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कितने सालों बाद मौत को भी आ जाएगी मौत? जानिए कब अमर होगा इंसान

आपने कई बार अपने घरों में दादी-नानी से देवताओं या असुरों के अमर होने की कहानी सुनी होगी, लेकिन क्या कभी सोचा है कि इंसान भी अमर हो सकता है? चलिए जानें कि इंसान कब तक अमर होगा.

सदियों से इंसान के मन में हमेशा अमर होने की चाहत रही है. पुरानी कहानियों और धार्मिक ग्रंथों में हमने कई ऐसे किस्से सुने हैं, जहां इंसानों या देवताओं को अमरता का वरदान मिला था. लेकिन क्या आज के आधुनिक विज्ञान के दौर में ऐसा मुमकिन है? दुनिया के बड़े-बड़े वैज्ञानिक इस रहस्य को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं. कुछ साल पहले गूगल के एक पूर्व वैज्ञानिक ने दावा किया था कि इंसानी तकनीक इतनी आगे बढ़ चुकी है कि इंसान बहुत जल्द मौत को हरा देगा और हमेशा के लिए अमर हो जाएगा. चलिए इसके बारे में विस्तार से समझें.

वैज्ञानिक की 86 फीसदी भविष्यवाणियां हुईं सच

अमरता को लेकर बहुत सारे कयास लगाए जाते हैं, लेकिन यह दावा किसी आम इंसान ने नहीं बल्कि दुनिया के जाने-माने कंप्यूटर वैज्ञानिक और भविष्यवक्ता रे कूर्जवील ने किया है. गूगल के पूर्व इंजीनियर रह चुके कूर्जवील को साल 1999 में अमेरिका के प्रतिष्ठित नेशनल मेडल ऑफ टेक्नोलॉजी से भी नवाजा जा चुका है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि इतिहास में इनके द्वारा की गई करीब 86 फीसदी भविष्यवाणियां बिल्कुल सच साबित हुई हैं. इसलिए दुनियाभर के विशेषज्ञ उनके इस चौंकाने वाले दावे को गंभीरता से ले रहे हैं. 

इंसानों के अमर होने में कितने साल?

रे कूर्जवील ने साल 2005 में द सिंगुलैरिटी इज नियर नाम की एक बेहद मशहूर किताब लिखी थी. इस किताब में दावा किया गया था कि साल 2030 तक इंसान एक ऐसा जीवन हासिल कर लेगा, जो कभी नहीं खत्म होगा, यानि फिर वह पूरी तरीके से अमर हो जाएगा. उनके इस अनुमान के मुताबिक, विज्ञान की मदद से मौत पर विजय पाने के लिए अब बहुत ही कम समय बचा है. वैज्ञानिक ने अपनी इस थ्योरी को समझाने के लिए आधुनिक जेनेटिक्स, नैनोटेक्नोलॉजी और रोबोटिक्स जैसी तकनीकों को मुख्य आधार बनाया है.

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इंसानों को कैसे अमर बनाएंगे नैनोबॉट्स?

वैज्ञानिक का मानना है कि नैनोटेक्नोलॉजी की मदद से भविष्य में बेहद सूक्ष्म यानि छोटे आकार के एज-रिवर्सिंग नैनोबॉट्स बनाए जाएंगे. ये नैनोबॉट्स इंसानी शरीर के भीतर इंजेक्ट किए जाएंगे, जो खून के जरिए पूरे शरीर में घूमेंगे. जैसे-जैसे इंसानों की उम्र बढ़ती है तो उसके शरीर के सेल्स और टिशूज कमजोर होकर मरने लगते हैं, जिससे बुढ़ापा और बीमारियां आती हैं. लेकिन ये जादुई नैनोबॉट्स शरीर के अंदर जाकर खराब हो रहे सेल्स और टिशूज को लगातार ठीक करते रहेंगे, जिससे इंसान कभी बूढ़ा नहीं होगा. 

कंप्यूटर और इंसानी दिमाग का मिलन

कूर्जवील के मुताबिक साल 2029 तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई पूरी तरह से इंसानी दिमाग जितनी समझदार और सक्षम हो जाएगी. इसके बाद साल 2045 तक सिंगुलैरिटी ता समय आएगा, जब इंसान अपने दिमाग को कंप्यूटर और एआई के साथ पूरी तरह से मर्ज कर देगा. यानी ऐसा होने से इंसानी सोचने-समझने की क्षमता आज के मुकाबले अरबों गुना ज्यादा बढ़ जाएगी. जब इंसानी चेतना मशीनों के साथ जुड़ जाएगी, तब जैविक शरीर के खत्म होने के बाद भी इंसान का अस्तित्व हमेशा के लिए बचा रहेगा.

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About the author निधि पाल

निधि पाल एबीपी लाइव में कंटेंट राइटर हैं. ये यहां पर जीके सेक्शन की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं. पिछले 7 साल से पत्रकारिता की दुनिया में कार्यरत निधि पाल ने इससे पहले अमर उजाला डिजिटल, न्यूज 24, ईटीवी भारत हैदराबाद जैसे बड़े संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है.

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो उन्होंने आईआईएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन लखनऊ से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है.

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