पूरी तरह बैन लगा सकती है सरकार, कब किया जा सकता है ऐसा?

भारत में सोने से जुड़े मौजूदा नियम 

अभी भारत में कोई ऐसी तय कानूनी ऊपरी सीमा नहीं है कि कोई व्यक्ति कितना सोना अपने पास रख सकता है. बस शर्त यह है कि अगर अधिकारी उससे पूछताछ करें तो वह सोना हासिल करने के वैध स्रोतों के बारे में बता सके. हालांकि आयकर विभाग की तलाशी के दौरान सोने की कुछ खास मात्रा को आमतौर पर जब्त होने से छूट मिलती है.  गाइडलाइंस के मुताबिक ऐसी कार्रवाई के दौरान शादीशुदा महिला बिना किसी सबूत के 500 ग्राम, अविवाहित महिला 250 ग्राम और पुरुष 100 ग्राम तक सोना अपने पास रख सकते हैं.

क्या भारतीय सरकार नागरिकों को अपना सोना देने के लिए मजबूर कर सकती है? 

सामान्य परिस्थितियों में भारत सरकार नागरिकों के निजी सोने को  मनमाने तरीके से जब्त नहीं कर सकती. हालांकि संवैधानिक और आपातकालीन शक्तियों के तहत सरकार युद्ध, गंभीर आर्थिक संकट या फिर राष्ट्रीय आपातकाल जैसी परेशानियों के दौरान निजी संपत्तियों को कंट्रोल जरूर कर सकती है.

यह भी पढ़ेंः भारत में कौन देता है सबसे ज्यादा टैक्स, देख लें लिस्ट में सबसे ऊपर किसका नाम?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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